scorecardresearch
Monday, 2 February, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

मिडिल-क्लास को उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने वाला बजट मिला है, मोदी उनकी नब्ज़ जानते हैं

केंद्रीय बजट 2025-26 के स्पष्ट लक्ष्य हैं: विकास को गति देना, भारत के उभरते मिडिल-क्लास की खर्च करने की क्षमता को बढ़ाना, प्राइवेट सेक्टर के निवेश को बढ़ावा देना और घरेलू भावनाओं को ऊपर उठाना.

रूस-यूक्रेन युद्ध आधुनिक युद्धशैली का बेहतरीन उदाहरण है

आर्थिक प्रतिबंधों ने रूस को चोट तो ज़रूर पहुंचाई, मगर ऐसे दंड को बेअसर करने का रास्ता ढूंढने में सक्षम विशाल एवं संसाधनों से समृद्ध देश पर बदलाव थोपने के मामले में ऐसे प्रतिबंधों की सीमा भी उजागर हो गई.

गंदगी के लिए सिर्फ सरकार को दोष मत दीजिए, नागरिकता की भावना कानून से नहीं जगाई जा सकती

यह समस्या केवल भारत में सीमित नहीं है, उन देशों में भी है जहां भारतीय लोग जा बसे हैं. लंदन में गुटके की थूकों के चारों तरफ फैले दाग से छुटकारा पाने के लिए अधिकारियों को पूरे इलाकों में नई रंगाई-पुताई करवानी पड़ी.

तेलंगाना जाति सर्वेक्षण के नतीजे राहुल गांधी के लिए एक मौका और जाल दोनों हैं

रेवंत रेड्डी अपने कर्नाटक समकक्ष सिद्धारमैया के विपरीत, जो इस रिपोर्ट को करीब एक दशक से दबाए बैठे हैं, अपनी बात पर अमल कर रहे हैं.

मोदी 3.0 के बजट से जुड़ी है समाजवादी पहचान की सुर्खी और उसके नीचे दबी है परमाणु संधि की आहट

इस बजट की सुर्खी बनने लायक एकमात्र बात मिडिल-क्लास को इनकम टैक्स में दी गई राहत है और सबसे साहसिक और सकारात्मक पहलू है परमाणु ऊर्जा एक्ट और ‘सिविल लायबिलिटी ऑन न्यूक्लियर डैमेज एक्ट’ में संशोधन का इरादा.

मैं मूर्ति-सुब्रह्मण्यम से सहमत हूं: कामयाबी 9-5 से परे है, लेकिन लंबी शिफ्ट के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता

कॉर्पोरेट वालों की मलामत करना आसान है. लेकिन अपने उद्यमियों, संपदा और रोजगार पैदा करने वालों को प्यार और सम्मान न देने वाला समाज निम्न-मध्यवर्गीय आय के खांचे में ही अटके रहने को अभिशप्त होता है.

महाकुंभ मेला भारत के बारे में है सिर्फ हिंदुओं के बारे में नहीं, अपनी जड़ों को मत भूलिए

कुंभ मेले का राजनीतिकरण तो समझ में आता है, लेकिन जिस बात ने मेरा ध्यान खींचा, वह है आधुनिक भारतीयों द्वारा इसकी आलोचना.

क्या हम सच में चीन का विकल्प बन सकते हैं? मोदी का 2014 का भारत को महान बनाने का वादा बिखर चुका है

एक समय था जब भारतीय लोग तकनीक के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी होने का सपना देखते थे. अब, चीनी इतने आगे हैं कि वे हमें प्रतिस्पर्धी भी नहीं मानते. यह उनके और अमेरिका के बीच की बात है.

सब्यसाची हमें सीखा रहे हैं : अगर मैं बतौर गरीब बंगाली यह कर सकता हूं, तो सोचिए भारत क्या कर सकता है

जिस तरह से कपड़ों ने वैश्विक बाजार को देखा, उससे यह पता चलता है कि सब्यसाची की नजर “अगले 25 वर्षों” पर है.

भारतीय पायलटों की ज़िंदगी: थकान, तनाव और कम आय ने बढ़ाई मुश्किलें

जहां विदेशी पायलटों को काफी अधिक वेतन पर रखा जाता है, वहीं भारतीय पायलटों के वेतन पिछले एक दशक से स्थिर हैं, और कोविड-19 महामारी के बाद भत्तों में भी कटौती की गई है.

मत-विमत

वीडियो

राजनीति

देश

उप्र: फ्लैट में मृत मिला इंटीरियर डिजाइनर, पुलिस को आत्महत्या का शक

लखनऊ, दो फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 30 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अपने किराए के फ्लैट में मृत पाया गया। पुलिस ने सोमवार...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.