नई दिल्ली: ‘पेंटेड हवेली टाउन्स ऑफ शेखावटी’ को UNESCO की टेंटेटिव वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किए जाने के कुछ महीनों बाद, दिल्ली में लगी एक प्रदर्शनी में इस क्षेत्र की कला और कहानियों को एक साथ पेश किया गया. इन चीजों के जरिए राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र के सफर को दिखाया गया है, जो ब्रिटिश राज, आजादी की लड़ाई और आजाद भारत के 80 सालों से होकर गुजरता है.
प्रदर्शनी का उद्घाटन दक्षिण एशिया के लिए UNESCO के रीजनल हेड टिम कर्टिस ने किया. इस मौके पर कलाकार राजा रवि वर्मा के वंशज राजा रामा वर्मा और श्रुति फाउंडेशन की चेयरपर्सन गुरु शोवना नारायण भी मौजूद थीं. श्रुति फाउंडेशन शिक्षा, विरासत और संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाली एक NGO है.
इस प्रदर्शनी में म्यूजियम ऑफ हेरिटेज एंड आर्ट यानी मोहर के अमूर्त और श्रुति नाडा पोद्दार की निजी कलाकृतियों से बनी बड़ी वस्तुएं रखी गई हैं। इनमें पेंटिंग्स, पांडुलिपियां, सिक्के, पेपर, चिट्टियां, सिक्के और ओलियोग्राफ़ शामिल हैं। पोद्दार श्रुति फाउंडेशन की संस्थापक हैं और “राज से स्वराज तक – औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र भारत तक, शेखावटी की नजरों से” नाम की इस प्रदर्शनी की क्यूरेटर हैं.

प्रदर्शनी में राजा रवि वर्मा कलेक्शन, मैनचेस्टर के कपड़ों के लेबल, पुराने संदेश, सिक्के, करेंसी, खेल और महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस की दुर्लभ तस्वीरें भी शामिल थीं.
ये चीजें दिखाती हैं कि भारतीय और विदेशी प्रभाव किस तरह आपस में मिले और उन्होंने देश को आकार दिया. इनमें आजादी की लड़ाई और एक नए भारत के बनने की भी झलक मिलती है.
पोद्दार ने कहा, “शेखावटी की हवेलियों की वास्तुकला में पुर्तगाली और ब्रिटिश वास्तुकला का मिला-जुला प्रभाव साफ दिखाई देता है.”
राजस्थान की खुली कला गैलरी
प्रदर्शनी में राजस्थान के व्यापारी समुदायों की उस भूमिका को भी दिखाया गया है, जो उन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई और आजाद भारत के विकास में निभाई.
कर्टिस ने कहा, “मुझे लगता है कि यह प्रदर्शनी राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र की समृद्धि को बहुत अच्छी तरह दिखाती है. मैं जनवरी में वहां जाने के लिए भाग्यशाली रहा. मैं सिर्फ वहां के शहरों की शानदार वास्तुकला देखकर ही नहीं, बल्कि वहां की पूरी कला, उससे जुड़ी कला, दीवारों पर बने चित्र, तकनीक और तकनीक के प्रति लोगों की दिलचस्पी देखकर भी बहुत प्रभावित हुआ. वहां की संपन्नता भी साफ दिखाई देती है.”

शेखावटी को अक्सर राजस्थान की “ओपन एयर आर्ट गैलरी” कहा जाता है, क्योंकि यहां की हवेलियों पर बने शानदार भित्ति चित्र बहुत खास हैं. लेकिन इन हवेलियों की कला और वास्तुकला के महत्व के अलावा, इनमें उन लोगों की कहानियां भी सुरक्षित हैं जिन्होंने इन्हें बनाया था. साथ ही, इनमें उन बदलते सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभावों की कहानी भी है जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया.
प्रदर्शनी की क्यूरेटर श्रुति नाडा पोद्दार ने कहा, “शेखावटी को हमेशा इसकी खूबसूरत भित्ति चित्रों के लिए जाना जाता है, लेकिन इन हवेलियों से जुड़ी कहानियों में खोजने के लिए बहुत कुछ और भी है.”
पोद्दार ने कहा कि यह प्रदर्शनी हमें यह देखने का मौका देती है कि शेखावटी के लोगों ने बदलते भारत को किस तरह महसूस किया और यह बदलाव उनके घरों, उनकी दीवारों और उनकी जिंदगी में किस तरह दिखाई देने लगा.
पोद्दार ने कहा, “मैं यह देखकर काफी हैरान थी कि शेखावटी जैसी जगह कितनी बड़ी मेल्टिंग पॉट रही है. इसने दुनिया को बहुत कुछ दिया और दुनिया से भी बहुत कुछ सीखा.”
सिर्फ पेंटिंग्स नहीं
प्रदर्शनी में राजा रवि वर्मा कलेक्शन की पुरानी पेंटिंग्स भी रखी गई हैं. इनमें मैसूर के राजा और रानी की पेंटिंग्स, राधा विलास, सीता विलास और महिषासुर मर्दिनी शामिल हैं. पेंटिंग्स के अलावा शेखावटी शैली की पगड़ियां और कपड़े, एक टाइपराइटर, एक वजन करने वाली मशीन और ब्रिटिश दौर के मेडल भी प्रदर्शित किए गए हैं.

क्यूरेटर ने इन चीजों और उनके इतिहास की जानकारी वाला एक विस्तृत पैनल भी लगाया है.
“ट्रेड ने शेखावटी को भारत और पूरी दुनिया के बीच एक गेटवे बना दिया। व्यापारी परिवारों ने एक कमर्शियल नेटवर्क बनाया जो राजस्थान को कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और इंटरनेशनल पोर्ट से जोड़ता था, जिससे सामान, आइडिया और इनोवेशन पूरे महाद्वीपों में पहुंचते थे,” “ट्रेड, ट्रैवल और ग्लोबल कनेक्शन” नाम के एक पैनल में बताया गया.
एक दूसरे पैनल में चूना-पत्थर से रेगिस्तानी किलेनुमा इमारतें बनाने के बारे में बताया गया है.
“स्थानीय चूना-पत्थर और चूने के प्लास्टर से बनाई गई शेखावटी की हवेलियां वास्तुकला की शानदार मिसाल हैं. इनमें परंपरा और दुनिया से आए प्रभावों के बीच एक खास मेल दिखाई देता है,” यह बात “लाइमस्टोन से बने ग्लोबल रेगिस्तानी किले” नाम के पैनल पर लिखी है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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