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Thursday, 5 February, 2026
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CAA धमाके नहीं, फुसफुसाहट के साथ आया है, NRC के बिना यह अकादमिक बहसों में फीका पड़ जाएगा

भाजपा की सीएए वाली सियासी चाल बहुत कारगर नहीं रही क्योंकि इससे जिन लोगों को लाभ मिलता उन्हें पहले से मौजूद कानून के तहत भी आसानी से शामिल किया जा सकता है और नए प्रवासियों को अलग-थलग रखा जा सकता है.

सीएए भी कैसे पश्चिम की इमीग्रेशन नीतियों से मिलता -जुलता है, इसके अपने राजनीतिक उद्देश्य हैं

सीएए न केवल भेदभावपूर्ण है, बल्कि इसका उद्देश्य भेदभावपूर्ण होना भी है. यदि सरकार मुसलमानों को शामिल करने के लिए अपना दायरा बढ़ाती है, तो अधिनियम राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय हो जाता है और इसलिए निरर्थक हो जाएगा.

क्या था भारत-पाकिस्तान के बीच अल्पसंख्यकों से जुड़ा नेहरू-लियाकत समझौता, CAA क्यों है जरूरी

नेहरू-लियाकत समझौते के तहत यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई थी कि दोनों देशों में किसी भी हालत में अल्पसंख्यकों के साथ किसी तरह का भेदभाव न हो और उन्हें हर तरह से पूरी सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाए.

ममता बनर्जी हिट दीदी नंबर 1 शो पर हैं, TMC में ग्लैमर की कमी महसूस होती है

टीएमसी के दो ग्लैमरस फिल्मस्टार सांसद, न तो नुसरत जहां और न ही मिमी चटर्जी को इस बार फिर से टिकट दिया गया है. यह दर्शाता है कि मतदाता कितने समझदार हैं.

डियर CJI, 2024 के चुनावों में सही विकल्प चुन पाने की भारतीय वोटर्स की क्षमता आपके हाथ में है

सुप्रीम कोर्ट के लिए चुनावी बांड मामले में 30 जून तक की मोहलत देने की एसबीआई की याचिका पर सुनवाई करना अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए लोकतंत्र की भावना को पैरों तले रौंदने जैसा होगा.

बेरोजगारी अब चुनावी मुद्दा है, क्या ‘पहली नौकरी पक्की’ के सहारे कांग्रेस इसे भुना सकती है

मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने युवाओं के लिए नौकरी की गारंटी की घोषणा करके सत्ताधारी बीजेपी की राह मुश्किल कर दी है. बीजेपी को अब इससे बेहतर पेशकश करनी होगी. इस कश्मकश में चाहे जो भी जीते, लेकिन रोजगार के सवाल पर राजनीति हो ये अच्छा है.

पिछले 20 साल के आम चुनावों में पार्टियों का उत्थान और पतन, नया कानून जिसके 2024 के लिए मायने हैं

लोकसभा चुनावों के पिछले दो दशकों में यूपीए का उत्थान और पतन, वामपंथ का पतन और भाजपा की पराजय देखी गई. अब चुनाव आयुक्तों को चुनने के लिए एक नया कानून आया है.

मोदी सिर्फ जम्मू-कश्मीर में ‘दिल जीतने’ नहीं गए थे, यह दुनिया के लिए एक संकेत भी था

पीएम मोदी ने चुनावों का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन उन्होंने बड़े पैमाने पर मुस्लिम समुदाय तक पहुंच बनाई और हज़रतबल परियोजना के उद्घाटन के जरिए विश्व को एक संकेत भेजा.

बीजेपी तमिलनाडु में गुजरात या यूपी मॉडल से लोगों को लुभा नहीं सकती, द्रविड़ मॉडल सफल है

दरअसल बीजेपी जब तमिलनाडु में जमीन तलाशने की कोशिश करती है, तो उसके पास अपना बना कोई ऐसा मॉडल नहीं है जो द्रविड़ विचारधारा पर चलने वाले तमिलनाडु से ज्यादा चमकदार हो.

बीजेपी की रणनीति पर गौर कीजिए, 2024 नहीं बल्कि 2029 की तैयारी कर रही है

‘माइलेज’ वाले नेता मानते हैं कि वे उम्र आदि की सीमाओं से ऊपर हैं, मसलन शी जिनपिंग, बाइडन, ट्रंप, एर्दोगन या पुतिन को ही देख लीजिए. तो फिर मोदी 75 की उम्र के बाद भी प्रधानमंत्री क्यों नहीं बने रह सकते?

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हैदराबाद में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने की खुदकुशी

हैदराबाद, चार फरवरी (भाषा) अपनी नौकरी की जरूरतों को पूरा करने में खुद को असमर्थ पा रहे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बुधवार को कथित...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.