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Saturday, 3 January, 2026
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शादी के कार्ड पर गणेश और बाबा साहेब के साथ-साथ होने का मतलब

आंबेडकरवादी विचारों से प्रेरित परिवारों की शादियों में कर्मकांडों और पुरोहितों का निषेध किया जा रहा है. लेकिन कुछ शादियों में सनातन और आंबेडकरवाद के बीच का द्वंद्व भी दिखता है, जहां दोनो पद्धतियां साथ-साथ चल रही हैं.

आखिर बंगाल क्यों बन गया भाजपा के लिए नाक का सवाल

आखिर क्या कारण है कि तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल में भाजपा को इतनी रुचि है और क्यों ममता भाजपा को बंगाल से दूर रखना चाह रही है.

भारतीय बाज़ार के लिए मुकेश अंबानी और जेफ़ बेज़ोस के बीच भिड़ंत तय थी

मोदी सरकार अमेज़ॉन के सीईओ जेफ़ बेज़ोस का एक हाथ पीछे बांध कर अंबानी से भिड़ने के लिए बाध्य कर रही है.

कांग्रेस के 2019 के घोषणापत्र में होगा 52% ओबीसी कोटे का वादा?

नरेंद्र मोदी द्वारा खुद को पिछड़ा घोषित करने, चुनाव लड़ने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में ओबीसी का महत्व बढ़ रहा है. 52 फीसदी ओबीसी आबादी को अपने पाले में लाने के लिए कांग्रेस अपने घोषणापत्र में कई धमाकेदार घोषणाएं करने जा रही है.

‘मीडिया लीक’ लोकतंत्र के लिए उतनी बुरी बात भी नहीं है!

संवेदनशील मामलों को छोड़ अगर सरकारी फैसलों की जानकारी पहले हो जाए, तो इससे बहस की परंपरा मज़बूत होगी. इसे प्रोत्साहित करना चाहिए.

बीजेपी सांसद बंद कमरों में नरेंद्र मोदी और चुनाव को लेकर क्या अटकलें लगा रहे हैं

मोदी समर्थक अब भी आश्वस्त हैं कि वे ही 2024 तक प्रधानमंत्री बने रहेंगे और आलोचकों को मतदाता कड़ा जवाब देंगे. लेकिन ज्योतिषों में आम सहमति नहीं बन पा रही है.

जदयू में प्रशांत किशोर को नंबर दो बनाने के पीछे ये थी नीतीश की विवशता!

भले ही नीतीश कुमार कहते हों कि प्रशांत किशोर ने पार्टी के लिए काम किया है, वह उनसे व्यक्तिगत रूप से बहुत स्नेह रखते हैं. हमने जिम्मेदारी दी है कि आप नई पीढ़ी के लोगों को राजनीति की तरफ प्रेरित कीजिये.’

आर्थिक मामलों में सरदार पटेल के विचारों से उल्टी चल रही है मोदी सरकार

स्वतंत्रता आंदोलन के नेता देश में मिली-जुली अर्थव्यवस्था चाहते थे, जहां मज़बूत सरकारी क्षेत्र के ज़रिए रोज़गार सृजन और लोक कल्याण के काम हों.

1993 में सपा-बसपा से मजबूत थी भाजपा, इस बार हवा में उड़ेंगे ‘जय श्रीराम’!

सपा और बसपा 1993 में छोटी पार्टियां थीं और उनका कोई बौद्धिक आधार भी नहीं था. 2019 में हालात बदल चुके हैं और भाजपा यूपी में बड़ी हार की ओर बढ़ रही है.

गरीब और अमीर राज्यों के बीच की खाई कम क्यों नहीं हो रही है?

केंद्र से मिलने वाले कोश से यह विषमता थोड़ी ही दूर होती है, मिटती नहीं. केंद्र से मध्य प्रदेश को कर्नाटक की तुलना में दो तिहाई ज्यादा कोश मिलता है, और बिहार को तेलुगुभाषी राज्यों की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा.

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प्रसव के लिए सुदूर गढ़चिरौली गांव से छह किलोमीटर पैदल चलकर आई गर्भवती महिला की मौत

गढ़चिरौली, दो जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्य सड़क से कटे गांव में प्रसव सुविधा नहीं मिलने पर छह किलोमीटर पैदल चलने के...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.