विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इलाके के आंदोलित किसान कृषि कानूनों से ज़्यादा एमएसपी, गन्ना बकाया, डीजल कीमतों और बिजली की ऊंची दरों को लेकर चिंतित हैं.
देश ने इन्दिरा गांधी की सरकार के अहंकार एवं तानाशाही वाले रवैये को काफी झेला है लेकिन अब देश को उम्मीद है कि पूर्व की तरह वैसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो.
तीन विवादास्पद कृषि कानून, जिन्होंने एक साल तक चलने वाले आंदोलन को जन्म दिया- को रद्द करने का मोदी सरकार का फैसला पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीनों पहले आया है.
गौरतलब है कि किसान तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर लगभग एक साल से प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन के दौरान लगभग 700 किसान शहीद हो चुके हैं.
अखिलेश यादव ने कहा कि 'देश के सभी किसानों को मैं बधाई देना चाहता हूं जिनके संघर्ष और आंदोलन के परिणाम स्वरूप आज तीनों काले कानून वापस लिये गये हैं. काले कानून की वापसी अंहकार की हार हैं. यह किसानों की जीत है, लोकतंत्र की जीत है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु नानक जयंती के अवसर पर राष्ट्र के नाम संबोधन में घोषणा की कि केंद्र ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का फैसला किया है.