हल्दिया से रवाना जहाज़ बनारस पहुंचने तक चार बार रुका, क्योंकि गंगा में पानी कम था. आनन-फानन में पानी भरकर माहौल बनाया गया लेकिन असल सवाल है कि गंगा में पानी कैसे आएगा.
‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ का विचार लगभग तीन दशकों से भारतीय राजनीति पर छाया हुआ है. दिलचस्प बात यह है कि ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ के जुमले को किसी ने अभी तक परिभाषित नहीं किया है.
यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.