नई दिल्ली: दुनिया की बेहतरीन डिजिटल शिक्षा तक लोगों की पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने चार साल पहले नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाने की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया था, लेकिन अब दिप्रिंट को जानकारी मिली है कि शिक्षा मंत्रालय ने इस योजना को चुपचाप बंद कर दिया है. ऐसा उस समय हुआ जब एक दूसरे केंद्रीय मंत्रालय ने अलग उद्देश्य के साथ एक डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म शुरू कर दिया.
कोविड-19 महामारी के बीच केंद्र सरकार की इस योजना का ऐलान करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2022-23 के बजट भाषण में कहा था कि नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी क्षेत्रीय भाषाओं में लोगों की ज़रूरत के हिसाब से पढ़ाई की सुविधा देगी. यह यूनिवर्सिटी बुनियादी ढांचे और ट्रेनिंग को मजबूत करने के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ काम करेगी. इसके तुरंत बाद, शिक्षा मंत्रालय ने 2022 में इस यूनिवर्सिटी की योजना तैयार की थी. इसका मकसद एक ऐसा राष्ट्रीय उच्च शिक्षा प्लेटफॉर्म बनाना था, जहां सरकारी विश्वविद्यालयों के कोर्स और डिग्रियां एक जगह मिल सकें. लेकिन यह योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी.
तीन साल बाद, 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने अपने एक स्वायत्त संस्थान, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (NIELIT) के जरिए एक अलग डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म शुरू किया.
यह डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म उभरती हुई डिजिटल तकनीकों और इंडस्ट्री से जुड़े कौशल में अपने ऑनलाइन और ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन पढ़ाई वाले कार्यक्रमों पर केंद्रित है. NIELIT इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और उभरती हुई तकनीकों में शिक्षा, ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन और स्किल ट्रेनिंग देता है.
जब दिप्रिंट ने पूछा कि क्या नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव को बंद कर दिया गया है, तो एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, “तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें थीं. जब 2025 में NIELIT का डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म शुरू किया गया, तो इस (नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी) प्रोजेक्ट को रोकने का फैसला किया गया. वैसे भी, ज्यादातर उच्च शिक्षा संस्थानों ने पहले ही अपनी ऑनलाइन शिक्षा की सुविधाओं का विस्तार कर लिया है और बड़े स्तर पर ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध करा रहे हैं.”
पिछले अक्टूबर में NIELIT के लॉन्च के समय केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि सरकार ने डिजिटल यूनिवर्सिटी की पहल के लिए कई विकल्पों पर विचार करने के बाद इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. हालांकि, यह सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया कि मूल प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया है या NIELIT के साथ उसकी जगह नया प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है.
राज्यसभा में दिए गए एक जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने अगस्त में कहा था कि उसने “एक डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म बनाने की योजना बनाई थी.” इसमें NIELIT डिजिटल यूनिवर्सिटी को डिजिटल लर्निंग के अवसर देने वाली एक पहल बताया गया था. इस जवाब में यह नहीं कहा गया कि 2022 की मूल योजना को बंद कर दिया गया है या NIELIT प्लेटफॉर्म ने उसकी जगह ले ली है.
एक अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “(नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी का) विचार ग्राउंड पर नहीं उतर पाया और जब एक दूसरा प्लेटफॉर्म शुरू किया गया, तो इसे छोड़ने का फैसला किया गया.”
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि NIELIT का डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म शिक्षा मंत्रालय की मूल योजना में सोची गई डिजिटल यूनिवर्सिटी से काफी अलग है.
जिस डिजिटल यूनिवर्सिटी की योजना बनाई गई थी, उसे धीरे-धीरे बंद किए जाने का असर शिक्षा मंत्रालय के बजट आवंटन में भी दिखता है. वित्त वर्ष 2024-25 में नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन संशोधित अनुमान में इसे घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया. वित्त वर्ष 2025-26 में भी 25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, हालांकि इसका कोई संशोधित अनुमान नहीं दिया गया. वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए कोई राशि आवंटित नहीं की गई.
दिप्रिंट ने टिप्पणी के लिए ईमेल के जरिए शिक्षा मंत्रालय और MeitY से संपर्क किया, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक कोई जवाब नहीं मिला था. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.
शिक्षा मंत्रालय ने क्या योजना बनाई थी
वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में जिस नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी का ऐलान किया गया था, उसे सिर्फ ऑनलाइन कोर्स के प्लेटफॉर्म के तौर पर नहीं सोचा गया था. शिक्षा मंत्रालय ने ऐलान के कुछ ही हफ्तों के अंदर इसकी योजना पर काम शुरू कर दिया था.
21 फरवरी 2022 को मंत्रालय ने “Digital University: Making World Class Higher Education Accessible for All” यानी “डिजिटल यूनिवर्सिटी: दुनिया की बेहतरीन उच्च शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाना” विषय पर एक बैठक की थी. इसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, UGC और AICTE के प्रमुख, शिक्षाविद और इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए थे. बैठक में डिजिटल प्लेटफॉर्म, कंटेंट तैयार करने, डिजिटल तरीके से पढ़ाने, शिक्षकों की ट्रेनिंग, वर्चुअल लैब और परीक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
मंत्रालय ने कहा था कि इसकी विस्तृत योजना में एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और “हब एंड स्पोक” मॉडल वाले उच्च शिक्षा संस्थानों की पहचान शामिल होगी.
अप्रैल 2023 में लोकसभा में दिए गए एक जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने कहा था कि नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी “नेटवर्क वाले हब-स्पोक मॉडल” पर काम करेगी. इसमें एक केंद्रीय हब, आईआईटी मद्रास, दिल्ली यूनिवर्सिटी, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी खड़गपुर जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी करके सूचना और संचार तकनीक (ICT) की विशेषज्ञता तैयार करेगा.
ये संस्थान उस बड़े नेटवर्क का हिस्सा होते, जिसके जरिए नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा तक लोगों की पहुंच बढ़ाती.
NIELIT का डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म क्या है
इस बीच, NIELIT का रास्ता अलग रहा. 1994 में MeitY के तहत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था के रूप में स्थापित NIELIT मुख्य रूप से सूचना, इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा, मान्यता, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण देने वाली संस्था थी.
यह यूनिवर्सिटी के तौर पर काम करने के बजाय देशभर के केंद्रों और इससे जुड़े संस्थानों के नेटवर्क के जरिए काम करता था. जुलाई 2024 में इसमें बदलाव आया, जब शिक्षा मंत्रालय ने NIELIT रोपड़ और इसकी 11 इकाइयों को एक अलग श्रेणी के तहत डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया.
इस विशेष श्रेणी के तहत यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) का एक रास्ता है, जिसके जरिए नई (ग्रीनफील्ड) या विशेष क्षेत्र में काम करने वाली मौजूदा संस्थाएं पारंपरिक कई साल की मान्यता या पुराने संस्थान होने की शर्त पूरी किए बिना डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल कर सकती हैं.
नई यूनिवर्सिटी को डिजिटल तकनीकों में ग्रेजुएशन, पोस्टग्रेजुएशन और डॉक्टरेट प्रोग्राम चलाने की मंजूरी दी गई, जबकि NIELIT ने MeitY के तहत काम करना जारी रखा.
एक साल बाद, अक्टूबर 2025 में NIELIT ने अपना डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म शुरू किया.
2022 की प्रस्तावित योजना के उलट, यह प्लेटफॉर्म NIELIT के पहले से मौजूद संस्थानों के नेटवर्क पर बनाया गया था. इसमें AI, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, इंडस्ट्री 4.0 और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में ऑनलाइन और ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन पढ़ाई वाले, कौशल पर आधारित कार्यक्रमों पर ध्यान दिया गया. इस प्लेटफॉर्म को साफ तौर पर रोजगार और इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़कर तैयार किया गया था.
इस प्लेटफॉर्म ने इस साल अपने मौजूदा कोर्स शुरू किए. इनमें AI, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, IoT और इंडस्ट्री 4.0 जैसी उभरती तकनीकों पर आधारित कोर्स शामिल हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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