अब सिर्फ अंबानी-अडाणी जैसे बड़े बिज़नेस हाउस काफी नहीं. कम्युनिटी के MSME भी दुनिया चलाना चाहते हैं और नॉन-बनिया बिज़नेस प्लेयर्स को पीछे छोड़ना चाहते हैं.
भारत में जॉन डो, जिन्हें 'अशोक कुमार आदेश' भी कहा जाता है, मूल रूप से पायरेसी रोकने के लिए थीं, लेकिन अब इन्हें पत्रकारों, प्रकाशकों और एक्टिविस्ट्स को चुप कराने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.
अगर आज राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप बहुत कठोर लगते हैं, तो भी वे लालू प्रसाद द्वारा टीएन शेषन पर लगाए गए आरोपों के सामने फीके पड़ जाते हैं, क्योंकि बिहार शेषन के लिए सबसे बड़ी चुनौती था.
हरियाणा की अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी ने गुरुग्राम में एक अलग तरह के ग्राहकों को आकर्षित किया. कम आय वाले लोगों को लाभ पहुंचाने के बजाय, ये घर सफेद कॉलर वाले पेशेवरों ने खरीद लिए.
इंडियन सिविल सर्विस ब्रिटिश साम्राज्य की इस्पाती रीढ़ थी, जिसे क्राउन की सेवा के लिए बनाया गया था. राष्ट्रवादी भी इस परीक्षा में बैठे — कुछ ने छोड़ दिया, कुछ बने रहे.
भारतीय सरकार ने जनता का मनोबल शांत करने की कोशिश की, जैसे कि कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है’, लेकिन साफ है कि ऐसा नहीं है. वरना हम दुश्मन के साथ क्रिकेट क्यों खेल रहे होंगे?
एक्सपोर्टरों को अतिरिक्त यूनिटें बंद करनी पड़ीं. प्रवासी मजदूरों के लिए इसका मतलब है या तो कम दिन का काम और कम मजदूरी, या फिर जीने की तलाश में शहर छोड़ना.