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Monday, 29 June, 2026
होमरिपोर्टलोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा, आपातकाल को कभी नहीं भुलाया जा सकता: सीएम साय

लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा, आपातकाल को कभी नहीं भुलाया जा सकता: सीएम साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह बताना है कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता कितने संघर्ष और बलिदान के बाद प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकतांत्रिक मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं की भूमि रही है.

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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष, त्याग और बलिदान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा कालखंड है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता.

मुख्यमंत्री रविवार को रायपुर के डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित आपातकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम और लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए. इस अवसर पर उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका ‘आपातकाल के योद्धा’ का विमोचन किया और आपातकाल विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया.

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि एक जीवन मूल्य है. उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए कठिन परीक्षा का समय था, जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर असर पड़ा था. उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जेल, यातनाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक आदर्शों को जीवित रखा.

इंद्रेश कुमार ने युवाओं से देश की एकता, अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मूल्य समाज को जोड़ने का काम करते हैं और इन्हीं के आधार पर भारत दुनिया में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है. उन्होंने युवाओं से “राष्ट्र प्रथम” की भावना अपनाने की अपील की.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह बताना है कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता कितने संघर्ष और बलिदान के बाद प्राप्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती लोकतांत्रिक मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं की भूमि रही है.

मुख्यमंत्री ने अपने परिवार का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके बड़े पिता स्वर्गीय नरहरि साय आपातकाल के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे थे. उन्होंने कहा कि उस दौर में लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. जब परिवार के मुखिया को जेल में डाल दिया जाता था, तब परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाता था. उन्होंने बताया कि उस समय स्वयंसेवक भेष बदलकर ऐसे परिवारों तक अनाज पहुंचाने का काम करते थे.

विधानसभा अध्यक्ष Raman Singh ने कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती था. उन्होंने प्रेस सेंसरशिप, मौलिक अधिकारों के निलंबन और संविधान संशोधनों का जिक्र करते हुए कहा कि यह दौर लोकतंत्र की मजबूती और जन-जागरूकता का प्रतीक बनकर सामने आया. उन्होंने कहा कि आपातकाल लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति हमेशा सजग रहने की सीख देता है.

कार्यक्रम के दौरान आपातकाल स्मृति दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया. प्रतियोगिता में प्रदेशभर के 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया.

विद्यालय स्तर की प्रतियोगिता ‘आपातकाल कभी विस्मृत न हो’ विषय पर आयोजित की गई थी, जिसमें रायपुर की जागृति जांगड़े प्रथम रहीं. उन्हें 31 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया. कोरबा के सूरज तांडिया दूसरे और दुर्ग के अंश देशमुख तीसरे स्थान पर रहे.

वहीं महाविद्यालय स्तर पर ‘25 जून : संविधान हत्या दिवस’ विषय पर आयोजित प्रतियोगिता में रायपुर की कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय और दुर्ग की खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं. मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह और प्रोत्साहन राशि प्रदान कर लोकतंत्र और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में युवाओं की भूमिका की सराहना की.

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा समेत कई जनप्रतिनिधि, लोकतंत्र सेनानी और उनके परिजन उपस्थित रहे.

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