नई दिल्ली: रेखा भारद्वाज और उनके पति देवेंद्र, दोनों 60 साल से ज्यादा उम्र के हैं. परिवार में अचानक हुई एक मौत के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के महोबा जाने के लिए ट्रेन से यात्रा करने की योजना बनाई थी, लेकिन आखिरी समय में उनके बेटे सर्वोदय ने इससे मना कर दिया क्योंकि ट्रेन में उन्हें सिर्फ जनरल क्लास की सीट मिल रही थी. आराम को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने पैरेंट्स के लिए एसी स्लीपर बस में टिकट बुक कर दिए.
सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा था. बस में अपनी स्लीपर सीट पर बैठने के बाद रेखा और देवेंद्र ने सर्वोदय को वीडियो कॉल किया और उसे बस के अंदर का नज़ारा दिखाया. अपने माता-पिता को सुरक्षित और आराम से सफर करते देखकर सर्वोदय को भरोसा हो गया और वह सोने चले गए.
सुबह तक सब कुछ बदल चुका था. सफर के दौरान बस में आग लग गई, जिसमें सर्वोदय के पिता की मौत हो गई और उनकी मां घायल हो गईं. उन्हें इसकी जानकारी कई घंटे बाद मिली.
BR32 PA 8647 नंबर वाली यह बस रात करीब 9 बजे दिल्ली के कश्मीरी गेट से चली थी और महोबा जा रही थी. दिप्रिंट ने जिस एफआईआर की कॉपी देखी है, उसके मुताबिक बस में करीब 30-35 यात्री सवार थे.
रात करीब 11:30 बजे जब बस यमुना एक्सप्रेसवे के 33वें किलोमीटर के पास पहुंची, तो कुछ यात्रियों ने ड्राइवर के केबिन से तेज़ बदबू आती महसूस की. उन्होंने कंडक्टर और ड्राइवर को इसकी जानकारी दी, लेकिन एफआईआर के मुताबिक दोनों ने इस पर ध्यान नहीं दिया. यात्रियों के बयानों के आधार पर एफआईआर में कहा गया है कि ड्राइवर और कंडक्टर केबिन में धूम्रपान कर रहे थे.
एफआईआर के मुताबिक, कुछ देर बाद ड्राइवर के केबिन में आग की लपटें दिखाई दीं. यात्रियों ने फिर शोर मचाया, लेकिन ड्राइवर और कंडक्टर ने बस नहीं रोकी. एफआईआर में उनमें से एक के हवाले से यात्रियों से कही गई बात दर्ज है: “अगर मरना है तो मर जाओ, हम बस नहीं रोकेंगे.” एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आग की चेतावनी मिलने के बावजूद बस के स्टाफ ने जरूरी सावधानियां नहीं बरतीं और आखिरकार इस वजह से 9 यात्रियों की मौत हो गई.

ग्रेटर नोएडा के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) रवि शंकर निम ने कहा कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस के एयर-कंडीशनिंग सिस्टम में हुई चिंगारी से आग लग सकती है. इसके बाद आग बस के दूसरे हिस्सों में फैल गई.
लेकिन सर्वोदय के लिए यह वजह किसी तरह की राहत नहीं है.
नोएडा के सेक्टर 94 में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर टिन की छत के नीचे बैठे सर्वोदय ने दिप्रिंट को बताया कि उनकी मां रेखा का जेवर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है.
आंसू रोकने की कोशिश करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने पिता के शव की पहचान कर ली है, लेकिन अपनी मां को अभी तक पिता की मौत के बारे में नहीं बताया है.
सर्वोदय के लिए यह हादसा उस फैसले से जुड़ा है जो उन्होंने अपने माता-पिता को बस से जाने की सलाह देते हुए लिया था. उन्होंने बताया कि उनके पिता की हाल ही में एक मेडिकल सर्जरी हुई थी, जिसमें उनके बाएं पैर में लोहे की रॉड डाली गई थी. इसी वजह से उन्होंने उनके आराम को प्राथमिकता दी थी.

सर्वोदय ने सुरक्षा का ध्यान भी रखा था. उन्होंने खास तौर पर अपने माता-पिता के लिए नीचे वाली स्लीपर सीटें बुक की थीं. उन्होंने कहा, “अगर कुछ गलत होता है, तो मैं चाहता था कि वे आसानी से बाहर निकल सकें.”
पैर में लगी लोहे की रॉड ने उसे बुरी तरह जले अपने पिता के शव की पहचान करने में मदद की. उन्होंने बताया कि कश्मीरी गेट से माता-पिता के निकलने के बाद वह फोन पर उनकी लोकेशन देख रहे थे और रात के खाने के बाद उन्होंने उनसे बात भी की थी. सुबह करीब 6 बजे सर्वोदय ने अपनी मां को फोन किया, लेकिन उनका फोन बंद था. इसके बाद पिता को फोन किया, लेकिन उनका नंबर भी नहीं मिल रहा था.
कई बार फोन करने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो सर्वोदय को चिंता होने लगी. कई घंटे बाद पुलिस स्टेशन से फोन आया, तब उनकी सबसे बड़ी आशंका सच हो गई. उन्होंने अपना सिर हाथों में रखते हुए और आंखों में आंसू लिए खुद से पूछा, “मैंने बस की टिकट क्यों बुक की?”
‘हर तरफ धुआं था’
सर्वोदय को बस ऑपरेटर राज कल्पना ट्रैवल्स की ओर से रात 1:15 बजे WhatsApp पर मैसेज मिला. इसमें बताया गया था कि उन्होंने अपने माता-पिता के लिए जो बस टिकट बुक किए थे, वे रद्द कर दिए गए हैं. इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं दी गई थी. जबकि तब तक बस में आग लग चुकी थी.
सर्वोदय की मां रेखा का जेवर के आरोग्य अस्पताल में इलाज चल रहा है. उन्होंने बताया कि उनकी नींद अफरा-तफरी के बीच खुली. यात्री बस से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और तब तक बस धुएं से भर चुकी थी. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं बस से कैसे बाहर आई. जब मुझे होश आया तो मैं बाहर पड़ी थी.” अपने पति के बारे में उन्होंने कहा, “वह अभी तक नहीं मिले हैं. शायद उनकी मौत हो गई है.”
बस में अकेले सफर कर रहे एक अन्य यात्री वीरेंद्र कुमार सिंह ने दिप्रिंट को बताया कि कंडक्टर ने अचानक यात्रियों से बस से उतरने को कहा. उन्हें यह बात अजीब लगी क्योंकि बस किसी रेस्टोरेंट या तय किए गए रुकने की जगह पर नहीं रुकी थी. वीरेंद्र ने बताया कि बस के अंदर भी बदबू आ रही थी. कंडक्टर की बात सुनकर उन्होंने अपनी स्लीपर सीट से बाहर देखा तो बस में आग लगी हुई थी. सिंह ने बताया कि वह तुरंत बस से बाहर भाग गए.

सिंह ने बताया कि उन्होंने और कुछ अन्य यात्रियों ने आखिरी समय तक इमरजेंसी गेट खोलने की कोशिश की, लेकिन वे उस दरवाजे को हिला तक नहीं सके. उन्होंने कहा, “हम हल्की आवाज़ें सुन सकते थे, लेकिन बस धुएं और आग से भरी थी, इसलिए हम उनकी मदद नहीं कर सके.”
उन्होंने यह भी बताया कि पास के एक गांव के तीन लड़कों ने बस में आग लगी देखी और ड्राइवर और कंडक्टर को बताने के लिए करीब 2 किलोमीटर तक बस के पीछे-पीछे गए.
पुलिस की जांच
एक आधिकारिक बयान में डीसीपी निम ने बताया कि आग की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची और 20 से 25 यात्रियों को बचाया. उन्होंने बताया कि बस के अंदर नौ लोग गंभीर हालत में मिले. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, बस के एयर कंडीशनिंग सिस्टम में चिंगारी या विस्फोट से आग लग सकती है. इसके बाद आग पूरी बस में फैल गई. ड्राइवर और कंडक्टर दोनों को हिरासत में लिया गया है और आगे की जांच जारी है.
एफआईआर में कहा गया है कि यात्रियों ने बस में जलने की गंध के बारे में ड्राइवर और कंडक्टर को बताने की कोशिश की थी. इसके बावजूद दोनों ने सावधानी नहीं बरती. एफआईआर के मुताबिक, इसी वजह से नौ यात्रियों की मौत हुई.
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 281, 125(b), 105 और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया है. उत्तर प्रदेश सरकार ने हादसे में मारे गए नौ लोगों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी ऐलान किया है.
सर्वोदय के लिए सवाल और भी निजी हैं. उन्होंने बताया कि जब वह छोटे थे तो अपने पिता से कहते थे कि जब वे पर्याप्त पैसे कमा लेंगे तो देश छोड़ देंगे. उनके पिता बस मुस्कुरा देते थे.
उन्होंने कहा, “हर दिन लोगों की मौत होती है और अगर उनकी मौत उनकी अपनी गलती से हो तो बात समझ में आती है, लेकिन यहां? उन्होंने कोई गलती नहीं की थी. यह लापरवाही थी.”
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