कश्मीर घाटी में तीन तरह की टूटन साफ दिखती है— युवा लोग उग्रवाद से टूट रहे हैं, पाकिस्तान से जुड़ाव टूट रहा है, और सुरक्षा एजेंसियां लोगों और हथियारों के बीच के रिश्ते को तोड़ने में सफल हुई हैं
उनके घोर आलोचक भी मानते हैं कि भारतीय सेना में दूसरा कोई ऐसा जनरल नहीं था जिसमें उनके जैसी बौद्धिक गहराई, रणनीतिक दृष्टि और बदलाव की इच्छाशक्ति थी. वे सेना को खींचकर 21वीं सदी में ले आए थे.
भाजपा देख सकती है कि पश्चिम बंगाल में 2024 के चुनाव परिणाम के लिए ‘लक्ष्मीर भंडार’ के पीछे मतदाताओं का एकीकरण कैसे महत्वपूर्ण हो सकता है, जिसके लिए पार्टी ने खुद को तैयार कर लिया है.
अगर मोदी 2024 के चुनाव में बहुमत जीतते हैं, तो आरएसएस की पितामह बने रहने की राहें मुश्किल हो जाएंगी, लेकिन अगर वे विफल रहे, तो वो आरएसएस की संघ परिवार मे प्राथमिकता को सिद्ध करेगी.
भारत में जो सियासी हवा चल रही है, उससे सैन्य नेतृत्व को सजग हो जाना चाहिए कि सेना के बुनियादी मूल्यों को किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
तीसरे चरण की तरह, इस बार भी एनडीए को अपनी जमीन गंवानी पड़ सकती है, क्योंकि पिछली बार उसे 49 में से 39 सीटें मिली थीं, जिनमें से अकेले भाजपा ने 32 सीटें जीती थीं.
चुनाव नतीजे पर चर्चा में प्रायः हर कोई केवल भाजपा के ‘आंकड़े’ की बात कर रहा है, लेकिन क्या हो अगर हम समीकरण को उलट दें और यह सवाल करें कि हारने वाले का प्रदर्शन कैसा रहा?
बीएमसी के अनुसार, शहर में अभी 1,025 आधिकारिक तौर पर स्वीकृत होर्डिंग्स हैं. हालांकि, मुंबई में रहने वाला कोई भी व्यक्ति आपको बता सकता है कि यह संख्या हास्यास्पद रूप से कम आंकी गई है.
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा विरोध दर्ज करने से ज्यादा-से-ज्यादा यह मकसद सध सकता है कि भारत अपना दावा बनाए रख सकता है. कोई और मकसद सधेगा, इसकी उम्मीद रखना बेमानी है.
हैदराबाद, दो मार्च (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी विकाराबाद में जिला कांग्रेस समिति (डीसीसी) के अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में शामिल...