नई दिल्ली: बीटेक के सेकंड ईयर के स्टूडेंट साहिल वाकोड़े की आत्महत्या के बाद आईआईटी-बॉम्बे में छात्र प्रदर्शन शुरू होने के तीन दिन बाद, संस्थान ने सोमवार को अपनी पिछली जानकारी में उसकी मौत की परिस्थितियों को लेकर दिए गए बयानों के लिए माफी मांगी.
संस्थान ने एक बयान में कहा, “साहिल की दुर्भाग्यपूर्ण मौत की परिस्थितियों को लेकर हमारी पिछली जानकारी में दिए गए बयानों के लिए हम माफी मांगते हैं.”
इसने कहा कि जांच अभी चल रही है. ऐसे में मौत से पहले हुई घटनाओं की जानकारी सामने आने और उचित जांच प्रक्रिया के जरिए उनकी पुष्टि होने से पहले उनके बारे में कुछ बताना या उन्हें किसी खास रूप में पेश करना “उचित नहीं” था.
संस्थान ने यह भी साफ किया कि उसके निदेशक शीरीष केदारे ने इस्तीफा नहीं दिया है. उसने उनके इस्तीफे की खबरों को “गलत” बताया. यह सफाई तब आई जब केदारे ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कहा था कि वह सोमवार को इस्तीफा दे देंगे.
संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की डीन की जिम्मेदारी भी तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दी. इस मामले में दर्ज एफआईआर में दूल्ला का नाम है.
सोमवार को कैंपस में तनाव बना रहा. छात्र स्वतंत्र जांच, अनुशासन से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव और छात्रों की सुरक्षा के लिए ज्यादा उपायों की मांग कर रहे हैं. संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की एक आपात बैठक भी होने वाली है. इसके बाद केदारे के छात्रों के साथ ओपन हाउस करने की उम्मीद है.
शुक्रवार को सेमेस्टर के बीच की परीक्षा के कुछ घंटे बाद वाकोड़े अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे.
शनिवार को दिए एक बयान में आईआईटी बॉम्बे ने कहा था कि उन्होंने परीक्षा के सवालों की फोटो अपने फोन से चैटजीपीटी पर डालकर जवाब मांगे थे. संस्थान ने कहा था कि इसके बाद शिक्षक और विभाग प्रमुख ने उनसे बात की, उन्हें समझाया और भरोसा दिलाया कि इस घटना का उनके अकादमिक करियर पर कोई असर नहीं पड़ेगा. संस्थान ने कहा था, “छात्र के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी.”
हालांकि, आईआईटी-बॉम्बे के एक्स अकाउंट पर संस्थान का पिछला बयान नई जानकारी जारी होने के बाद भी मौजूद रहा.
छात्रों ने इस बयान की काफी आलोचना की थी. उन्होंने इसे असंवेदनशील बताया और वाकोड़े की मौत से जुड़ी परिस्थितियों को संभालने के संस्थान के तरीके पर सवाल उठाए.
स्वतंत्र जांच, अनुशासन से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव, छात्रों की सुरक्षा के लिए ज्यादा उपायों और अपने इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों के दबाव के बीच केदारे ने रविवार देर रात 18 मांगों वाले एक चार्टर पर हस्ताक्षर किए.
वाकोड़े के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि आईआईटी बॉम्बे में उन्हें जाति के आधार पर भेदभाव और परेशान किए जाने का सामना करना पड़ा. उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दूल्ला और अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून से जुड़ी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है.
आईआईटी बॉम्बे ने जाति के आधार पर भेदभाव के आरोप से इनकार किया है. संस्थान ने कहा कि वाकोड़े ने अपने एससी/एसटी छात्र और कर्मचारी सेल में ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी.
ये आरोप पुलिस की चल रही जांच का हिस्सा हैं और अभी साबित नहीं हुए हैं. एफआईआर में नाम आने के बाद दूल्ला ने भी आईआईटी बॉम्बे में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
राजनीतिक लोगों ने प्रोफेसर के समर्थन में आवाज उठाई
संस्थान के फैकल्टी फोरम ने दूल्ला का समर्थन किया है. वह परीक्षा में निगरानी कर रहे थे. फोरम ने उनके खिलाफ कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि वाकोड़े को परीक्षा के दौरान “बिना अनुमति स्मार्टफोन रखने और इस्तेमाल करने” की स्थिति में पाए जाने के बाद वह संस्थान के नियमों के मुताबिक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे.
फोरम की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “आईआईटी-बॉम्बे का फैकल्टी फोरम हमारे साथी प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला की छवि खराब किए जाने से बेहद दुखी है. वह सिर्फ अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे थे और संस्थान की मंजूर की गई प्रक्रियाओं का पालन कर रहे थे.”
राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी दूल्ला का समर्थन किया है. उन्होंने उन पर की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि जाति के आधार पर भेदभाव के आरोपों की जांच अभी चल रही है.
बीजेपी के तेनकासी जिला अध्यक्ष अनंतन अय्यासामी ने एक्स पर लिखा, “मैं आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत लगाए गए आरोपों का कड़ा विरोध करता हूं.” उन्होंने मामले को वापस लेने की मांग की.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में कानून का “गलत तरीके से इस्तेमाल” किया जा रहा है.
जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने अय्यासामी के बयान को दोबारा पोस्ट करते हुए लिखा, “मैं इस मामले में अनंतन के सिद्धांतों पर आधारित रुख का बहुत सम्मान करता हूं. प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए.”
शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी. उन्होंने परीक्षा में कथित नकल की जानकारी देने के लिए प्रोफेसरों को जिम्मेदार ठहराए जाने के फैसले पर सवाल उठाया.
उन्होंने लिखा, “आईआईटी बॉम्बे के छात्र की मौत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और एक बार फिर याद दिलाती है कि इन बड़े संस्थानों को कैंपस के माहौल और मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने की ज़रूरत है, लेकिन प्रदर्शन खत्म करने के लिए प्रोफेसरों को हटा देना उस समस्या पर सिर्फ पट्टी लगाने जैसा है, जिसके इलाज के लिए सर्जरी की ज़रूरत है. साथ ही, परीक्षा के दौरान नकल की जानकारी देने का अपना काम कर रहे प्रोफेसरों पर दोष डालना और इसे जातिगत भेदभाव का मामला बना देना एक दुखद नतीजा है.”
कैंपस में इस साल तीसरी ‘असामान्य मौत’
वाकोड़े की मौत सात महीने में आईआईटी बॉम्बे में “असामान्य मौत” की तीसरी घटना थी.
फरवरी में 21 साल के बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के दूसरे साल के छात्र नमन अग्रवाल की हॉस्टल की इमारत की छत से गिरने के बाद मौत हो गई थी. पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की थी और कहा था कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला.
जुलाई में 20 साल के दूसरे साल के मैटेरियल्स साइंस के छात्र सोहिल राजकुमार सांगवान अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे. पुलिस ने कहा था कि शुरुआती जांच में परिवार से जुड़े मुद्दों और निजी रिश्ते में परेशानियों की ओर इशारा मिला था और किसी गलत काम की आशंका नहीं थी.
आईआईटी बॉम्बे में हुई इन मौतों के बीच देश के प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या को लेकर भी बड़ी चिंता सामने आई है.
आईआईटी दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग के पहले साल के बीटेक छात्र हर्षित स्वामी मार्च में कैंपस में मृत पाए गए थे. संस्थान के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था. आईआईटी दिल्ली ने कहा था कि छात्र की मौत से वह बेहद दुखी है और पुलिस मामले की जांच कर रही है. संस्थान ने छात्रों और शिक्षकों को मदद और काउंसलिंग की सुविधाएं देने की बात भी कही थी.
2012 में आईआईटी बॉम्बे के 18 साल के पहले साल के बीटेक छात्र दर्शन सोलंकी ने आत्महत्या कर ली थी. उनके परिवार ने संस्थान में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था. वहीं, पुलिस की चार्जशीट में कहा गया था कि सोलंकी ने परिवार के सदस्यों को बताया था कि छात्रों को उनकी जाति के बारे में पता चलने के बाद उनके साथ व्यवहार बदल गया था.
पढ़ाई के दबाव और छात्रों की भलाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आईआईटी ने हाल के महीनों में कई सहायता उपायों की घोषणा की है या उन्हें और मजबूत किया है.
रविवार को आईआईटी खड़गपुर के निदेशक सुमन चक्रवर्ती ने परीक्षाओं से पहले छात्रों के लिए एक संदेश पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि “एक परीक्षा यह मापती है कि आपने एक दिन क्या लिखा. यह यह नहीं मापती कि आप कौन हैं या भविष्य में क्या बनेंगे.”
उन्होंने छात्रों से अपनी तैयारी पर भरोसा करने को कहा और लिखा, “जब भी दबाव बहुत ज्यादा लगे, तो याद रखें कि आप इसे अकेले नहीं झेल रहे हैं. मेरा हाथ आज और हमेशा आपके कंधे पर है.”
अगर आप सुसाइडल या डिप्रेस्ड महसूस कर रहे हैं, तो कृपया अपने राज्य में हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: तिजारा चेयरपर्सन चुनाव से पहले 18 पार्षदों को हरियाणा में रोका गया, कांग्रेस का आरोप