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Thursday, 22 January, 2026
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मत-विमत

‘आज़ादी कह रहे हैं, आज़ादी बोल रहे हैं और साथ में मस्ती के लिए पत्थर फ़ेंक रहे हैं!’

मीडिया कश्मीर के जख्मी लोगों की तस्वीर तो दिखाता है लेकिन फूटे सर वाले पुलिसकर्मी, टूटे कंधों वाले जवान और लंगड़ाते सुरक्षाबलों को नज़रंदाज़ कर जाता है.

इतना हंगामा क्यों है भाई, नसीरुद्दीन शाह ने सच ही तो बयान किया है

मोहल्लों की दुनिया बदल रही है. जहां सब बच्चे आपस में मिल-जुलकर खेलते थे, गलबहियां करते थे, आज उनमें दूरियां बढ़ती जा रही हैं.

क्या नरेंद्र मोदी और कोई चमत्कार दिखा सकते हैं?

लोगों को चौंकाना मोदी सरकार की सनक है. यह पूर्वाभासी नहीं दिखना चाहती.

मणिकर्णिका में कंगना का किरदार मोदी के न्यू इंडिया की ‘भारत माता’ जैसा है

मणिकर्णिका ट्रेलर में, जब खून से लथपथ चेहरे वाली कंगना रनौत हर-हर महादेव का जयकारा लगाती हैं, कोई यह सोच सकता है कि बस बाबरी मस्जिद गिरने वाली है.

महागठबंधन एक भीड़ भरी ट्रेन है, जिसमें पासवान के लिए जगह नहीं है

रामविलास पासवान के कदमों से लगता है कि वे अपने विकल्प खुले रखना चाहते हैं. लेकिन क्या उनके सामने मौजूद दूसरे विकल्प के दरवाजे उनके लिए खुलेंगे?

मौत से न डरने वाले युवा कश्मीर में सबसे बड़ी चुनौती हैं

बेशक, जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा रहेगा. पर सवाल ये है कि क्या हम वहां की आबादी की परवाह किए बिना नियंत्रण में रखने को लेकर निश्चिंत हो गए हैं?

शाकाहारियों की सरकार आपको शाकाहारी बनाना चाहती है!

भारत के 70% से ज्यादा लोग मांसाहारी हैं, लेकिन सरकार उन्हें शाकाहारी बनाने पर तुली हुई है! बीजेपी सरकारें मिड-डे मील में अंडा देने से बचती हैं और स्वास्थ्य मंत्रालय बताता है कि मांसाहार सेहत के लिए ठीक नहीं है!

आहत हिन्दू मन और मोदी

मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर उभारने में ऐसे अनेक हिन्दूवादियों की भूमिका रही है, जो उनके भीतर हिन्दुत्व का नया नायक खोज रहे थे. ऐसे लोग अब क्या सोच रहे हैं?

देश के किसान क्यों हैं कर्जमुक्ति के हकदार ?

कर्जमाफी और कर्जमुक्ति में अन्तर करने की जरूरत है. राजनीतिक दल और सरकारें कर्जमाफी की बात करती हैं जबकि किसान-आंदोलन का प्रस्ताव कर्ज से मुक्ति का है.

उच्च जातियों के अमीर होते चले जाने की वजहें

आरक्षण के बावजूद नहीं घट रहा है ऊंची और नीची जातियों के बीच अमीरी का फासला. सामाजिक असमानता दूर करने के लिए सरकार को करना होगा हस्तक्षेप.

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मौनी अमावस्या और पीएम मोदी—भारत की सोची-समझी चुप्पी के क्या मायने हैं

वैश्विक शोर-शराबे के माहौल में भारत का प्रतीकात्मक ‘मौनव्रत’ कूटनीति का सबसे प्रभावी साधन है. यह नई दिल्ली की रणनीतिक अस्पष्टता को बनाए रखता है.

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पिता को जिला परिषद का टिकट न मिलने से नाराज व्यक्ति ने राकांपा विधायक के कार्यालय के बाहर पेशाब किया

लातूर (महाराष्ट्र), 21 जनवरी (भाषा) लातूर जिले में बुधवार को एक व्यक्ति ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद (जेडपी) चुनावों के लिए अपने...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.