मोदी सरकार जबकि जनगणना करवाने की तैयारी कर रही है, हम जाति, गठबंधन, संविधान के मुद्दों से बनी नयी वास्तविकता की जांच कर रहे हैं. एक दशक तक तो ‘मोदी मशीन’ अपनी रौ में इन तीनों की उपेक्षा करती रही लेकिन पिछले चुनाव ने सब बदला डाला.
1990 में सत्ता खोने के बाद उन्होंने मुझसे एक इंटरव्यू में कहा, ‘हां, मैं युवा था, मैंने गलतियां कीं.’ उन्होंने ऑफ-द-रिकॉर्ड कहा, ‘अगर आप कल प्रधानमंत्री बनते हैं, तो आप भी वही गलतियां करेंगे.’
वर्तमान परिदृश्य में उत्तर प्रदेश दोहरे राजनीतिक विरोधाभास में प्रवेश कर चुका हैं. एक तरफ, भाजपा की पापुलिस्ट राजनीति लगभग असरदार होती दिख रही हैं. दूसरा भाजपा की वैचारिक भुजा आरएसएस के बीच एक राजनीतिक टकराव शुरू हो गया हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश का उपचुनाव भाजपा तथा अन्य राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण चुनाव बना हुआ हैं.
टैगोर हिमालय के पार यात्रा कर चुके थे और शायद वे आधुनिक भारतीय विचारकों में से पहले थे जिन्होंने 20वीं सदी की शुरुआत में भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे “सभ्यतागत संबंधों” के महत्व को संजोया था.
वक्फ मुसलमानों की जायदाद है और जिस तरह हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, पारसियों के ट्रस्ट उनके ही समुदाय के लोग चलाते हैं उसी तरह वक्फ बोर्डों की सदस्यता मुसलमानों को ही सौंपी जानी चाहिए.
बांग्लादेश संकट भारत के पड़ोस में उथल-पुथल की एक ताजा मिसाल है लेकिन पड़ोसियों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए हमें खुद को भुक्तभोगी मानने की मानसिकता छोड़नी होगी, घरेलू सियासत और धर्म पर बेहिसाब ज़ोर देने से परहेज करना होगा
उत्पीड़न के प्रत्येक कृत्य का अपना मूल कारण होता है और इसके ऊपर उसी के अनुसार चर्चा की जानी चाहिए. बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के प्रति लोगों के मन में निर्विवाद रूप से घृणा का एक भाव है