नई दिल्ली: कीलाड़ी खुदाई रिपोर्ट के छपने को लेकर जारी विवाद के बीच, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) अब अपनी आंतरिक समिति को पहले की रिपोर्ट की मौके पर जाकर दोबारा जांच करने के लिए भेजेगा.
एएसआई के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत ने 24 जून को लिखे एक पत्र में लोकसभा सांसद डी. रविकुमार को इस बारे में जानकारी दी. रविकुमार ने मई 2025 में रिपोर्ट के प्रकाशन को लेकर महानिदेशक को पत्र लिखा था.
रावत के पत्र में कहा गया, “अब यह तय किया गया है कि आंतरिक समिति मौके पर जाकर उक्त रिपोर्ट की दोबारा जांच करेगी.”
पुरातत्वविद् के. अमरनाथ रामकृष्ण द्वारा प्रस्तुत कीलाड़ी खुदाई रिपोर्ट (2014-15 और 2015-16) विवाद का कारण बन गई थी, क्योंकि तमिलनाडु के नेताओं ने एएसआई पर तमिल विरासत को दबाने का आरोप लगाया था.
पिछले साल एएसआई ने रामकृष्ण से उनकी 982 पन्नों की रिपोर्ट में संशोधन करने को कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया.
संसद में भी यह मुद्दा कई बार उठ चुका है. पिछले साल संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में कहा था कि रिपोर्ट को खारिज करने का कोई सवाल ही नहीं है.
शेखावत ने कहा था, “एएसआई कीलाड़ी में हुई खुदाई के आधार पर सही निष्कर्ष जारी करने के लिए कानून और वैज्ञानिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है.”
मदुरै के पास स्थित कीलाड़ी से कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक खोजें मिली हैं. इनमें ईसा पूर्व 8वीं सदी की एक सुनियोजित शहरी बस्ती के प्रमाण शामिल हैं, जो पहले के अनुमान से भी अधिक प्राचीन हो सकती है.
रामकृष्ण ने अपनी रिपोर्ट में कीलाड़ी को तीन कालखंडों में बांटा है: प्री-अर्ली हिस्टोरिक (ईसा पूर्व 8वीं सदी से ईसा पूर्व 5वीं सदी), मेच्योर अर्ली हिस्टोरिक (ईसा पूर्व 5वीं सदी से ईसा पूर्व 1वीं सदी) और पोस्ट-अर्ली हिस्टोरिक (ईसा पूर्व 1वीं सदी से ईस्वी 3वीं सदी).
हालांकि, एएसआई का मानना है कि इन तीनों कालखंडों के नाम बदले जाने चाहिए और ईसा पूर्व 8वीं सदी से ईसा पूर्व 5वीं सदी तक की समय-सीमा बिल्कुल भी उचित नहीं है.
एएसआई की आंतरिक समिति
एएसआई ने रामकृष्ण की खुदाई रिपोर्ट का मूल्यांकन करने के लिए पांच सदस्यीय आंतरिक समिति बनाई थी. इस समिति की अध्यक्षता एएसआई की संयुक्त महानिदेशक और प्रवक्ता नंदिनी भट्टाचार्य साहू कर रही हैं.
साहू समिति अब कीलाड़ी जाकर रामकृष्ण की रिपोर्ट की दोबारा जांच करेगी.
एएसआई के इतिहास में यह एक दुर्लभ मामला है, जब कोई समिति जमा की गई रिपोर्ट की दोबारा जांच के लिए खुदाई स्थल पर जा रही है.
तमिलनाडु के सांसद को लिखे पत्र में रावत ने रिपोर्ट में “कुछ कमियों” का उल्लेख किया.
पत्र में कहा गया, “रिपोर्ट में कुछ कमियां और खामियां पाई गई थीं, जिनके बारे में खुदाई करने वाले अधिकारी को आवश्यक सुधार के लिए बताया गया था ताकि रिपोर्ट प्रकाशन योग्य बन सके. हालांकि, खुदाई करने वाले अधिकारी ने इसे स्वीकार नहीं किया.”
रामकृष्ण की रिपोर्ट 2014-15 और 2015-16 में किए गए कार्य पर आधारित थी. उनकी रिपोर्ट की जांच दो विषय विशेषज्ञों ने की थी और विशेषज्ञों की एक आंतरिक समिति ने भी इसका परीक्षण किया था.
पिछले साल तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कीलाड़ी खुदाई रिपोर्ट के प्रकाशन में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे.
स्टालिन ने 2025 में कहा था, “कीलाड़ी सिर्फ मिट्टी और बर्तनों की खोज नहीं है. यह 3,000 साल पुरानी तमिल सभ्यता का दर्पण है, जो शहरी, शिक्षित और समृद्ध थी, और गंगा घाटी की कथाओं से बहुत पहले विकसित हो चुकी थी.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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