भीमा-कोरेगांव की 200वीं वर्षगांठ पर जिन्होंने कहा कि महार सैनिकों ने अंग्रेजों के पक्ष में लड़ाई की थी, वही सारागढ़ी में सिख सैनिकों की बहादुरी को सलाम करते हैं.
आखिर क्या कारण है कि जिस नरेन्द्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने की बात जोर-शोर से हो रही है उनकी पार्टी बीजेपी अपनी जीती हुई सीटों पर चुनाव नहीं लड़ पा रही है?
यह समझने की जरूरत है कि आदिवासी इलाकों की राजनीति के मुद्दे देश के अन्य इलाकों से भिन्न होते हैं. आदिवासी राजनीतिक से ज्यादा, अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.
कांग्रेस के पास सवाल तो हैं, मगर सवालों के जवाब नहीं हैं, 'नेता' हैं मगर विजेता नहीं हैं. चुनाव के चंद सप्ताह पहले वह एक सदाचारी, व्यवस्था विरोधी एनजीओ की तरह पेश आ रही है, जो बस अपना फर्ज़ निभाने से मतलब रखता है.