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Saturday, 24 January, 2026
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मत-विमत

क्या होता अगर एक दलित ‘राग दरबारी’ लिखता?

राग दरबारी पढ़ते हुए छुआछूत के प्रति जुगुप्सा नहीं होती, हंसी आती है. पर मुर्दहिया का उद्धरण पढ़ कर क्रोध और ग्लानि होती है.

‘हल’ और ‘क़लम दवात’ के बीच ‘सेब’ कैसे बदलेगा कश्मीर की राजनीति

सज्जाद लोन इन दिनों अपनी पार्टी को नए रूप व नई ताक़त से सक्रिय करने में जुटे हुए हैं. हर दिन कोई न कोई बड़ा नेता उनके दल में शामिल हो रहा है.

सोशल मीडिया पर आते ही छा गईं बहन जी

मायावती का ट्विटर पर आना सोशल मीडिया की बेहद शानदार खबर है. इससे बीएसपी को तो फायदा होगा ही, सोशल मीडिया की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी.

नरेंद्र मोदी ने रणनीति के जरिये तैयार किया है अपना मतदाता वर्ग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया, विज्ञापन और प्रचार की बदौलत मतदाताओं को दो वर्गों में बांट कर एक को अपने हिस्से में पूरी तरह आरक्षित कर लिया है.

देश के राजनीतिक विमर्श को इतना अश्लील तो मत बनाइये!

विरोधी दलों की महिला नेताओं पर सामंतों जैसी ओछी टिप्पणियों में शालीन होने की कौन कहे, शालीन दिखने की भी परवाह नहीं कर रहे नेता.

कांग्रेस-मुक्त भारत की प्रक्रिया 2019 में क्यों तेज़ हो सकती है

मुख्य मुकाबले वाली अपनी सीटों पर कांग्रेस चाहे जितना बढ़िया प्रदर्शन करे, वैसी सीटों की संख्या बढ़ रही है जहां कि पार्टी मुकाबले में नहीं है.

ममता और नरेंद्र मोदी से बहुत बड़ा है भारत देश और संविधान

अगर हम ये मान भी लें कि केंद्र सरकार की चिंता चिट फंड घोटाले के आरोपियों को सजा दिलाना है तो भी ये लड़ाई देश के संवैधानिक ढांचे के अंदर ही होनी चाहिए.

दुनिया के हर विषय पर फाइनल बात बोलने के लिए कितनी पढ़ाई की आवश्यकता है?

जग्गी वासुदेव ऐसे योगी हैं जिनका इंटरव्यू बड़े फिल्मी जगत के लोगों ने लिया है जिनमें कंगना रनौत, करण जोहर, अनुपम खेर जैसे शामिल हैं.

मणिकर्णिका के जरिए ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना

1857 के विद्रोह में मुगल बादशाह के खेमे में झांसी की रानी व कुछ राजा थे. वहीं देश की 500 से ज्यादा रियासतें या तो अंग्रेजों के साथ थीं, या इस युद्ध से अलग रहीं. लेकिन उनमें सिर्फ मराठा शासक सिंधिया को क्यों अंग्रेजों के मित्र के रूप में स्थापित किया जाता है?

राहुल गांधी ओबीसी पॉलिटिक्स करेंगे तो अखिलेश यादव क्या करेंगे?

ओबीसी समुदाय के हर हाल में साथ रहने के प्रति आश्वस्त समाजवादी पार्टी को ये आभास नहीं है कि ओबीसी का एक बड़ा तबका बीजेपी के साथ जा चुका है.

मत-विमत

देश के 300 से ज्यादा श्रम कानून व्यवस्था को जटिल बनाते थे. नए चार लेबर कोड इसे आसान बनाते हैं

बदलते लेबर मार्केट में आने वाले युवा वर्कफोर्स को ऐसे नियमों की ज़रूरत है जो मोबिलिटी, स्किल ट्रांज़िशन और काम के नए तरीकों को पहचानें. पुराने इंडस्ट्रियल मॉडल पर आधारित कानून इस भविष्य के लिए काम नहीं आ सकते.

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राजनीति

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प्रधानमंत्री मोदी ने कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी

नयी दिल्ली, जनवरी 24 (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर उन्हें शनिवार को श्रद्धांजलि दी। मोदी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.