तालिबान गुट टीटीपी को एक वैचारिक सहयोगी के रूप में पोषित करते हैं, क्योंकि अमीर हिबतुल्लाह अखुंदजादा का शासन सीमावर्ती क्षेत्रों को पाकिस्तानी नहीं, बल्कि अफगानी मानता है.
डिजिटल लेबर चौक उन तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म्स की श्रृंखला का हिस्सा है जो मैनुअल मज़दूरी को सड़कों से हटाकर एल्गोरिदम और ऐप्स की दुनिया में लाने की कोशिश कर रहे हैं. '10,000 से ज़्यादा कंपनियां भर्ती कर रही हैं.'
इंडियन रोड कांग्रेस के अध्यक्ष मनोरंजन परिडा ने कहा कि विकास की रफ्तार बहुत तेज़ है, शायद इसी वजह से हमारे मटेरियल की क्वालिटी- क्वांटिटी, विशेषज्ञता और क्षमता ज़रूरत के हिसाब से मेल नहीं खा पा रही.
ऐसा लगता है कि मोदी सरकार एक्स से खुद को अलग नहीं कर पा रही है. वह सोशल मीडिया पर बढ़ते गुस्से को बढ़ावा दे रही है और अपने ही बनाए राक्षस को चुपचाप और बड़ा कर रही है.
नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मोरारजी देसाई जैसे भारतीय नेताओं को पश्चिम ने अहंकारी माना, जबकि पाकिस्तानी नेता हमेशा घुटनों पर झुकने को तैयार रहते थे.
युवा विद्रोह के गुस्से के पीछे एक पुरानी, कठोर और अटूट सामाजिक व्यवस्था छिपी हुई है, जो देश की राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था को आकार दे रही है: जाति.
योगी आदित्यनाथ के एक फ़ोन ने अलीगढ़ के आईपीएस अधिकारी अमृत जैन को एक बड़े ज़मीन घोटाले की तह तक पहुंचा दिया, जिसमें आईएएस अधिकारी भी ठगे गए थे. "किसान और ख़रीदार, दोनों ठगे गए."
प्रधानमंत्री मोदी ने 'रेवड़ी' की राजनीति पर हमला बोलकर सही मायने में शुरुआत की. यही उनकी विरासत हो सकती थी. लेकिन उन्होंने पार्टी के फायदे के लिए विपक्ष को रेवड़ी बांटने में मात देना शुरू कर दिया.
दंगों के 5 साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी, एफआईआर 59/2020 पर आधारित मामले की सुनवाई अभी तक गति नहीं पकड़ पाई है. आदेशों और कार्यवाहियों की 1,156 प्रतियों का दिप्रिंट द्वारा किया गया विश्लेषण कई कारकों पर नज़र डालता है.
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.