एलडीएफ की नज़र 2026 के विधानसभा चुनावों में हैट्रिक जीत पर है, साथ ही केरल में दिसंबर में स्थानीय निकाय चुनाव भी होने वाले हैं. नए कदमों के लिए सरकार 10,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
हाल के महीनों में, सत्तारूढ़ गठबंधन में एक प्रमुख सहयोगी, TIPRA मोथा, स्वदेशी अधिकारों के संरक्षण से संबंधित समझौते के कथित गैर-निष्पादन को लेकर गठबंधन से बाहर निकलने की धमकी दे रहा है.
केवल तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल ही अब तक इस योजना में शामिल नहीं हुए हैं, जिसके तहत केंद्र 2022-23 से 2026-27 के बीच देशभर के 14,500 स्कूलों को उन्नत करने का लक्ष्य रखता है.
वाम दल कांग्रेस और राजद पर दबाव बना रहे हैं कि वह भूमिहीन किसानों को सुरक्षा, भूमिहीनों को ज़मीन और सीमित भूमि स्वामित्व जैसे सुधारों की सिफारिशों को लागू करने का वादा करें.
कांग्रेस का दावा है कि केंद्रीय मंत्री ने संविधान निर्माण में आंबेडकर की भूमिका पर सवाल उठाया, ये टिप्पणियां बीजेपी की ‘सोच’ दिखाती हैं. खट्टर ने यह टिप्पणी आईपीएस वाई पूरन कुमार की पत्नी से मिलने के बाद की.
बिहार में चुनाव सूची संशोधन और अगले महीने होने वाले चुनाव के बीच बीजेपी ने हरियाणा में रहने वाले बिहार के प्रवासियों तक पहुंच बढ़ा दी है. यह 14 जिलों पर केंद्रित है, जहां प्रवासियों की संख्या ज्यादा है.
पीएम मोदी ने RJD और कांग्रेस पर सिर्फ अपने परिवारों की चिंता करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ‘बिहार में अपनी सभी पुरानी जीत के रिकॉर्ड तोड़ने को तैयार’ है.
इन घटनाओं और उनके निपटारे के तौर-तरीकों ने एक बार फिर ध्यान खींचा है बीजेपी की उस कमज़ोरी पर, जो दलित चिंताओं को समझने और उन्हें हिंदुत्व परिवार में पूरी तरह समाहित करने की दिशा में दिखती है.
अगले महीने होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में फिर से वही पुराना राजनीतिक माहौल दिख रहा है. टिकटों के बंटवारे से साफ है कि दलों ने अपने पारंपरिक वोटबैंक से दूरी नहीं बनाई है.
RJD नेता ने कहा है कि मुख्यमंत्री का नाम बिहार चुनाव से पहले घोषित किया जाएगा. कांग्रेस पहले हिचकिचा रही थी, लेकिन अब ब्लॉक के दबाव में मानती नजर आ रही है.