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Monday, 6 July, 2026
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बिहार में बारिश से प्राचीन मधुबनी टीला ढहा, बिना किसी सुरक्षा शेड के ASI कर रहा था खुदाई

INTACH के बिहार चैप्टर ने ASI के डायरेक्टर जनरल को बलिराजगढ़ में आर्कियोलॉजिकल खुदाई के काम को तुरंत रोकने के बारे में लिखा है.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट को जानकारी मिली है कि बिहार के मधुबनी में मौजूद प्रतिष्ठित बलिराजगढ़ टीले पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई के दौरान बनाई गई एक खाई (ट्रेंच) का एक हिस्सा भारी बारिश की वजह से ढह गया है.

पिछले एक महीने में मधुबनी में भारी बारिश हुई. इसके बावजूद खुदाई बिना किसी सुरक्षा शेड के जारी रही. इससे खुदाई वाली खाई को नुकसान पहुंचा और ASI की लापरवाही के कारण करीब दो हजार साल पुराने पुरावशेष नष्ट हो गए.

पिछले चार महीनों की खुदाई में पुरातत्वविदों को कई मानव आकृतियां, मनके, गोफन की गोलियां, जानवरों की आकृतियां और एक रिंग वेल (कुएं जैसी संरचना) मिली थी. लेकिन बारिश के कारण कुषाण काल का यह रिंग वेल नष्ट हो गया.

INTACH की बिहार शाखा ने मधुबनी जिले के बलिराजगढ़ में चल रही पुरातात्विक खुदाई को तुरंत रोकने की मांग करते हुए ASI के महानिदेशक को पत्र लिखा है ताकि पुरावशेषों की सुरक्षा की जा सके. दिप्रिंट के पास इस पत्र की एक कॉपी है.

INTACH की बिहार शाखा के सह-संयोजक शिव कुमार मिश्रा, जिन्होंने 5 जुलाई को इस स्थल का दौरा भी किया था, ने अपने पत्र में लिखा, “पिछले एक महीने से बीच-बीच में हो रही बारिश के कारण काम बार-बार रुकता रहा. खुदाई निदेशक की लापरवाही के कारण बारिश के दौरान भी बिना किसी सुरक्षा शेड के खुदाई जारी रखी गई. इसके कारण न सिर्फ खुदाई वाली खाइयों को नुकसान पहुंचा, बल्कि कई दुर्लभ पुरावशेष भी नष्ट हो गए.”

बलिराजगढ़ को बिहार का सबसे मजबूत दावा माना जाता है कि प्राचीन मिथिला कभी एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र था. इसी वजह से कई दशकों से पुरातत्वविद, संग्रहालय विशेषज्ञ और इतिहासकार यहां खुदाई की मांग करते रहे हैं. इस मुद्दे पर हाई कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर हुई. ASI के महानिदेशक और संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों को कई पत्र भी लिखे गए. लालित नारायण मिश्रा से लेकर नीतीश कुमार और संजय झा तक कई नेताओं ने भी इस खुदाई की मांग का समर्थन किया. हाल ही में संजय झा ने यह मामला केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के सामने भी रखा.

आमतौर पर ASI मानसून खत्म होने के बाद खुदाई शुरू करता है और गर्मियों के चरम तक इसे जारी रखता है. लेकिन बलिराजगढ़ में ASI मुख्यालय से परियोजना की मंजूरी देर से मिलने के कारण बारिश के मौसम में भी खुदाई जारी है.

ASI की लापरवाही

मिश्रा ने कहा कि पूरे बारिश के मौसम में खुदाई का काम रोक देना चाहिए था और बाद में अनुभवी पुरातत्वविदों की देखरेख में इसे दोबारा शुरू करना चाहिए था.

176 एकड़ में फैले बलिराजगढ़ टीले की पिछले सात दशकों में यह चौथी खुदाई है. इस साल मार्च में फिर से खुदाई शुरू हुई ताकि उस सवाल का जवाब मिल सके जो लंबे समय से प्राचीन मिथिला के इतिहास से जुड़ा है. क्या यह किलेबंद बस्ती लौह युग के विदेह राज्य का प्रशासनिक केंद्र थी, जिसका उल्लेख पौराणिक कथाओं और प्राचीन ग्रंथों में मिलता है?

पत्र में लिखा गया, “लापरवाही के कारण जो पुरावशेष खुदाई से पहले जमीन के नीचे सुरक्षित थे, वे अब नष्ट हो रहे हैं. ऐसी तबाही होने देने से बेहतर है कि बारिश के पूरे मौसम में खुदाई रोक दी जाए और बाद में दोबारा शुरू की जाए.”

मिश्रा ने कहा कि खुदाई निदेशक की लापरवाही साफ दिखाती है कि उन्हें इस पुरातात्विक काम में कोई खास रुचि नहीं है और ऐसा लगता है कि मुख्यालय के दबाव में यह काम सिर्फ औपचारिकता के तौर पर किया जा रहा है.

मिश्रा ने ASI के महानिदेशक से अनुरोध किया कि खुदाई का काम पटना एक्सकेवेशन ब्रांच को सौंप दिया जाए. फिलहाल ASI के पटना सर्किल के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट हरि ओम शरण इस खुदाई के निदेशक हैं.

हालांकि ASI के अधिकारियों का कहना है कि नुकसान होने से पहले खुदाई स्थल का पूरा रिकॉर्ड और फोटो ले लिए गए थे.

एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “लगातार बारिश के कारण खुदाई प्रभावित हुई है. लेकिन हमने ट्रेंच से जुड़ी सभी जानकारी का रिकॉर्ड तैयार कर लिया है.”

यह पहली बार नहीं है जब ऐसी लापरवाही हुई हो. मई में कुछ लोग इस टीले में घुस गए थे. उन्होंने खुदाई वाली खाइयों से छेड़छाड़ की और मिट्टी के बर्तनों वाले यार्ड में रखे कीमती पुरावशेषों के साथ भी छेड़छाड़ की.

10 साल तक खुदाई

4 जुलाई को JDU के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि संस्कृति मंत्रालय बलिराजगढ़ में लगातार 10 साल तक खुदाई कराने की योजना पर विचार कर रहा है.

झा ने लिखा, “आज मेरी केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव से बात हुई. उन्होंने बताया कि मंत्रालय अगले 10 साल तक बलिराजगढ़ में लगातार खुदाई कराने, वहां ASI का एक कार्यालय खोलने और एक संग्रहालय बनाने के लिए आगे की कार्रवाई कर रहा है.”

मई में संजय झा ने इसी मांग को लेकर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की थी.

दिप्रिंट ने पहले मधुबनी से अपनी रिपोर्ट में बताया था कि बलिराजगढ़ की खुदाई हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही है.

INTACH के पत्र में लिखा गया है, “मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि बलिराजगढ़ की खुदाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सिर्फ राजनीतिक दबाव में कर रहा है. पहले भी ऐसा ही हुआ है. ऐसा लगता है कि हमारे सर्वे विभाग के पुरातत्वविदों ने बलिराजगढ़ की खुदाई में कोई रुचि नहीं दिखाई, जो बेहद दुखद है.”

मिश्रा के अनुसार, 1962 से 2013 के बीच बलिराजगढ़ में कई बार खुदाई का काम सिर्फ औपचारिकता के तौर पर किया गया.

मिश्रा ने कहा, “आज तक एक भी खुदाई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई है. इसके अलावा, पहले की खुदाइयों में मिले पुरावशेषों को भी व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित नहीं रखा गया है. इसके लिए वहां एक साइट म्यूजियम बनाने की जरूरत है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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