सैनिकों के साथ अक्खड़ पुलिसवालों की ज्यादतियों के बढ़ते मामलों से इसका मनोबल प्रभावित हो रहा है क्योंकि यह उनके सब्र के इम्तेहान जैसा है. संभलना होगा, स्थिति कभी भी बेकाबू हो सकती है.
1995 के अधिनियम की धारा 40 को हटाने और लंबे समय से चले आ रहे ‘एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ’ नियम को बदलने से भारतीय और इस्लामी वक्फ प्रणालियों के बीच की खाई और गहरी हो सकती है.
यह मनोज कुमार पर स्मृतिलेख नहीं है बल्कि यह बताने की कोशिश है कि उन्होंने 1962 में चीन के साथ लड़ाई से लेकर 1975 में इमरजेंसी तक के हमारे सबसे संकटग्रस्त दौर में भारतीयों की दो पीढ़ियों के लिए देशभक्ति को परिभाषित करने में क्या भूमिका निभाई.
धारा 40 के तहत, वक्फ बोर्ड के पास यह निर्धारित करने के लिए स्वप्रेरणा से जांच शुरू करने का अधिकार है कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं — यह एक अनूठी शक्ति है.
मोदी ट्रंप के शब्दों और कार्यों से अपनी सार्वजनिक छवि को धूमिल नहीं होने दे सकते. राजनीति को अलग रखें तो अमेरिकी राष्ट्रपति की मांगों पर सहमत होने का मतलब होगा ठेंगड़ी के विचारों को नकारना.
केवाईसी का काम तीसरे पक्ष से करवाना भी एक मसला है, क्योंकि वे बिना सोचे-समझे ग्राहकों से दस्तावेज़ मांगने के संदेशों की बमबारी करने के लिए जाने जाते हैं.
भारत को क्षेत्रीय मसलों के सैन्य समाधान के लालच से बचना ही होगा. अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए इसकी जगह उसे आर्थिक समझौतों, कूटनीतिक प्रयासों और अपने ‘सॉफ्ट पावर’ का उपयोग करना चाहिए.
राजनीतिक नेतृत्व ने 1971 की तरह 2020 में भी सैन्य मामलों में दखल न देकर सही राजनीतिक निर्देश जारी किया, और रक्षा मंत्री ने सेना अध्यक्ष को सलाह दी कि 'जो उचित समझो वो करो.'