नई दिल्ली: पाकिस्तान ने सोमवार को अल जज़ीरा की वेबसाइट तक पहुंच रोक दी. इसके एक दिन पहले कतर के इस न्यूज मीडिया ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और चुनाव से जुड़ी अशांति पर कई रिपोर्टें जारी की थीं.
अधिकारियों ने ब्रॉडकास्टर पर किसी औपचारिक प्रतिबंध की घोषणा नहीं की है और पाकिस्तानी सरकार ने भी इन पाबंदियों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है. हालांकि, सूचना एवं प्रसारण (I&B) मंत्रालय ने रविवार देर रात इसे “चुनिंदा रिपोर्टिंग” बताया और उस पर चुनाव और वोटिंग प्रक्रिया को “गलत तरीके से पेश” करने का आरोप लगाया.
मंत्रालय ने कहा, “हमने आज मुजफ्फराबाद के चुनिंदा मतदान केंद्रों से अल जजीरा की चुनिंदा रिपोर्टिंग पर ध्यान दिया है. सोच-समझकर चुने गए समय और चुने गए लोगों के लिखे-पढ़े बयानों के जरिए चैनल ने AJK के चुनाव और वोटिंग प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की है.”
पाकिस्तान इस इलाके को ‘आजाद’ जम्मू-कश्मीर कहता है.
मंत्रालय ने कहा, “इस तरह का येलो जर्नलिज़्म सिर्फ उन बाहरी लोगों के एजेंडे की पुष्टि करती है, जिनके अपने हित हैं और जो इस चुनाव प्रक्रिया को अवैध साबित करने और मुजफ्फराबाद और AJK के लोगों की इच्छा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. लोगों की यह इच्छा आज अराजकता और दबाव को खारिज करने के रूप में साफ दिखाई दी.”
इसके बाद पाकिस्तान के कई लोगों ने कहा कि नेटवर्क द्वारा विवादित इलाके से लगातार रिपोर्टिंग किए जाने के कुछ ही समय बाद वे अल जजीरा की अंग्रेजी भाषा की वेबसाइट नहीं खोल पा रहे थे.
अल जजीरा के संवाददाता कमाल हैदर ने मुजफ्फराबाद से बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों, कम वोटिंग और इन आरोपों पर रिपोर्ट की कि भारी सुरक्षा तैनाती, सड़कें बंद किए जाने और संचार सेवाओं में रुकावट से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई.
एक रिपोर्ट में हैदर ने कहा कि कई स्थानीय लोगों ने कम वोटिंग को प्रदर्शन आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाने के रूप में देखा. एक स्थानीय निवासी ने ब्रॉडकास्टर से कहा, “लोग इस सिस्टम से परेशान हैं. वे इससे पूरी तरह थक चुके हैं.”
अल जजीरा उन कुछ बड़े अंतरराष्ट्रीय न्यूज संगठनों में शामिल था, जिन्होंने इस अशांति पर लगातार रिपोर्टिंग की. उसने इंटरनेट बंद किए जाने, कर्फ्यू, सड़कें बंद किए जाने और प्रदर्शनकारियों के उन आरोपों पर रिपोर्ट की कि चुनाव ऐसे हालात में कराए गए, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठता है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने गलत काम के आरोपों को खारिज किया है और सुरक्षा व्यवस्था को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है.
ब्रॉडकास्टर की वेबसाइट ब्लॉक किए जाने का पहला सार्वजनिक दावा जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के AJK-GB चैप्टर के पूर्व अधिकारी सोहैब खान ने किया. उन्होंने एक्स पर कहा कि इस इलाके से अल जजीरा की रिपोर्टिंग के बाद उसकी अंग्रेजी भाषा की वेबसाइट नहीं खुल रही थी.
Just confirmed from Islamabad: The @AJEnglish website https://t.co/hEKFp7y0jE has been restricted in Pakistan following its coverage of recent events in Pakistan-administered Kashmir.
Silencing independent media will not hide the truth.#RightsMovementAJK #PressFreedom— Sohaib Khan (@iamsardarsohaib) August 2, 2026
लंदन में रहने वाली इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की नेता फैजा मुराद ने भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने विदेशी पत्रकारों के लिए रिपोर्टिंग की शर्तें और कड़ी कर दी हैं. उन्होंने I&B मंत्रालय के कथित निर्देश का हवाला देते हुए दावा किया कि अब विदेशी संवाददाताओं को इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर के इलाकों से रिपोर्टिंग करने के लिए पहले सरकार की मंजूरी लेनी होगी.
मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी निर्देश की पुष्टि नहीं की है. वहीं, इस दावे की स्वतंत्र रूप से तुरंत पुष्टि नहीं हो सकी.
बताई गई ये पाबंदियां ऐसे समय में सामने आई हैं जब पाकिस्तान को PoK में प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. प्रदर्शनकारी राजनीतिक और चुनावी सुधार, ज्यादा स्वायत्तता और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में नागरिकों की मौत के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. सरकार ने प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाले समूह ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है.
JAAC ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “हाल के चुनावों और मानवाधिकार की स्थिति पर रिपोर्टिंग के बाद पाकिस्तान ने अल जजीरा की वेबसाइट तक पहुंच रोक दी है.”
Pakistan has blocked access to Al Jazeera's website following its reporting on the recent elections and the human rights situation in Pakistan-administered Jammu and Kashmir.
Blocking independent journalism is an attack on press freedom and the public's right to information.… pic.twitter.com/PybfN1TD5s— JKJAAC (@JKJAAC_) August 3, 2026
पोस्ट में कहा गया, “स्वतंत्र पत्रकारिता को रोकना प्रेस की आजादी और लोगों के सूचना पाने के अधिकार पर हमला है. सेंसरशिप पारदर्शिता या जवाबदेही की जगह नहीं ले सकती.”
पोस्ट में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, एमनेस्टी इंटरनेशनल समेत अन्य को टैग किया गया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)