साध्वी लगातार कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह पर हमले कर रही हैं. हाल ही में प्रज्ञा ने शहीद एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की शहादत को लेकर विवादित बयान था.
एस नेगी ने 1952 के आम चुनावों में वोट डाला था और तब से लेकर आजतक उन्होंने कोई भी चुनाव नहीं छोड़ा है. चाहे वो लोकसभा हो विधानसभा हो या फिर पंचायत का चुनाव.
यह जरूरी नहीं है कि यादव या आजाद नरेंद्र मोदी के लिए बड़ी चुनौती साबित होते. लेकिन उनके टक्कर में होने से बीजेपी का राष्ट्रवाद या दलित प्रेम का दावा कमजोर होता.
हरियाणा के सबसे पिछड़े मेवात इलाके में लोकसभा चुनाव को लेकर उदासीनता फैली हुई है. गुरुग्राम लोकसभा सीट के तहत इस इलाके में भाजपा से राव इंद्रजीत सिंह और कांग्रेस से कैप्टन अजय सिंह यादव टक्कर में हैं.
आज निरंतर बदलती विश्व व्यवस्था भारत के लिए एक मौका उपलब्ध करा रही है जिसका लाभ उठाने के लिए उसे खुद को अनुशासित रखना होगा ताकि पाकिस्तान जब अपने लिए मौका देख रहा है तब हम हड़बड़ी में कोई प्रतिक्रिया न कर बैठें.