यह कहना कि बादशाह स्त्री-विरोधी हैं, कोई बहुत नई या चौंकाने वाली बात नहीं है. स्त्री-विरोध उनके संगीत की एक रचनात्मक शर्त है—यह उनके संगीत का उतना ही बुनियादी हिस्सा है, जितना कि उसमें बजने वाली जोशीली 'बीट ड्रॉप.'
दूसरे विश्व युद्ध से सबक लेते हुए, दुनिया युद्ध को कानून और तर्क के अधीन बनाने की दिशा में आगे बढ़ती हुई प्रतीत हुई. हालांकि, इन उद्देश्यों को लगभग तत्काल ही विफल कर दिया गया.
अमेरिका-इज़रायल के ईरान पर हमले को लेकर पीएम मोदी के रुख में तीन ऐसी गलतियां हुईं, जिन्हें टाला जा सकता था. इनसे उनके विश्वगुरु के दावों की सच्चाई सामने आ गई.
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज के वैज्ञानिक वडनगर में मिले कंकालों से ताजिकिस्तान की वंशावली खोज रहे हैं; लद्दाख की आबादी के तिब्बती, दक्षिण एशियाई और मध्य एशियाई मूल को समझा रहे हैं.
डॉलर को बदलने के लिए सिर्फ दूसरी करेंसी नहीं, बल्कि उतना ही मजबूत फाइनेंशियल सिस्टम, भरोसेमंद संस्थान और बैंक-निवेशक-पेमेंट का पूरा नेटवर्क भी जरूरी है.
2026 का चुनाव अब शासन से जुड़े मुद्दों, सामाजिक बंटवारे और विचारधारात्मक टकराव के मिश्रण से तय हो रहा है. इस माहौल में टीवीके के रूप में एक नए खिलाड़ी का उभरना चर्चा और बढ़ा रहा है.
इंदिरा के ज़माने में, यूथ कांग्रेस लोगों के बढ़ते असंतोष के ख़िलाफ़ एक 'सेफ़्टी वॉल्व' का काम करती थी. फिर संजय ने इसे कांग्रेस के लिए एक 'फ़ीडर कैडर' में बदल दिया. अब यह ख़ुद को नए सिरे से स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रही है.
दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए एंट्री फीस में बढ़ोतरी ने पंजाब और हिमाचल के बीच एक नई तकरार छेड़ दी है. लेकिन यह झगड़ा इससे कहीं ज़्यादा गहरा है—इसमें हाइड्रो प्रोजेक्ट के बकाया, टूरिज़्म से जुड़ा ट्रैफिक और यहाँ तक कि सांस्कृतिक टकराव के मुद्दे भी शामिल हैं.
कुछ समय तक बीड़ी बनाने का काम करने वाले 80 वर्षीय विजयन ने वामपंथी दल के लिए लगातार दो बार केरल में जीत हासिल की है—और अब वे विधानसभा चुनावों से पहले उस 'अस्तित्व की लड़ाई' का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसे पार्टी इसी नाम से पुकारती है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.