नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की अगुआई में हुई एक नई स्टडी में पता चला है कि 1799 से 2026 के बीच दिल्ली में यमुना नदी करीब 68 प्रतिशत संकरी हो गई है. वहीं, नदी में पानी का बहाव (डिस्चार्ज) करीब 89 प्रतिशत घट गया है.
‘टू सेंचुरीज़ ऑफ हाइड्रोजियोमॉर्फिक चेंजेज: विड्थ-डिस्चार्ज डायनेमिक्स ऑफ द अर्बनाइज्ड यमुना रिवर इन दिल्ली’ नाम की इस स्टडी में बताया गया है कि दिल्ली में यमुना के 50 किलोमीटर लंबे हिस्से पर बने कई बैराजों का नदी पर बड़ा असर पड़ा है. शोधकर्ताओं ने पिछले 200 साल में नदी की चौड़ाई और पानी के बहाव में हुए बदलाव को समझने के लिए पुराने नक्शों और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया.
स्टडी में कहा गया है, “नदी की चौड़ाई, पानी के बहाव और जमीन के इस्तेमाल में हुए बदलाव, साथ ही बढ़ती आबादी की वजह से नदी की प्राकृतिक क्षमता कम हो गई है. अब नदी बाढ़ जैसी बड़ी घटनाओं का पहले की तरह सामना नहीं कर पाती.”
स्टडी में यह भी बताया गया है कि पिछले एक सदी (1912 से 2024) के दौरान इंसानों द्वारा बनाए गए तटबंधों (एम्बैंकमेंट) की वजह से यमुना के करीब 33 प्रतिशत बाढ़ वाले मैदान (फ्लडप्लेन) नदी से अलग हो गए हैं.
यह स्टडी 1 अप्रैल को जर्नल ऑफ द जियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुई.
दबाव में यमुना
दिल्ली यूनिवर्सिटी और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER), भोपाल के शोधकर्ताओं ने 1799 की यमुना नदी का नक्शा तैयार किया. उस समय नदी अपने प्राकृतिक रूप में थी और उस पर कोई बैराज नहीं बना था.
शोधकर्ताओं ने पाया कि इंसानी दखल से पहले, जब नदी पूरी तरह भरी होती थी लेकिन बाढ़ नहीं आती थी, तब उसकी औसत चौड़ाई करीब 658 मीटर थी. यह 2024 तक घटकर करीब 210 मीटर रह गई.
नदी की चौड़ाई में आए इस बदलाव की वजह से पानी का बहाव भी 1799 में करीब 30,000 घन मीटर प्रति सेकंड से घटकर 2024 में सिर्फ करीब 3,900 घन मीटर प्रति सेकंड रह गया.
स्टडी के मुताबिक, दिल्ली की तेज़ी से बढ़ती आबादी इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह है. इसमें कहा गया है कि 19वीं सदी की शुरुआत में दिल्ली की आबादी करीब 2.5 लाख थी, जो 2024 में बढ़कर करीब 2.15 करोड़ हो गई. आबादी बढ़ने से वर्षों में नदी पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ा.
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 1912 से 2024 के बीच शहर को बाढ़ से बचाने के लिए बनाए गए तटबंधों की वजह से करीब 45 वर्ग किलोमीटर फ्लडप्लेन नदी से अलग हो गया. समय के साथ इन अलग-अलग हिस्सों में विकास हुआ, लेकिन जब नदी में बाढ़ आती थी, तब ये इलाके फिर भी डूब जाते थे.
स्टडी में कहा गया है कि इतने लंबे समय में हुए इन बदलावों ने यमुना की बाढ़ से निपटने की प्राकृतिक क्षमता को कमजोर कर दिया है.
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