‘तीसरे मोर्चे’ के प्रधानमंत्री के चयन के तरीके पर गौर करने से स्पष्ट हो जाता है कि क्यों मायावती के चुने जाने की कोई संभावना नहीं है. मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की चर्चा से सिर्फ भाजपा को ही फायदा होगा.
राहुल गांधी के न्यूनतम आय गारंटी का प्रस्ताव कितना कारगर है और इसे कैसे लागू किया जाय उस पर चाहे चर्चा हो, पर एक बात तय है कि इस बार का चुनाव आर्थिक मुद्दों पर लड़ा जायेगा.
‘नाइन ऑवर्स टू रामा’ सेंसरशिप से हमारे जटिल संबंधों को दर्शाता है. भारत में प्रतिबंध लगाए जाने के 57 वर्ष बाद आज भी सेंसरशिप का वो प्रकरण प्रासंगिक बना हुआ है.
रोहित शर्मा के बारे में हर कोई ये कहता है कि उनके लिए चुनौती शुरुआत के 20-25 रन हैं. 20-25 का आंकड़ा पार करने के बाद उनकी बल्लेबाजी का अंदाज बदल जाता है.
पादरी से रक्षा मंत्री बनने तक के सफर में जॉर्ज फर्नांडिस विरोधाभासों से भरे थे. समाजवादी नेता जोकि परमाणु बम के खिलाफ थे बाद में पोखरण II में शामिल रहे.
इन महत्वपूर्ण फैसलों से दलितों के दो सबसे अहम मुद्दे प्रभावित हुए: अत्याचारों से सुरक्षा व पर्याप्त प्रतिनिधित्व. ये दलितों से संविधान में किए वादे के केंद्र में हैं.
बड़ा सवाल यह है कि नितिन नबीन RSS के साथ कितनी सक्रियता से जुड़ेंगे. संघ को उनका नाम एक तय फैसले के तौर पर बताया गया—पुष्टि के लिए नहीं, सिर्फ जानकारी के लिए.