मोदी सरकार के वास्तविक नकारात्मक पहलू अर्थव्यवस्था के सम्बन्ध में नहीं हैं बल्कि प्रमुख संस्थानों को कमजोर करने के साथ सामाजिक ताने बाने को हानि पहुचाने के सम्बन्ध में हैं।
वह ध्रुवीकरण करने वाले हमारे सबसे बड़े नेता हैं, जिनसे बहुत लोग तहेदिल से घृणा करते हैं लेकिन वह समान रूप से इससे कहीं ज्यादा लोगों से प्रेम भी पाते हैं, विशेष रूप से युवाओं से। गुजरात और कर्नाटक में भाजपा का संघर्ष 2019 में भी जारी रहेगा यह सोचना घातक रूप से असावधानीपूर्ण है।
स्वतंत्र भारत में बार-बार राज्यपालों द्वारा निभाई गई भूमिका के कारण अदालत और सरकार द्वारा नियुक्त आयोगों ने उनको प्रतिकूल टिप्पणीयां दी है।
राज्यपालों...
इससे फर्क नहीं पड़ेगा कि ट्विटर पर नरेन्द्र मोदी के पास राहुल गांधी के मुकाबले कितने अधिक फालोअर्स हैं. फर्क केवल इससे पड़ेगा कि लोकसभा में किसने कितनी सीटें जीतीं.
शहरी भारत आज जातिवाद खत्म होने के दौर में नहीं है, बल्कि ऐसा दौर है जहां लोग जातिवाद मानना नहीं चाहते. वे ऊंच-नीच के फायदे तो चाहते हैं, लेकिन इसे मानने में शर्म महसूस करते हैं.