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Monday, 22 June, 2026
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बदायूं में हिंदू लड़के और मुस्लिम लड़की ने की शादी, एक इलाके में जश्न तो दूसरे में पसरा है मातम

कोई टकराव, कोई राजनीतिक दखलंदाज़ी और कोई सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई. बदायूं की पुलिस, जिसकी दखलंदाज़ी से यह सब मुमकिन हो पाया, खुलकर बताती है कि मामला इतनी आसानी से कैसे सुलझ गया.

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बदायूं: लाल साड़ी, मांग में सिंदूर, हाथों में लाल चूड़ियां और सिर पर पल्लू ओढ़े 19 वर्षीय हिमांशी कुमारी बिल्कुल एक नई नवेली हिन्दू दुल्हन की तरह दिखती हैं. कुछ दिन पहले तक वह हीरा नाज़ बी के नाम से जानी जाती थीं और उत्तर प्रदेश के बदायूं में अपने मुस्लिम परिवार के साथ रहती थीं.

21 वर्षीय अतुल से शादी ने सिर्फ उनकी वैवाहिक स्थिति नहीं बदली, बल्कि उनका नाम, धर्म और पहचान भी बदल दी. इस शादी को लेकर हिन्दुत्व संगठनों ने उत्साह दिखाया और इसे समर्थन दिया. पुलिस की अहम भूमिका के बाद यह मामला बदायूं के उस छोटे से कस्बे में चर्चा का विषय बन गया, जो आमतौर पर अपनी जरी-जरदोजी कारीगरी के लिए जाना जाता है. हिन्दू संगठनों ने इसे ‘घर वापसी’ बताया, जबकि तीन किलोमीटर दूर जसमां गांव के मुस्लिम समुदाय में खामोशी पसरी हुई है. गांव के लोग मानते हैं कि अगर उन्होंने नाराजगी जताई तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

हिमांशी के लिए भी यह रास्ता आसान नहीं था. जब उनके मुस्लिम माता-पिता को उनके एक हिन्दू युवक से प्रेम संबंध के बारे में पता चला तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया.

हिमांशी ने कहा, “हम करीब तीन साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे. जनवरी में हमने गुपचुप शादी कर ली थी. आर्य समाज मंदिर में शादी करने के बाद हमने लिव-इन सर्टिफिकेट बनवाया और मैं वापस अपने माता-पिता के घर रहने चली गई. जब मेरे परिवार को हमारे रिश्ते के बारे में पता चला तो उन्होंने मुझे पीटा और एक कमरे में बंद कर दिया.”

इसके बाद बदायूं पुलिस इस मामले में शामिल हुई.

हिमांशी ने 100 नंबर पर कॉल कर पुलिस को बताया कि उनका परिवार उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है.

हिमांशी के मुताबिक, जब पुलिस उनके घर पहुंची तो परिवार वालों ने यह कहकर उन्हें वापस भेज दिया कि किसी बच्चे ने गलती से फोन कर दिया होगा. बाद में हिमांशी किसी तरह अतुल से संपर्क करने में सफल रहीं. इसके बाद उनके माता-पिता ने अतुल के खिलाफ शिकायत दी और आरोप लगाया कि उसने उनकी नाबालिग बेटी को बहलाया-फुसलाया है.

Hira Naz Bi aka Himanshi Kumari at her in-laws' | Photo: Nootan Sharma | ThePrint
हीरा नाज़ बी उर्फ ​​हिमांशी कुमारी अपने ससुराल में | फोटो: नूतन शर्मा | दिप्रिंट

हिमांशी ने कहा, “पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मैं अपने प्यार से फिर मिल पाई. ऐसा लगता है जैसे मैं अपना सपना जी रही हूं.”

बदायूं के उसावां कस्बे में अपने घर के बिस्तर पर बैठी नवविवाहिता हिमांशी यह बात कहती हैं.

इस शादी को स्थानीय लोगों, बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और कुछ हद तक पुलिस का भी समर्थन मिला. मामले में न कोई झड़प हुई, न राजनीतिक हस्तक्षेप और न ही कोई सांप्रदायिक हिंसा. मंदिर में बजरंग दल के सदस्यों, अतुल के परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में विवाह संपन्न कराया गया.

शादी के बाद मंदिर में “जय श्री राम” के नारे लगे. दुल्हन का स्वागत मिठाइयां बांटकर और नाच-गाकर किया गया. पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल था. करीब 300 लोग नई दुल्हन को देखने पहुंचे.

पुलिस के लिए यह संवेदनशील मामला था क्योंकि इसमें दो अलग-अलग धर्मों के लोग शामिल थे. हालांकि लड़की मुस्लिम और लड़का हिन्दू होने के कारण मामला ज्यादा नहीं बढ़ा.

उसावां थाने के SHO राजेंद्र सिंह ने कहा, “हमें दोनों पक्षों से शिकायत मिली थी. हमने दोनों को थाने बुलाया और लड़की से पूछा कि वह किसके साथ जाना चाहती है. उसने कहा कि वह लड़के के साथ रहना चाहती है. हमने उसके परिवार को बताया कि वह बालिग है और अगर वह अपनी इच्छा से लड़के के साथ जाना चाहती है तो कोई उसे रोक नहीं सकता. इसके बाद हमने दोनों को साथ जाने की अनुमति दे दी.”

At the Khatu Shyam temple where the couple got married again, this time with the blessings if the boy's family, in Badaun on Tuesday | Photo: Nootan Sharma | ThePrint
खाटू श्याम मंदिर में जहां इस जोड़े ने फिर से शादी की, इस बार लड़के के परिवार के आशीर्वाद से, मंगलवार को बदायूं | फोटो: नूतन शर्मा | दिप्रिंट

हालांकि कुछ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर लड़की हिन्दू और लड़का मुस्लिम होता तो मामला इतनी आसानी से नहीं सुलझता.

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि मुस्लिम युवक और हिन्दू युवती से जुड़े मामलों में स्थिति अक्सर कानून-व्यवस्था का मुद्दा बन जाती है. हालांकि ऐसे मामलों में भी युवती का बयान सबसे जरूरी माना जाता है.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “एक बार बीएनएस की धारा 69 के तहत एफआईआर दर्ज हो जाए तो लड़की को मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने के लिए पेश करना पड़ता है. पुलिस के सामने दिया गया बयान कानूनी रूप से ज्यादा महत्व नहीं रखता. ज्यादातर मामलों में अगर लड़की कहे कि वह अपनी मर्जी से गई थी और दोनों पक्ष सहमत हों तो मामला सुलझ जाता है.”

उन्होंने कहा, “इस मामले में कई लोगों ने इसे ‘घर वापसी’ के रूप में देखा. मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई शिकायत भी नहीं दी गई, इसलिए मामला आसानी से निपट गया. अगर स्थिति उलटी होती तो इतना आसान नहीं होता. हिन्दू संगठन आक्रामक हो सकते थे और मामले को ‘लव जिहाद’ के रूप में पेश किया जा सकता था, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती थी.”

अतुल और हीरा नाज़ के मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई. परिवार के दबाव के बावजूद युवती ने अपना बयान नहीं बदला.

Hira Naz Bi aka Himanshi Kumari with her sister-in-law Neha | Photo: Nootan Sharma | ThePrint
हीरा नाज़ बी उर्फ़ हिमांशी कुमारी अपनी भाभी नेहा के साथ | फोटो: नूतन शर्मा | दिप्रिंट

स्कूल के प्यार से कोर्ट मैरिज तक का सफर

हीरा नाज़ की मुलाकात अतुल से 2023 में हुई थी, जब वह कक्षा 10 में पढ़ती थीं. दोनों की बातचीत मोहल्ले और गांव के आसपास अचानक हुई मुलाकातों के दौरान शुरू हुई. धीरे-धीरे यह रिश्ता गहरा होता गया. दोनों हीरा के पिता के फोन पर चोरी-छिपे बात करते थे. करीब एक साल पहले अतुल ने हीरा को एक मोबाइल फोन भी उपहार में दिया था.

धर्म दोनों के रिश्ते में हमेशा एक डर की वजह रहा, लेकिन इसने उन्हें कभी अलग नहीं किया.

अतुल ने हिमांशी की ओर देखते हुए कहा, “हमें शुरू से पता था कि हम अलग-अलग धर्मों से हैं, लेकिन हम एक-दूसरे से प्यार करते थे. हमारे लिए प्यार धर्म से बड़ा हो गया था.”

जनवरी में दोनों ने शादी करने का फैसला किया. उन्हें डर था कि हीरा के परिवार वाले उसकी शादी किसी और से कर देंगे. इसलिए उन्होंने उसके बालिग होने का इंतजार किया और फिर अपने रिश्ते को कानूनी रूप देने का फैसला किया. सबसे पहले दोनों एक वकील के पास गए और जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की.

अतुल ने कहा, “हमने आर्य समाज की विवाह प्रक्रिया अपनाई और हिन्दू रीति-रिवाजों से शादी की. उसी आधार पर हमने अपनी शादी का पंजीकरण कराया.”

Hira Naz Bi aka Himanshi Kumari with her mother-in-law and sisters-in-law | Photo: Nootan Sharma | ThePrint
हीरा नाज़ बी उर्फ ​​हिमांशी कुमारी अपनी सास और ननद के साथ | फोटो: नूतन शर्मा | दिप्रिंट

शादी की जानकारी दोनों परिवारों को नहीं थी. मामला तब सामने आया जब हीरा के भाई को उसका मोबाइल फोन मिल गया. फोन में अतुल के साथ हुई बातचीत देखने के बाद घटनाओं की एक नई कड़ी शुरू हो गई.

सबसे पहले हीरा के पिता मुजाहिद अतुल के घर पहुंचे.

अतुल के पिता धर्मेंद्र कुमार ने कहा, “वह हमारे घर आए और अतुल की फोटो तथा कुछ दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर मांगे. जब उन्हें शादी के बारे में पता चला तो उन्होंने दोनों से तलाक लेने को कहा. लेकिन मैंने उनसे कहा कि जो लड़की चाहेगी, वही होगा. इसके बाद वह वहां से चले गए और पुलिस में शिकायत कर दी.”

हीरा के परिवार ने आरोप लगाया कि अतुल ने उसे बहला-फुसलाकर अपने प्रेम जाल में फंसाया, नशीला पदार्थ दिया और जबरन शादी की. इसके बाद पुलिस ने अतुल को हिरासत में ले लिया.

इसके जवाब में अतुल ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी पत्नी को उसके माता-पिता उसकी इच्छा के खिलाफ अपने पास रखे हुए हैं. इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया.

उसावां थाने के SHO राजेंद्र सिंह ने कहा, “लड़की के परिवार का दावा था कि वह नाबालिग है, लेकिन लड़के ने ऐसे दस्तावेज पेश किए जिनसे उसकी उम्र साबित हो गई.”

हालांकि लिव-इन सर्टिफिकेट में हीरा के धर्म परिवर्तन का उल्लेख है, लेकिन हिमांशी का कहना है कि अभी तक औपचारिक रूप से धर्म परिवर्तन नहीं हुआ है और न ही स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी का पंजीकरण कराया गया है. धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के तीन चरणों में से नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र पहला चरण होता है.

वकील सतेंद्र पाल ने कहा, “मैंने उनकी शादी नहीं कराई थी. मैंने केवल उनके लिव-इन रिलेशनशिप सर्टिफिकेट की प्रक्रिया पूरी कराने में मदद की थी.”

हिन्दू परिवार, बजरंग दल और ‘घर वापसी’

45 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार शुरुआत में अपने बेटे के फैसले से खुश नहीं थे. लेकिन जब पुलिस और हिन्दू संगठनों की दखल बढ़ी, तो उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि अब एक मुस्लिम लड़की उनके परिवार का हिस्सा बनेगी. परिवार में इस शादी का जश्न मनाया जा रहा है. घर के आंगन में नई बहू, हिन्दू रीति-रिवाजों और परिवार में उसके सामंजस्य को लेकर चर्चाएं हो रही थीं.

अतुल के एक दोस्त ने मजाकिया अंदाज में कहा, “अम्मा, नई बहू को कुछ हिन्दू शादी के गीत सिखा दीजिए. हो सकता है उसे हमारे रीति-रिवाजों की जानकारी न हो.”

इस पर अतुल की दादी हंस पड़ीं.

Dharmendra Kumar (centre) was initially unhappy about his son’s decision, but eventually came around when Bajrang Dal got involved | Photo: Nootan Sharma | ThePrint
धर्मेंद्र कुमार (बीच में) शुरू में अपने बेटे के फ़ैसले से खुश नहीं थे, लेकिन जब बजरंग दल इसमें शामिल हुआ तो वे मान गए | फ़ोटो: नूतन शर्मा | दिप्रिंट

उन्होंने कहा, “अतुल ने उसे हमारे रीति-रिवाजों के बारे में अच्छी तरह समझा दिया होगा.”

अतुल का परिवार और पड़ोसी इस शादी का जश्न मना रहे हैं. हालांकि हर मामला ऐसा नहीं होता. करीब 40 दिन पहले अनीशा ने अपना नाम बदलकर नेहा शर्मा रखा था और बजरंग दल की मदद से अपने हिन्दू प्रेमी से शादी की थी. फिलहाल यह कपल छिपकर रह रहा है क्योंकि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रांत मंत्री अर्पित भामाशाह ने कहा, “दोनों शादी करना चाहते थे. हमने उनकी मदद की. अभी तक दोनों परिवारों ने इस विवाह को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन हमें भरोसा है कि लड़के का हिन्दू परिवार जल्द ही इसे स्वीकार कर लेगा. आखिर लड़की हिन्दू धर्म अपना रही है और यह अच्छी बात है.”

पुलिस थाने में मामले को सुलझाने में बजरंग दल की अहम भूमिका रही. पुलिस में शिकायत दर्ज होने से कुछ दिन पहले अतुल ने राष्ट्रीय बजरंग दल के बदायूं-बरेली विभाग महामंत्री अतुल बजरंगी से संपर्क किया था. उसने उन्हें बताया कि उसने एक मुस्लिम लड़की से शादी की है और पुलिस उसे परेशान कर रही है. इसके बाद बजरंग दल ने इस कपल की मदद शुरू की.

राष्ट्रीय बजरंग दल के विभाग महामंत्री अतुल बजरंगी ने कहा, “शुरुआत में पुलिस लड़की के परिवार के दबाव में काम कर रही थी. लेकिन जब बजरंग दल के कार्यकर्ता थाने पहुंचे और लड़की का बयान आने के बाद फैसला लेने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया, तब हम दोनों को खाटू श्याम मंदिर ले गए और अपनी सुरक्षा में उनकी शादी करवाई.”

बजरंग दल ऐसे मामलों में लगातार मदद करता है. संगठन इसे ‘घर वापसी’ के रूप में देखता है.

अतुल बजरंगी ने कहा, “सनातन धर्म सभी धर्मों में श्रेष्ठ है. जो भी सनातन धर्म को अपनाएगा, वह जीवन में आगे बढ़ेगा. ऐसे लोगों की मदद के लिए हम हमेशा तैयार रहते हैं.”

हिमांशी के लिए धर्म से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका प्यार और नई जिंदगी की शुरुआत है. अपने नए परिवार में उसे स्वीकार्यता, आजादी और अपनापन मिला है. वह अपने माता-पिता के घर वापस नहीं जाना चाहती. उसे पूरा विश्वास है कि उसका परिवार कभी भी अतुल के साथ उसकी शादी को स्वीकार नहीं करेगा.

हिमांशी ने कहा, “वे बार-बार कहते थे कि अगर लड़का हमारे ही धर्म का होता तो उन्हें शादी से कोई दिक्कत नहीं होती. किसी ने मेरी बात नहीं समझी. न मेरे भाई ने और न ही मेरी बहन ने.”

मुस्लिम मोहल्ले में डर और खामोशी

बदायूं के जसमां गांव में पिछले चार दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है. मुस्लिम समुदाय के कई लोग इस घटना को लेकर खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं. डर के साथ-साथ लोगों में निराशा और दुख भी है. मुस्लिम बहुल मोहल्लों में कई लोगों का मानना है कि हिन्दू युवक आखिरकार लड़की को छोड़ देगा.

गांव के 30 वर्षीय एक निवासी ने कहा, “समुदाय के लिए यह बहुत शर्म की बात है कि लड़की अपने परिवार के खिलाफ चली गई और उस हिन्दू लड़के को चुन लिया. कुछ समय बाद वही लड़की गोद में बच्चा लिए और शिकायत लेकर थाने के चक्कर लगाती नजर आएगी, जब वह लड़का उसे छोड़ देगा.”

गांव के परिवार और स्थानीय लोग इस मामले पर खुलकर बात करने से बच रहे हैं. उनका कहना है कि वे डर के कारण कुछ नहीं बोलना चाहते. इस मामले में किसी धार्मिक संगठन ने भी उनका साथ नहीं दिया.

एक अन्य निवासी ने कहा, “कोई कुछ नहीं बोलेगा क्योंकि सभी डरे हुए हैं. लोगों को डर है कि कहीं बुलडोजर न चल जाए या किसी तरह की कार्रवाई का सामना न करना पड़े. इस सरकार में मुसलमान अपनी इज्जत और सम्मान के लिए भी खुलकर आवाज नहीं उठा सकते.”

दोनों परिवार पहले बकरी खरीदने और बेचने का कारोबार करते थे और व्यापारिक संबंध भी थे. इस विवाह का असर दोनों परिवारों के कारोबार पर पड़ने की आशंका है. हालांकि अतुल की मां और बहन परिवार में नए सदस्य के आने से खुश हैं.

अतुल की 22 वर्षीय बहन नेहा ने कहा, “अतुल ने मुझे बहुत पहले ही हिमांशी के बारे में बता दिया था. मुझे पता था कि धर्म एक बड़ी समस्या बनेगा, लेकिन हम उसे बहुत प्यार करते हैं. उसने हमारा धर्म स्वीकार किया है. अब वह हमारे परिवार का हिस्सा है.”

एक पक्ष के लिए यह धर्म पर प्रेम की जीत की कहानी है, जबकि दूसरे पक्ष के लिए यह नुकसान, शर्म और विश्वासघात की कहानी है. इन दोनों भावनाओं के बीच एक युवा जोड़ा खड़ा है, जिसके फैसले ने परिवार, आस्था और अपनत्व की पारंपरिक सीमाओं को बदल दिया है.

हिमांशी ने अतुल की ओर देखते हुए कहा, “कुछ लोगों के लिए यह शादी धर्म का मुद्दा है. कुछ लोगों के लिए यह सम्मान का सवाल है. लेकिन मेरे लिए यह हमेशा सिर्फ अतुल के बारे में था. मुझे पता है कि मेरे परिवार को दुख पहुंचा है, लेकिन मैंने अपने प्यार को चुना. मैं खुश हूं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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