नई दिल्ली: 20 साल के एक छात्र की मौत को लेकर हो रहे विरोध के बीच आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने कहा है कि वह आगामी सीनेट बैठक में परीक्षा में सज़ा के नियमों की समीक्षा करेगा और छात्रों के लिए शिकायतों को दर्ज करने और उनकी स्थिति जानने की सुविधा वाली ज्यादा छात्र-अनुकूल शिकायत निवारण व्यवस्था बनाएगा.
यह ऐलान संस्थान के निदेशक शिरीष केदारे ने एक ओपन हाउस के दौरान किया. इस दौरान कई छात्रों ने लंबित शिकायतों और छात्र मामलों को संभालने के तरीके को लेकर चिंता जताई.
यह चर्चा दूसरे साल के बी.टेक छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद हो रहे विरोध और संस्थान की छात्र कल्याण व्यवस्था और अकादमिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में बदलाव की मांग के बीच हुई.
केदारे ने यह भी कहा कि संस्थान प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को “हर संभव कानूनी मदद” देगा. उन पर वाकोड़े को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. इस बीच फैकल्टी सदस्यों और कुछ छात्रों ने उनके समर्थन में मौन मार्च निकाला.
उन्होंने आगे कहा कि संस्थान आगामी सीनेट बैठक में परीक्षा में सजा के नियमों की समीक्षा करेगा और एक ज्यादा “छात्र-अनुकूल शिकायत निवारण व्यवस्था” बनाएगा, “जिससे छात्र अपनी शिकायतों की स्थिति जान सकेंगे”. ओपन हाउस के दौरान मार्च का जिक्र करते हुए, जिसका कुछ हिस्सा छात्रों ने लाइव-स्ट्रीम किया था, केदारे ने कहा, “यह सिर्फ एनर्जी सिस्टम्स विभाग नहीं है. यह हर कोई है. यह बात अलग-अलग विभागों से फैकल्टी के शामिल होने से साफ है. स्टाफ सदस्य भी इसका हिस्सा हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “संस्थान ने हर संभव कानूनी मदद भी जुटाई है क्योंकि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. हम आपकी भावनाओं को समझते हैं. हम उन्हें स्वीकार करते हैं और हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं. इसकी जड़ में छात्रों और फैकल्टी के बीच सही बातचीत और छात्रों और फैकल्टी के बीच व्यापक प्रशिक्षण है.”
शुक्रवार से कैंपस में तनाव की स्थिति है. उस दिन वाकोड़े अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे. इससे कुछ घंटे पहले उन्होंने मिड-सेमेस्टर परीक्षा दी थी. शनिवार को जारी एक बयान में आईआईटी बॉम्बे ने कहा था कि वाकोड़े ने जवाब पाने के लिए अपने फोन पर परीक्षा का सवालों वाला पेपर चैटजीपीटी पर अपलोड किया था.
सोमवार को संस्थान ने अपनी पिछली जानकारी में उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर दिए गए बयानों के लिए माफी मांगी. संस्थान ने निदेशक मंडल की एक आपात बैठक भी बुलाई, जिसमें इस मामले पर चर्चा हुई.
रविवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने 18 मांगें रखीं. इनमें वाकोड़े की मौत की स्वतंत्र जांच, प्रोफेसर दूल्ला को निलंबित करना, छात्रों की शिकायतों को सुनने की मजबूत व्यवस्था, छात्रों की ज्यादा भागीदारी और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर मदद शामिल थी. इसमें काउंसलर और 24/7 मनोचिकित्सक की सुविधा की मांग भी शामिल थी.
आईआईटी बॉम्बे ने प्रोफेसर दूल्ला को डीन के पद की जिम्मेदारियों से निलंबित कर दिया, लेकिन संस्थान से निलंबित नहीं किया.
हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इस फैसले पर असंतोष जताया और कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता, वे अपना विरोध जारी रखेंगे.
छात्र प्रतिनिधियों ने सोमवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि यह मामला “छात्रों की अगुवाई में” रहना चाहिए और इसे संस्थान के अंदर ही सुलझाया जाना चाहिए. इसमें बाहरी “राजनीतिक हितों” या संगठनों को आईआईटी बॉम्बे के छात्र समुदाय की चिंताओं को प्रभावित नहीं करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन का मकसद अकादमिक नियमों के उल्लंघन को सही ठहराना नहीं था, बल्कि “व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं” को उठाना और संस्थान में बदलाव की मांग करना था. प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी मांगें औपचारिक रूप से निदेशक को सौंप दी गई हैं. निदेशक ने उन्हें स्वीकार किया और उन पर हस्ताक्षर किए हैं और तय समय सीमा के अंदर उन्हें लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई है.
प्रोफेसर दूल्ला के बारे में प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी स्थिति “कभी भी दोषी मान लेने या चल रही जांच से पहले ही कोई फैसला कर लेने की नहीं रही है”.
उन्होंने कहा कि वे फैकल्टी समुदाय के सदस्य के रूप में उनके साथ खड़े हैं और चाहते हैं कि जांच “निष्पक्ष और बिना किसी पक्षपात के” हो.
उन्होंने साफ किया कि उनकी मांग जांच के दौरान दूल्ला को प्रशासनिक मामलों के डीन के पद की जिम्मेदारियों से हटाने की थी, ताकि सावधानी के तौर पर जांच प्रभावित न हो. उन्होंने कहा कि जांच के नतीजे और उसके बाद कोई भी कार्रवाई तय जांच प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए.
फैकल्टी और छात्र प्रोफेसर दूल्ला के समर्थन में
आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी सदस्यों ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के समर्थन में सामने आते हुए कहा कि वे अपने सहयोगी के साथ “मजबूती से खड़े हैं”. यह बयान आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने जारी किया, जो करीब 750 फैकल्टी सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है.
फैकल्टी फोरम ने कहा कि वह दूल्ला की प्रतिष्ठा को “झूठी और भ्रामक खबरों” के जरिए खराब किए जाने से “परेशान” है. साथ ही, उसने कहा कि छात्र की “दुखद मौत से उसे भी दुख हुआ” और इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
एक अन्य बयान में आईआईटी बॉम्बे के मौजूदा और पूर्व छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स ने भी प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला का समर्थन किया. उन्होंने उन्हें एक “मिलनसार, निष्पक्ष और छात्रों की बहुत मदद करने वाला” मेंटर बताया. उन्होंने माना कि मामले की आधिकारिक जांच चल रही है, लेकिन कहा कि न्याय के लिए “सच्चाई, संदर्भ और तय प्रक्रिया का पालन” जरूरी है.
आईआईटी मद्रास के फैकल्टी सदस्यों ने भी दूल्ला को समर्थन दिया. संस्थान के फैकल्टी एसोसिएशन ने घटना की “निष्पक्ष, पारदर्शी और तय समय में पूरी होने वाली” जांच की मांग की.
एसोसिएशन ने कहा कि परीक्षा की ईमानदारी बनाए रखने की जिम्मेदारी वाले फैकल्टी सदस्यों को अपना काम “ईमानदारी से” और “व्यक्तिगत बदनामी” के डर के बिना करने में सक्षम होना चाहिए. उसने कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. एसोसिएशन ने अकादमिक नियमों के उल्लंघन के मामलों में छात्रों के लिए ज्यादा मदद, काउंसलिंग और सुरक्षा उपायों की भी मांग की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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