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Wednesday, 25 March, 2026
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नरेंद्र मोदी ने रणनीति के जरिये तैयार किया है अपना मतदाता वर्ग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया, विज्ञापन और प्रचार की बदौलत मतदाताओं को दो वर्गों में बांट कर एक को अपने हिस्से में पूरी तरह आरक्षित कर लिया है.

देश के राजनीतिक विमर्श को इतना अश्लील तो मत बनाइये!

विरोधी दलों की महिला नेताओं पर सामंतों जैसी ओछी टिप्पणियों में शालीन होने की कौन कहे, शालीन दिखने की भी परवाह नहीं कर रहे नेता.

कांग्रेस-मुक्त भारत की प्रक्रिया 2019 में क्यों तेज़ हो सकती है

मुख्य मुकाबले वाली अपनी सीटों पर कांग्रेस चाहे जितना बढ़िया प्रदर्शन करे, वैसी सीटों की संख्या बढ़ रही है जहां कि पार्टी मुकाबले में नहीं है.

ममता और नरेंद्र मोदी से बहुत बड़ा है भारत देश और संविधान

अगर हम ये मान भी लें कि केंद्र सरकार की चिंता चिट फंड घोटाले के आरोपियों को सजा दिलाना है तो भी ये लड़ाई देश के संवैधानिक ढांचे के अंदर ही होनी चाहिए.

दुनिया के हर विषय पर फाइनल बात बोलने के लिए कितनी पढ़ाई की आवश्यकता है?

जग्गी वासुदेव ऐसे योगी हैं जिनका इंटरव्यू बड़े फिल्मी जगत के लोगों ने लिया है जिनमें कंगना रनौत, करण जोहर, अनुपम खेर जैसे शामिल हैं.

मणिकर्णिका के जरिए ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना

1857 के विद्रोह में मुगल बादशाह के खेमे में झांसी की रानी व कुछ राजा थे. वहीं देश की 500 से ज्यादा रियासतें या तो अंग्रेजों के साथ थीं, या इस युद्ध से अलग रहीं. लेकिन उनमें सिर्फ मराठा शासक सिंधिया को क्यों अंग्रेजों के मित्र के रूप में स्थापित किया जाता है?

राहुल गांधी ओबीसी पॉलिटिक्स करेंगे तो अखिलेश यादव क्या करेंगे?

ओबीसी समुदाय के हर हाल में साथ रहने के प्रति आश्वस्त समाजवादी पार्टी को ये आभास नहीं है कि ओबीसी का एक बड़ा तबका बीजेपी के साथ जा चुका है.

बंजारे महज हाथ के बने सामान ही नहीं, विचार और परंपरा को भी साथ लाते हैं

हमारी सभ्यता को बनाने में उसे निरन्तरता देने में जो योगदान बंजारा समाज का है शायद ही इतिहास में किसी अन्य समाज का रहा हो.

चौरी-चौरा: एक बहुजन बगावत, जिससे गांधी घबरा उठे थे!

चौरी-चौरा गरीबों और निम्नवर्णीय किसानों-मजदूरों का विद्रोह था, जिसके निशाने पर अंग्रेज बेशक थे, लेकिन ये विद्रोह गांधी और कांग्रेस की जमींदारपरस्त नीतियों के खिलाफ भी था.

मीडिया मुगल सुभाष चंद्रा की विवादास्पद और दिलचस्प ज़िंदगी पर एक नज़र

ज़ी के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने पहले भी मुश्किलों का सामना किया है. इस बार उनके लिए मुसीबत ऐसे समय आई जब वह ज़ी टीवी में अपनी हिस्सेदारी का 50 फीसदी अंश बेचने के लिए प्रयासरत हैं.

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भूमि अधिग्रहण के मामले में मुआवजे, ब्याज की राशि वित्तीय बोझ की मात्रा पर निर्भर नहीं हो सकती:अदालत

नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) उचित मुआवजे की संवैधानिक गारंटी को कमजोर नहीं किये जा सकने पर जोर देते हुए उच्चतम न्यायालय ने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.