पश्चिम बंगाल में मैंने कभी भी कम्युनिस्टों को लाल कपड़े पहनकर मतदान केंद्र पर जाते नहीं देखा, न ही टीएमसी को हरे कपड़े पहने और शायद भाजपा के किसी विरले नेता को भगवा पहनकर आते हुए देखा, लेकिन गुजरात से बिल्कुल अलग नज़ारा था, जहां मोदी और अमित शाह भगवा पहनकर वोट डालने पहुंचे थे.
सोनिया गांधी ने अमीरों को धमकी दिए बिना गरीबों की मदद करने का वादा किया. राहुल गांधी ने उस दृष्टिकोण को खारिज कर दिया और समय में पीछे चले गए हैं: अपनी दादी इंदिरा गांधी की बयानबाजी की ओर.
दूसरे चरण की तरह, 2024 के लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की समस्या यह है कि उसके पास बचा के रखने के लिए बहुत सारी सीटें - कुल 93 सीटों में से 80 सीटें - हैं
पश्चिम बंगाल में ‘घुसपैठिये’ या ‘तुष्टीकरण’ जैसे शब्द बहुत कम सुनाई पड़ते हैं, न ही ‘मंगलसूत्र’ या अमित शाह द्वारा ममता बनर्जी के ‘मां, माटी, मानुष’ नारे को ‘मुल्ला, मदरसा, माफिया’ में बदलने जैसे वाक्या सुनाई देते हैं.
भले ही जेडी(एस) ने अब प्रज्वल रेवन्ना को निलंबित कर दिया है और भाजपा ने खुद को उनसे दूर कर लिया है, लेकिन यह बिल्कुल स्पष्ट है कि सिस्टम ने उन्हें बचाने की कोशिश की है.
चुनाव मंत्री – माफ कीजिएगा, प्रधानमंत्री सच्चाई से वाबस्ता करना पसंद नहीं करते. उन्हें बॉलीवुड की कल्पनाएं, भ्रम के बुलबुले और साफ-सुथरे माहौल में सज धज कर फोटो खिंचवाना पसंद है.
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, भारतीयों ने 2023-24 में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक उधार लेने के लिए अपने सोने के आभूषण गिरवी रखे, जो 2018-19 के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक है.
एक चीज़ जो ट्रांस की खूबसूरती को ज़िंदा रखती है, वह है उनका समुदाय और अपनापन. लेकिन कानून बनाने वालों की नजर में, यह अपनापन ‘धोखा’, ‘लुभाना’ और ‘गलत असर डालना’ बन जाता है.