कर्पूरी ठाकुर इज़रायल से भारत की कूटनीतिक दूरी के आलोचक थे. उन्होंने ज़ायोनीवाद को एक आबादकार-औपनिवेशिक परियोजना के रूप में नहीं बल्कि अद्वितीय समाजवादी लोकाचार के साथ एक वैध यहूदी राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में माना.
कांग्रेस की सरकारों और भाजपा सरकार में मूल अंतर विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता का ही है. विचारधारा कांग्रेस के नेतृत्व की नीतियों को तो दिशा देती थी मगर कभी उन पर राज नहीं करती थी. भाजपा में विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता कट्टरपंथी किस्म की है.
अंतरिम बजट में ‘पीएम किसान योजना’ के तहत दिए जाने वाले उपहार में दोगुना बढ़ोतरी की जा सकती थी. ऐसा नहीं करना बताता है कि भाजपा को अपनी जीत का पूरा भरोसा है; दूसरे, उसका मानना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास जैसी चीजें ज्यादा कारगर होंगी
कांग्रेस पार्टी के विरोधी जब कांग्रेस पर दलितों पिछड़ों आदिवासियों के हितों पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाते हैं तो वे इतिहास को भूल जाते हैं कि किन झंझावातों से कांग्रेस पार्टी जूझ रही थी.
भाजपा-आरएसएस द्वारा स्थापित की जा रही नई राजनीतिक हिंदू व्यवस्था हिंदू समाज में सुधार की निरंतरता है. जाति और ऊंच-नीच कायम हैं, लेकिन यह प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जाता है.
लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार भाजपा के लिए बेहद नाकारा हो जाएंगे. बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए भाजपा 2025 में अगले विधानसभा चुनाव का इंतज़ार नहीं करेगी.
चीन सिर्फ भारत के इरादों को गलत नहीं समझ रहा है; यह ऐतिहासिक रूप से मैत्रीपूर्ण रिश्ते को शत्रुतापूर्ण रिश्ते में बदलकर एक रणनीतिक गलती कर रहा है, जिससे मौजूदा विश्वास की खाई और गहरी हो रही है.
(गुरदीप सिंह) सिंगापुर, पांच फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के टाटा-एयरबस की वडोदरा ‘असेंबली लाइन’ से रक्षा मंत्रालय को एक सैन्य परिवहन विमान...