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Thursday, 29 January, 2026
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हिंदुओं पर हमले, खालिदा की मौत और जमात—बांग्लादेश कई मोर्चों पर संकट से जूझ रहा है

जब सभी लोग नए साल का स्वागत कर रहे थे, तब बांग्लादेश में 50-वर्षीय एक हिंदू व्यक्ति को ज़िंदा जला दिया गया, दो हफ्तों में यह चौथा ऐसा हमला था. देश में फॉर-राइट के अपने संस्करण की पकड़ मजबूत होती जा रही है.

भारत का सबसे नतीजाखेज दशक और पत्रकारिता की ‘ड्रीम टीम’ के साथ उसकी खबरनवीसी का मजा

आप कहेंगे कि 1985-95 का दशक तो कब का बीत चुका लेकिन ऐसा है नहीं, क्योंकि उस दशक में जो मसले उभरे वे आज भी हमारे लोकतंत्र और सार्वजनिक विमर्शों पर हावी हैं.

भारतीय मिलेनियल्स की दुविधा: न परंपराएं छोड़ पाए, न आधुनिक जीवन में पूरी तरह रम पाए

हमारे माता-पिता हमारी थकान नहीं समझते. वे कहते हैं कि हम न तो कुएं खोद रहे हैं, न ही युद्ध झेल रहे हैं, लेकिन हम थके हुए हैं—हड्डियों तक.

नेपाल के नए विदेश मंत्री—सेना के साथ संतुलन या कूटनीतिक उपाय?

70 दिन की अवधि के लिए बालानंद शर्मा की नियुक्ति ने नेपाल के कूटनीतिक मोर्चे पर सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर अटकलें बढ़ा दी हैं.

जातिगत बैठकें और सत्ता की बेचैनी: क्या यूपी की राजनीति नए सामाजिक संतुलन की ओर बढ़ रही है?

ब्राह्मण-ठाकुर बैठकों से लेकर PDA की राजनीति तक, चुनाव से पहले बदलते सामाजिक समीकरण क्या संकेत दे रहे हैं?

राजनीतिक दल भी हैं वर्कप्लेस, महिलाओं की सुरक्षा के लिए POSH पर कोई समझौता नहीं

अगर महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, लेकिन राजनीतिक दलों का माहौल लागू होने वाले यौन उत्पीड़न विरोधी नियमों से बाहर रहता है, तो हम नई महिलाओं को असुरक्षित जगहों में भेज रहे होंगे.

विकास का नया रास्ता: भारत के आर्थिक मॉडल में संस्कृति की एंट्री

भारतीय परंपरा हमारे जीवन में अनुशासन और नैतिक जिम्मेदारी बनाए रखती है. यह एक ऐसे संतुलित समाज की कल्पना करती है, जहां आध्यात्मिकता और आर्थिक समृद्धि एक साथ मौजूद हों और मानवता को उज्ज्वल व सामंजस्यपूर्ण भविष्य की ओर ले जाएं.

छात्र आंदोलन से जमात तक, बांग्लादेश में इस्लामवादी कैसे बने हीरो

छात्रों के आंदोलन से निकली नेशनल सिटिज़न्स पार्टी अब पूरी तरह कलंकित हो चुकी है. उसने अब बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी से हाथ मिला लिया है.

बोफोर्स से नेशनल हेराल्ड तक—भारतीय ‘घोटाले’ अदालत में ढह गए, लेकिन फायदा हमेशा BJP को मिला

वही पुराना पैटर्न है: सनसनीखेज लीक से उन्मादी कवरेज होती है, मामले अदालत में गिर जाते हैं, लेकिन जनता की अदालत में आरोपियों को पहले ही दोषी ठहरा दिया जाता है.

देहरादून, बरेली से तमिलनाडु तक हिंसा—भारतीय गुस्सैल हो रहे हैं, राजनीति को हर बार दोष देना काफी नहीं

हिंसा करने वाले लोग पुलिस से नहीं डरते. उन्हें पता है कि वे दूसरों को परेशान कर सकते हैं, दुकानों पर हमला कर सकते हैं या यहां तक कि हत्या भी कर सकते हैं और पकड़े नहीं जाएंगे.

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अजित पवार की मौत ने भारतीय राजनीति में एक और ‘क्या होता अगर’ वाली बहस छोड़ दी है

दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पुलिस के साथ मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए

बीजापुर, 29 जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो नक्सली मारे गए जिन पर कुल सात लाख रुपये...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.