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Sunday, 1 March, 2026
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वर्ल्ड बनिया फोरम का मकसद—अगला अडाणी और अंबानी तैयार करना, 1991 के बाद का भारत अब हसल पर चलता है

अब सिर्फ अंबानी-अडाणी जैसे बड़े बिज़नेस हाउस काफी नहीं. कम्युनिटी के MSME भी दुनिया चलाना चाहते हैं और नॉन-बनिया बिज़नेस प्लेयर्स को पीछे छोड़ना चाहते हैं.

बालाकोट से पहले था बुरकी, 1965 में भारत की कम-चर्चित जीत से सबक

1965 का युद्ध जितना माना जाता है, उससे अधिक महत्वपूर्ण था. खासकर पाकिस्तान की गलतियों के कारण.

प्रधानमंत्री मोदी अपने 12वें साल में अपने ब्रांड को कैसे फिर से स्थापित करना चाहते हैं

पवित्र लेकिन बोझिल ‘विश्वगुरु’ की छवि ट्रंप की जल्दबाजी से प्रभावित हुई है. पड़ोसी देशों में हुए घटनाक्रम भी कोई राहत नहीं देते.

1882 में चीन पर पाबंद, यूरोपीय प्रवासी बढ़े: H-1B वीज़ा की बहस अमेरिका में 150 साल पुरानी

मानिए या मत मानिए: अमेरिका के शोध और रिकॉर्ड दिखाते हैं कि प्रवासियों के फायदे और नुकसान 19वीं सदी से अमेरिकी जनता की चर्चा में रहे हैं.

पायरेटेड DVD को रोकने के लिए बना ‘अशोक कुमार आदेश’ अब मानहानि मामलों में एक मजबूत हथियार बन गया है

भारत में जॉन डो, जिन्हें 'अशोक कुमार आदेश' भी कहा जाता है, मूल रूप से पायरेसी रोकने के लिए थीं, लेकिन अब इन्हें पत्रकारों, प्रकाशकों और एक्टिविस्ट्स को चुप कराने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

लालू Vs ‘शेषन आचार संहिता’: 30 साल पहले बिहार चुनाव में भी EC मुख्य खिलाड़ी था, केवल अंपायर नहीं

अगर आज राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप बहुत कठोर लगते हैं, तो भी वे लालू प्रसाद द्वारा टीएन शेषन पर लगाए गए आरोपों के सामने फीके पड़ जाते हैं, क्योंकि बिहार शेषन के लिए सबसे बड़ी चुनौती था.

गुरुग्राम में किफायती आवास बिल्डरों और खरीदारों—दोनों के लिए महंगा साबित हो रहा है

हरियाणा की अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी ने गुरुग्राम में एक अलग तरह के ग्राहकों को आकर्षित किया. कम आय वाले लोगों को लाभ पहुंचाने के बजाय, ये घर सफेद कॉलर वाले पेशेवरों ने खरीद लिए.

नेहरू ने ठुकराया, बोस ने पास किया, आरसी दत्त ने इसमें सेवा दी — राष्ट्रवादी और ICS

इंडियन सिविल सर्विस ब्रिटिश साम्राज्य की इस्पाती रीढ़ थी, जिसे क्राउन की सेवा के लिए बनाया गया था. राष्ट्रवादी भी इस परीक्षा में बैठे — कुछ ने छोड़ दिया, कुछ बने रहे.

पाकिस्तान के साथ एशिया कप खेलना भारत का सबसे गलत फैसला था

भारतीय सरकार ने जनता का मनोबल शांत करने की कोशिश की, जैसे कि कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है’, लेकिन साफ है कि ऐसा नहीं है. वरना हम दुश्मन के साथ क्रिकेट क्यों खेल रहे होंगे?

चेन्नई स्टेशन पर उमड़ी भीड़, तिरुप्पुर से यूपी-बिहार लौट रहे प्रवासी मजदूर

एक्सपोर्टरों को अतिरिक्त यूनिटें बंद करनी पड़ीं. प्रवासी मजदूरों के लिए इसका मतलब है या तो कम दिन का काम और कम मजदूरी, या फिर जीने की तलाश में शहर छोड़ना.

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ईरान संकट: चावल निर्यातकों को शिपिंग लागत का जोखिम खरीदारों पर डालने की सलाह

नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बिगड़ते सुरक्षा हालातों और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आवाजाही बाधित होने की आशंका के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.