वाराणसी के गुलाबी बाग़ स्थित BJP के डिजिटल वॉर रूम में, क़रीब 100 वॉलंटियर्स हैं जो एक तीन मंज़िला इमारत में बैठते हैं. ये वॉर रूम पार्टी कार्यकर्त्ताओं, पदाधिकारियों और वॉलंटियर्स को आपस में जोड़ता है.
ओडिशा की एक पूर्व कैबिनेट मंत्री और सत्तारूढ़ बीजद के विधायक के बेटे को पंचायत चुनाव में हार गए, जबकि कॉलेज की छात्रा, सब्जी विक्रेता और दंत चिकित्सक ने राज्य में ग्रामीण चुनाव में जीत हासिल की है.
आरएसएस की चुनाव सामग्री—पर्चे, पोस्टर और भाषण—से पता चलता है कि 2022 के चुनावों में भाजपा मुख्यत: पर तीन बातों पर जोर दे रही है. और चौथा ‘एम’ मस्कुलरिटी को माना जा सकता है क्योंकि अनुच्छेद 370 का मुद्दा भी बीच-बीच में उठता रहता है.
एमवीए घटक दलों का कहना है कि राज्यपाल की यह टिप्पणी, कि समर्थ रामदास छत्रपति शिवाजी के गुरु थे, इतिहास को बदलने का एक प्रयास है. शिक्षाविदों का कहना है कि ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है जो कोश्यारी के बयान का समर्थन करता हो.
नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) मणिपुर में सीएम बिरेन सिंह के बीजेपी नेतृत्व वाली सरकार में साझीदार है. लेकिन इस बार के चुनावों में उसने 60 सीटों में से 38 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. जबकि 2017 में उसके 9 उम्मीदवार मैदान में थे.
इनमें पिछले साल गणतंत्र दिवस पर लाल किले में हिंसा की घटना से संबंधित मामला भी शामिल है. केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों को अपना प्रदर्शन खत्म करने पर राजी करने के लिए जो आश्वासन दिए थे, मामले वापस लेना भी उनमें एक था.
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर का कहना है कि वह न तो तेलंगाना के चुनावों के लिए टीआरएस की तैयारी के साथ जुड़े हैं और न ही केसीआर की राष्ट्रीय भूमिका की महत्वाकांक्षा से जुड़े हैं. लेकिन आई-पैक टीम ने तेलंगाना के प्रचार कार्य पर काम करने की बात कही है.
रणनीतिक तौर पर, बिना शर्ट वाला यह प्रदर्शन आत्मघाती गोल से भी बुरा था. अचानक, AI समिट की सारी गड़बड़ियां भूला दी गईं और यूथ कांग्रेस का विरोध ही मुद्दा बन गया.