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Saturday, 28 February, 2026
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भारत को हफ्ते में 90 घंटे काम वाली नहीं बल्कि चार दिन काम की फ्रांस वाली व्यवस्था चाहिए

काम के घंटे बढ़ाने का समर्थन करने वाले कहते हैं कि भारत को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्द्धा में बने रहना है तो कामगारों का अटूट समर्पण निर्णायक साबित हो सकता है, लेकिन प्रोडक्टिविटी तो सीधे काम के घंटे के अनुपात से बढ़ती-घटती नहीं है.

भारत को रक्षा संबंधी खरीद की समयसीमा तय करना ज़रूरी — प्रक्रिया के बजाय प्रोडक्ट को मिले तरजीह

किसी सिस्टम को जब तक अपनाया जाता है तब तक उसकी टेक्नोलॉजी पुरानी पड़ चुकी होती है, भले ही वह सिस्टम बिलकुल नया क्यों न हो.

एक नया ‘इज़्म’ आ गया है, जो राइट, लेफ़्ट और सेंटर को मात दे रहा है

इस नई दुनिया में ‘पॉपुलिज़्म’ वाम, दक्षिण, मध्य, सभी मार्गों को ध्वस्त कर रहा है. बेशक हर एक देश, मतदाता समूह, और समाज के लिए यह अलग-अलग रूप में उभर रहा है, इसका आकर्षण और इसकी सफलता इसके प्रयोग में निहित है. यह आपके दिल या दिमाग पर ज्यादा बोझ नहीं डालता.

मिडिल क्लास के करदाताओं की अब कोई बात नहीं कर रहा है, रुपया गिर रहा है, बाज़ार डूब रहे हैं

कई लोग जो एक दशक पहले रुपये में गिरावट को लेकर इतने चिंतित थे, वे बोलने को तैयार नहीं हैं. जब मनमोहन सिंह पीएम थे तो वे शेर थे. अब वे चूहे हैं.

4 हफ्तों में 4 राजस्व सचिव: ‘समर्पित नौकरशाही’ की तलाश में क्यों है मोदी सरकार

प्रधानमंत्री मोदी जाहिर तौर पर राजनीतिज्ञों की तुलना में सेवारत और सेवानिवृत्त नौकरशाहों पर अधिक विश्वास जताते हैं. हालांकि, आईएएस अधिकारी इसे शायद संदेह की नजर से देख रहे होंगे.

भारत में पुलिस, अस्पताल और अदालतों से बचे रहना एक आशीर्वाद क्यों है?

भारत की तीन सबसे डरावनी संस्थाएं—पुलिस, अस्पताल और अदालतें—अपनी क्षमता के लिए पहचानी जाती हैं, जो रक्षकों को पीड़ित बना देती हैं.

करोड़पतियों को कड़ी मेहनत का संदेश देने की जरूरत नहीं. L&T के सुब्रह्मण्यन गलत सदी में जी रहे हैं

एलएंडटी के चेयरमैन एसएन सुब्रमण्यन इस विवाद से बच जाएंगे क्योंकि यह भारत है, जहां हमारा रवैया है 'चलता-है.' पश्चिम में, उन्हें माफी मांगने या इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाता.

ट्रूडो का पतन जताता है कि पश्चिमी जगत में अब लापरवाह लिबरलिज्म राजनीति के लिए जगह नहीं

सबको साथ लेकर चलने के आडंबर पर खड़ी राजनीति आज की दुनिया में अपना आकर्षण खो रही है, क्योंकि आज लोग ठोस नतीजे और प्रामाणिक नेतृत्व चाहते हैं.

बांग्लादेश के ‘चीफ एडवाइज़र’ प्रो. मोहम्मद यूनुस के नाम एक खुली चिट्ठी

हसीना ने आपका बैंक आपसे छीना, अब आपने उनसे उनकी सत्ता छीन कर बदला ले लिया है? अब आपके लिए कसौटी यह है कि आपको सार्वजनिक पद मिल गया है तब आप यह मान लें कि जनता ने आपमें भरोसा जताया है. क्या आप इस पद पर बने रहें और कुछ भी न करें? और आप कुछ करें, तो वह क्या हो?

दिल्ली भाजपा की पहुंच से बाहर है, रमेश बिधूड़ी की ‘महिला विरोधी’ टिप्पणी ने इसे और दूर कर दिया

यह पहली बार नहीं है जब बिधूड़ी ने इस तरह की विवादित बयानबाजी की है. कांग्रेस नेता दानिश अली के खिलाफ उनकी टिप्पणियों के कारण उन्हें 2024 में लोकसभा टिकट से हाथ धोना पड़ा था.

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तालिबान, TTP और बलूच चुनौती: रणनीतिक भूल की कीमत, पाकिस्तान दो तरफ से घिरा

पाकिस्तान का सियासी नेतृत्व कमजोर और कमअक्ल दिखता है. उसकी कूटनीति पूरी तरह भारत-चीन-अमेरिका केंद्रित है और वह अफगानिस्तान को अपना गुलाम मानता रहा है.

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उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाये: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 28 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि होली, रमजान, ईद समेत आगामी पर्वों...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.