अगर कोई ताकतवर समूह सुनियोजित और योजनाबद्ध हमला कर किसी खास वंचित सामाजिक समूह के दर्जनों लोगों को मार डालता है, तो क्या उसे आतंकी घटना नहीं कहा जाना चाहिए?
कांग्रेस को ये समझने की जरूरत है कि एक साथ एससी, एसटी और ओबीसी की विशाल आबादी के साथ वह कट्टर सवर्ण आबादी को नहीं साध सकती. बीच में फंसने का भारी खतरा है.
राहुल गांधी ने पांच मुख्य बिन्दु गिनाये हैं जिसमें गरीबी, कृषि-संकट, बेरोजगारी, स्वास्थ्य तथा भय का चौतरफा माहौल ऐसे मुद्दे हैं, जिससे राष्ट्र को निपटना है.
जम्मू में भाजपा अपने ही नेता लाल सिंह की बगावत को लेकर दुविधा में है. वे अपनी अलग पार्टी बना चुके है पर उन्होंने अभी तक पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है और पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.
वैसे तो प्रतिमाह 6,000 रुपए आय गारंटी की कांग्रेस की योजना महत्वाकांक्षी है, पर सर्वाधिक 20 प्रतिशत गरीब परिवार कैसे चिन्हित हों इसको लेकर स्पष्टता नहीं है.
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.