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Wednesday, 14 January, 2026
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BJP की एकरूपता वाली नीति ठीक नहीं है. लद्दाख दिखाता है कि संघवाद हमारी लोकतंत्र की असली नींव है

बीजेपी के बहुसंख्यकवादी और एकरूपता वाले एजेंडा, जैसे ‘वन नेशन, वन पीपल, वन कल्चर’, क्षेत्रीय पहचानों के लिए खतरा पैदा करते हैं.

क्या प्रशांत किशोर बिहार के केजरीवाल हैं? हां, लेकिन पूरी तरह नहीं

14 नवंबर को जो भी नतीजा आए, पीके बतौर नेता बिहार की राजनीति में अपनी जगह बना चुके हैं. वह अब चुनावी रणनीतिकार वाले पीके नहीं, एक अलग पीके हैं.

सऊदी अरब की तेल की ताकत घट रही है. इसका अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?

इसमें कोई संदेह नहीं कि सऊदी अरब ने अपनी समस्याओं को खुद बढ़ाया है, जिसका कारण नेतृत्व का अहंकार और खराब सलाह है. ‘दि लाइन’ इसका स्पष्ट उदाहरण है.

बिहार की विपक्षी पार्टियां प्रवासन को गलत नजरिए से देख रहे हैं

प्रवासियों और उनके परिवारों के एक बड़े वर्ग की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव आ रहा है. इससे उन्हें समाज में सम्मानजनक दर्जा हासिल करने में मदद मिल रही है.

चिनाब का बदलता चेहरा— मोहब्बत की नदी कैसे ‘टाइम बम’ में तब्दील हो गई

चिनाब नदी के किनारे रहने वाली 23 साल की युवती ने कहा, “अगर हम इसका तल लगातार छोटा करते रहेंगे, तो यह जरूर हमारे घरों में घुसेगी. इसे गुस्साई नदी कैसे कह सकते हैं, गलती नदी की नहीं है.”

जो ब्यास नदी कभी शांत रहती थी, वह अब उग्र क्यों हो रही है?

स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि ब्यास नदी के किनारे अतिक्रमण सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि मौसमी बाढ़ के प्रभावों को भी और बुरा बना देता है.

ऑटो, ट्रक और डिलीवरी कामगारों का सोशल मीडिया सफर — भारत में उभरते वर्किंग-क्लास इन्फ्लुएंसर्स

सोशल मीडिया पर पेंटर, राजमिस्त्री, निर्माण श्रमिक, मजदूर, डिलीवरी बॉय, ट्रक ड्राइवर, सभी बेबाकी से अपने कार्य-जीवन को अपना रहे हैं.

सूडान साबित करता है कि जब दुनिया ख़ूनी शासकों पर लगाम नहीं लगाती, तो नतीजे कितने भयानक होते हैं

चौदह मिलियन शरणार्थी, तथा 25 मिलियन लोग तीव्र भूखमरी का सामना कर रहे हैं, यह दुनिया के लिए सूडान में व्याप्त अराजकता को समाप्त करने के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए - भले ही इसके शासकों की क्रूरता पर्याप्त कारण न हो.

ज़ोहरान ममदानी आधुनिक भारत की असली पहचान हैं

कई अन्य भारतीय मूल के नेताओं के उलट, उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया और न ही अपनी भारतीय पहचान को कम दिखाया. वैसे भी उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होता क्योंकि उनकी मां मीरा नायर भारत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक हैं.

आदर्शों और अस्तित्व के बीच: क्यों बिहार में वामपंथ अब भी कायम है और कैसे चुनावी ज़मीन मजबूत की

आलोचनाओं के बावजूद, व्यावहारिक राजनीति ने बिहार में वामपंथ को टिकाए रखा है, जैसा कि 2020 के चुनाव परिणामों में दिखा. और वह भी ऐसे समय में जब देश के बाकी हिस्सों में उसकी मौजूदगी कुछ छोटे इलाकों तक सिमट गई है.

मत-विमत

जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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दिल्ली में भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के आधिकारिक आवास में आग लगी

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) दिल्ली में मदर टेरेसा क्रिसेंट मार्ग पर स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद रविशंकर प्रसाद के आधिकारिक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.