हमें पहले उन मुश्किल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए जो मतदाताओं की नज़र में चुनाव प्रक्रिया की वैधता को कम करते हैं — जैसे कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना.
बंद गेट, महीनों से तनख्वाह न पाए कर्मचारी और धीमी बर्बादी — यही है सहारा की कभी चमकती शान, एंबी वैली से सहारा स्टार तक. अडाणी को होने वाली डिस्टेस सेल से थोड़ी उम्मीद दिखी — ‘उनके पास पैसा है.’
अखलाक केस कभी भी बिसाड़ा गांव की तंग गलियों से बाहर नहीं गया. यहां उसकी हत्या और बीफ की अफवाहों की बातें आज भी ताज़ा हैं, लेकिन किसी को भी नहीं पता कि जांच कहां पहुंची है.
ड्राफ्ट सीड्स बिल में बड़े आइडिया सही हैं — यूनिवर्सल रजिस्ट्रेशन, ट्रेसबिलिटी, असली पेनल्टी. पंजाब के लिए काम तभी बनेगा जब इसमें फेडरल सिस्टम और किसान-हित से जुड़े बारीक मुद्दे ठीक से तय हों.
आम धारणा यह है कि अगर कोई सरकार लोगों की हालत नहीं सुधारती, तो उसे सज़ा मिलती है, लेकिन नीतीश कुमार ने 20 साल में आर्थिक बदहाली के बीच सरकार चलाई और फिर भी भारी बहुमत से जीत गए.
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.