नई दिल्ली: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) दिल्ली के सैकड़ों छात्रों ने सोमवार को संस्थान के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. छात्र दूसरे वर्ष के एमएससी फिजिक्स छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद जवाबदेही की मांग कर रहे थे. बिहार के पटना निवासी 31 साल के ऋषिकेश की 22 अगस्त को लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी.
प्रदर्शन की शुरुआत सोमवार सुबह 9 बजे लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स से हुई. शाम तक छात्रों ने निदेशक कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया. छात्रों और प्रशासन के बीच हुई बैठक में उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी.
कैंपस के एक मास्टर डिग्री छात्र ने दिप्रिंट से कहा, “हम लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में इसलिए प्रदर्शन कर रहे थे क्योंकि ऋषिकेश वहीं गिरे थे. अब हम निदेशक कार्यालय के बाहर हैं क्योंकि फैसले यहीं लिए जाते हैं.”
मंगलवार को छात्र फिर लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में जुटे. उनकी तीन प्रमुख मांगें हैं—जांच, इस्तीफा और मुआवजा.
दिल्ली पुलिस को 22 अगस्त सुबह करीब 8:33 बजे घटना की सूचना मिली थी. मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. पुलिस ऋषिकेश के फोन और उनके काउंसलिंग रिकॉर्ड की जांच कर रही है.
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि संस्थान से काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य संबंधित जानकारी हासिल की जा रही है तथा तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक, कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
छात्रों का आरोप है कि ऋषिकेश काफी मानसिक दबाव में थे. उनका दावा है कि उन्हें रिसर्च प्रोजेक्ट और हॉस्टल आवास नहीं दिया गया था, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ी.
छात्रों ने प्रशासन को अपनी मांगों की औपचारिक सूची सौंपी है, जिस पर निदेशक रंगन बनर्जी ने प्राप्ति के रूप में हस्ताक्षर किए हैं. मांग पत्र में कहा गया है कि छात्र के साथ “मोरल प्रोफाइलिंग” की गई, जिसका किसी वैज्ञानिक और सार्वजनिक संस्थान में कोई स्थान नहीं होना चाहिए.
छात्रों का कहना है कि इस तरह का व्यवहार छात्रों की आवास और अन्य संसाधनों तक पहुंच को प्रभावित करता है और कैंपस के एक वैध छात्र के रूप में उनकी गरिमा को नुकसान पहुंचाता है.
छात्र संगठनों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में देशभर के आईआईटी में 70 से अधिक छात्रों की आत्महत्या से मौत हुई है. मार्च के बाद ऋषिकेश आईआईटी दिल्ली में ऐसी दूसरी घटना हैं. मार्च में प्रथम वर्ष के बीटेक छात्र हर्षित स्वामी की भी आत्महत्या से मौत हुई थी.

छात्रों का कहना है कि जुलाई 2023 से आईआईटी दिल्ली परिसर में आठ छात्रों की मौत हो चुकी है. प्रदर्शनकारी सवाल उठा रहे हैं कि संस्थान को प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल बनाने के लिए और कितनी जानें जाने का इंतज़ार है.
निदेशक ने मंगलवार तड़के छात्रों की मांगों पर संस्थान का जवाब ईमेल के जरिए भेजा. हालांकि, छात्रों का कहना है कि जब तक डीन और छात्र कल्याण से जुड़े एसोसिएट डीन के इस्तीफे की उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
बनर्जी ने अपने ईमेल में कहा कि प्रशासन ने छात्र प्रतिनिधियों और अन्य छात्रों के साथ कई दौर की बैठकें कीं. इनमें सुबह 9 बजे डोगरा हॉल, फिर लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स और बाद में सीनेट रूम तथा मुख्य भवन में हुई बैठकें शामिल थीं.
संस्थान ने ऋषिकेश कुमार की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए बाहरी जांच समिति गठित की है. समिति संबंधित छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक कार्यालयों से बातचीत करेगी, मौजूदा प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी और अपनी सिफारिशें देगी.
समिति को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. इसमें उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी और आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार, एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि तथा रजिस्ट्रार शामिल हैं. रजिस्ट्रार समिति के सचिव और संयोजक होंगे.
संस्थान ने ऋषिकेश के चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति, बेनेवोलेंट फंड से सहायता और उनके परिवार के लिए स्वैच्छिक योगदान कोष बनाने की भी घोषणा की है.
इसके अलावा, लंबित शिकायतों के समाधान के लिए एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे ऐसे छात्रों के लिए अतिरिक्त फैकल्टी-प्लस-स्टूडेंट मेंटर व्यवस्था शुरू करने की बात कही गई है, जिन्हें अभिभावकीय निगरानी की आवश्यकता हो.
संस्थान के अनुसार, ऋषिकेश ने जुलाई 2025 में एमएससी फिजिक्स कार्यक्रम में दाखिला लिया था. वह शिवालिक हॉस्टल में रहते थे और पहले सेमेस्टर में उनका प्रदर्शन अच्छा रहा था.
मार्च 2026 में उन्हें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुईं. संस्थान के मुताबिक, काउंसलर और मनोचिकित्सक ने उन्हें लगातार अभिभावकीय निगरानी में रहने की सलाह दी थी. इसके बाद उन्होंने दूसरे सेमेस्टर से नाम वापस ले लिया.
जुलाई 2026 में लौटने पर उन्हें दोबारा यही सलाह दी गई. वह एक अभिभावक के साथ कैंपस के बाहर रहने लगे और बाद में तीसरे सेमेस्टर से भी नाम वापस ले लिया, जिसे फिजिक्स विभाग ने मंजूरी दी थी.
संस्थान के इस ईमेल के अलावा, जो रात करीब 1 बजे भेजा गया, प्रशासन ने मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया है.
प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा, “जब तक इस्तीफे की मांग पूरी नहीं होती, हम पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने अपना वादा तोड़ा. कहा गया था कि जवाब दिन खत्म होने तक दिया जाएगा, लेकिन ईमेल रात 1 बजे भेजा गया.”
छात्र ने कहा कि प्रदर्शनकारी प्रशासन की प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं और उनमें काफी नाराजगी है.
IIT Delhi students hold fort untill the demands are met!! Justice for Rishikesh! We demand Accountability!! https://t.co/61mWp7QbEP pic.twitter.com/qoCeLUR93D
— wazziii (@hopelessmalakha) August 24, 2026
‘काउंसलिंग सेवाएं ऋषिकेश को बचाने में नाकाम रहीं’
छात्रों की मांग पर 24 अगस्त को पूरे कैंपस में कक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऋषिकेश की मौत को सामान्य घटना मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए.
छात्रों की मांगों में प्रशासनिक लापरवाही की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही और यह स्पष्ट करना शामिल है कि हॉस्टल नहीं मिलने, अकादमिक प्रोजेक्ट नहीं मिलने तथा अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया ने ऋषिकेश की मानसिक स्थिति को किस तरह प्रभावित किया.
छात्र संस्थान की मानसिक स्वास्थ्य नीति और प्रोटोकॉल को सार्वजनिक करने की भी मांग कर रहे हैं. इसमें छात्र काउंसलिंग सेवाओं, एसोसिएट डीन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर, डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स और निदेशक की भूमिका स्पष्ट करने की मांग शामिल है.
मांग पत्र में संस्थान में छात्रों की आत्महत्याओं के पैटर्न को रोकने के लिए उठाए गए कदमों और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुपालन की जानकारी भी मांगी गई है.
प्रशासन के साथ बैठक में शामिल एक पीएचडी छात्र ने आरोप लगाया कि बैठक का माहौल कुछ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद बिगड़ गया और छात्र कल्याण की डीन श्रीदेवी उपाध्यायुला बैठक से बाहर चली गईं.
छात्र के मुताबिक, डीन ने मृत छात्र को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियां कीं. छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल आवंटन से जुड़े फैसले में उनकी भूमिका थी और बैठक में उन्होंने छात्रों की तुलना एकलव्य से करते हुए जातिगत टिप्पणी की. यह छात्र अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहता.
प्रशासन ने शुरुआत में 6 लाख रुपये के मुआवजे की पेशकश की थी और कहा था कि राशि पर आगे विचार किया जाएगा. छात्रों का कहना है कि संस्थान जांच के लिए तैयार है, लेकिन डीन और एसोसिएट डीन के इस्तीफे की मांग का विरोध कर रहा है.
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि जांच की घोषणा आसान कदम है, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों का इस्तीफा ही उनकी मुख्य मांग है.
एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा, “अगर छात्र कल्याण कार्यालय हॉस्टल देने से इनकार कर सकता है और फिर बैठक में इस तरह की बातें की जाती हैं, तो जिम्मेदार लोगों को उन पदों पर बने नहीं रहना चाहिए.”
प्रदर्शन में शामिल छात्रों को प्रशासनिक कार्रवाई का डर भी है. इसी वजह से कई छात्र खुलकर सामने आने से बच रहे हैं.
कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और केवल वैध आईआईटी पहचान पत्र वाले लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है. छात्रों का कहना है कि वे इस्तीफे और व्यापक जवाबदेही की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे.
Lakhs spent in coaching & tuition fees every year to send young students to suicide?
The celebration at enrollment in IITs, all leading to young deaths?
How many deaths will it take till we know that too many students have died?#IITDelhi pic.twitter.com/BDIqNrOwEx
— Neha (@neha_aisa) August 24, 2026
रविवार को जेएनयू के छात्रों ने आईआईटी दिल्ली के गेट नंबर 5 के बाहर प्रदर्शन किया. जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने कहा कि प्रदर्शन इसलिए किया गया क्योंकि आईआईटी में छात्रों की आत्महत्याओं को सामान्य घटना की तरह देखा जा रहा है.
उन्होंने कहा, “संस्थान छात्रों की आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं. इसे सामान्य नहीं बनाया जा सकता.”
यादव ने रोहित वेमुला, दर्शन सोलंकी और पायल तड़वी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वंचित वर्गों के छात्रों को बार-बार भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उन्हें पढ़ाई छोड़ने या उससे भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला की मौत के बाद से ‘रोहित एक्ट’ लागू करने की मांग चल रही है, ताकि किसी भी छात्र को भेदभाव का सामना न करना पड़े.
‘रोहित एक्ट’ एक प्रस्तावित केंद्रीय कानून है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना और वंचित समुदायों के छात्रों के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करना है.
आईआईटी-जैम की तैयारी के लिए देते थे ट्यूशन
आईआईटी दिल्ली में दाखिले से पहले ऋषिकेश ने एनआईटी राउरकेला में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन आर्थिक समस्याओं के कारण उन्हें यह कोर्स छोड़ना पड़ा था.
करीब एक साल पहले यूट्यूब पर अपलोड किए गए एक इंटरव्यू में होस्ट केशव मिश्रा ने बताया था कि ऋषिकेश ने हार नहीं मानी और बाद में बीएससी की पढ़ाई पूरी की. बीएससी के तीसरे वर्ष में उन्होंने आईआईटी-जैम की परीक्षा दी और आईआईटी दिल्ली में दाखिला हासिल किया.
इंटरव्यू में ऋषिकेश ने बताया था कि वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर पर ट्यूशन भी पढ़ाते थे ताकि कमाई कर सकें. उन्होंने कहा था कि कॉलेज के बाद वह घर पर और अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में ट्यूशन पढ़ाते थे और अनअकैडमी के जरिए जैम की तैयारी करते थे.
जेईई मेन और जैम दोनों परीक्षाएं पास करने वाले ऋषिकेश को शतरंज और टेबल टेनिस खेलना पसंद था. वह गाना भी गाते थे. इंटरव्यू में उन्होंने रणबीर कपूर की फिल्म बेशरम (2013) के गीत ‘दिल का जो हाल है’ की कुछ पंक्तियां गाईं.
गाना खत्म करने के बाद मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा था, “आप यहां आए हैं, तो अच्छा समय बिताइए और खुश होकर जाइए. लोग वैसे भी दुखी ज़िंदगी जी रहे हैं, दुख हर जगह है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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