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Tuesday, 13 January, 2026
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पंजाब में अपराध का फैलता जाल: गैंग, हथियार और दबाव में कानून व्यवस्था

युवाओं में बेरोज़गारी ज़्यादा है और हथियार आसानी से मिल जाते हैं. ऐसे में राज्य के युवा जल्दी पैसे और ताकत के लिए गैंग में शामिल हो रहे हैं. परिवार जबरन वसूली और हिंसा के डर में जी रहे हैं. वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस बल पर काम का बहुत ज़्यादा बोझ है.

जतिन मेहता केस: 7 साल बाद परिवार को भगोड़ा घोषित करने पर ईडी का मंथन

लंदन में रहने वाला मेहता परिवार कई बैंक घोटालों से जुड़ा है. सीबीआई ने जतिन मेहता के खिलाफ 16 मामले दर्ज किए हैं, जबकि उसकी पत्नी सोनिया और बेटे सूरज व विशाल पर करीब 12 धोखाधड़ी के मामले हैं.

विकास का नया रास्ता: भारत के आर्थिक मॉडल में संस्कृति की एंट्री

भारतीय परंपरा हमारे जीवन में अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारी बनाए रखती है. यह एक ऐसे संतुलित समाज की कल्पना करती है, जहां आध्यात्मिकता और आर्थिक समृद्धि एक साथ मौजूद हों और मानवता को उज्ज्वल व सामंजस्यपूर्ण भविष्य की ओर ले जाएं.

देहरादून, बरेली से तमिलनाडु तक हिंसा—भारतीय गुस्सैल हो रहे हैं, राजनीति को हर बार दोष देना काफी नहीं

हिंसा करने वाले लोग पुलिस से नहीं डरते. उन्हें पता है कि वे दूसरों को परेशान कर सकते हैं, दुकानों पर हमला कर सकते हैं या यहां तक कि हत्या भी कर सकते हैं और पकड़े नहीं जाएंगे.

बुलंदशहर की महिला बनाम DM की पत्नी, IAS विशेषाधिकार के खिलाफ लड़ाई

डीएम की पत्नी का जिला महिला समिति की प्रमुख की कुर्सी पर अपने आप बैठ जाना बुलंदशहर की एक महिला को गलत लगा. सुप्रीम कोर्ट उनकी बात से सहमत है.

2026 में पांच चुनाव—और पांच बातें, जिन पर नतीजे BJP और विपक्ष की राजनीति बदल देंगे

2026 के विधानसभा चुनाव बीजेपी के हिंदुत्व एजेंडे की पहुंच और उसकी सीमाओं की परीक्षा होंगे.

सेक्टर से सिस्टम तक: नोएडा में क्यों अटके हैं RWA चुनाव?

दिल्ली-एनसीआर की हाउसिंग सोसाइटियों में सालों तक चुनाव नहीं होते, या फिर वही चेहरे बार-बार लौट आते हैं. ‘खुद को चुना हुआ मानने वाले लोग हमारी सेवा करना छोड़ देते हैं और अपनी सेवा करने लगते हैं.’

‘जंकी’ म्यूज़िक से लेकर मंदिरों में बजने तक—मलयालम रैप की बदलती पहचान

एमसी कूपर मलयालम रैप की तुलना लेखक वैकोम बशीर की लिखाई से करते हैं. ‘राज्य को रैप जैसे और सांस्कृतिक सहारे चाहिए, जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखें.’

1917 से 2025 तक: भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन क्यों गिन रहा है अंतिम सांसें

रूस की क्रांति से भारत की राजनीति तक, कम्युनिज्म ने शोषण-मुक्त समाज का सपना दिखाया. सौ साल बाद वही विचारधारा क्यों बौद्धिक म्यूजियम की वस्तु बन चुकी है.

हस्तशिल्प को लग्ज़री बना रहा मोदी सरकार का ‘द कुंज’, यह पुराना कॉटेज एम्पोरियम नहीं

भारत का पहला ऐसा मॉल जो पूरी तरह हस्तशिल्प को समर्पित है—‘द कुंज’—अपने नेहरू युग के समकक्ष जनपथ स्थित कॉटेज एम्पोरियम से ज़्यादा पास के भव्य DLF एम्पोरियो जैसा है.

मत-विमत

जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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उत्तर भारत में भीषण ठंड: दिल्ली में पिछले तीन वर्षों में जनवरी की सबसे ठंडी सुबह

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) दिल्ली में मंगलवार को पिछले तीन वर्षों में जनवरी की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। इसके साथ ही...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.