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Saturday, 21 March, 2026
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मत-विमत

धोनी, विराट, अश्विन, कार्तिक जैसे खिलाड़ी क्यों लांघते हैं मर्यादा की लक्ष्मण रेखा?

जिन खिलाड़ियों की वजह से ये चर्चा हो रही है वो सब के सब भारतीय हैं. सब के सब अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में लंबा अनुभव रखते हैं.

मोदी शाह के ज़हर की काट है ममता बनर्जी का ज़हर

स्ट्रीट-फाइटर मोदी-शाह की जोड़ी हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के जिस जहर को अपने ब्रह्मास्त्र के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं उस जहर को पश्चिम बंगाल में काटने में जुटी हैं ममता बनर्जी.

मी लॉर्ड, एससी-एसटी एक्ट चाहिए क्योंकि समानता असमान लोगों के बीच नहीं होती!

एससी-एसटी एक्ट को लेकर फिर से सवाल उठ रहे हैं और ये सवाल किसी संगठन ने नहीं, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने उठाए हैं. इसके लिए वे समानता के सिद्धांत का हवाला दे रहे हैं, जबकि समानता का सिद्धांत ये नहीं कहता कि नागरिकों के बीच अंतर नहीं है.

ईरान को झुकाने की कड़ी में लगाए गए प्रतिबंध और भारत का हित

ईरान पर जो प्रतिबंध अमेरिका ने लगाए हैं उसके दायरे में भारत भी आ गया है. इससे भारतीय नागरिकों की ज़िंदगी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि पाबंदी की वजह से पेट्रोल-डीज़ल महंगा हो जाएगा.

मसूद अज़हर मामले में संयुक्तराष्ट्र में भारत की जीत से मोदी की छवि काफी मज़बूत हुई है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने चुनावी भाषण में इस कूटनीतिक जीत का श्रेय लेने में कोई देरी नहीं की.

पार्टियां और प्रत्याशी तो नतीजे आने पर जीते-हारेंगे, चुनाव आयोग पहले ही हार गया है!

चुनाव आयोग का मोदी जी का साथ न सिर्फ इस चुनाव की बल्कि भविष्य के चुनावों की निष्पक्षता का भी जो रूप गढ़ेगा, वह कितना कुरूप होगा?

मोदी सरकार अज़हर पर चीन के यू-टर्न का श्रेय लेने की हकदार है, लेकिन चीन-पाक संबंध प्रभावित नहीं होंगे

चीन को जितनी चिंता पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को लेकर है, उससे कहीं ज़्यादा वह 62 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर चिंतित है.

भाजपा को देश के लिए खतरा मानना और चुनाव में नोटा चुनने में कोई विरोधाभास नहीं

विकल्प के सामने होने तक ‘ना’ कहने का एक सीमित और एकदम आखिर में अपनाया जाने वाला उपाय है नोटा.

देश में प्रधानमंत्रियों को उनके चुनाव क्षेत्र में ही घेर लेने की समृद्ध परम्परा रही है

प्रधानमंत्री को उनके ही क्षेत्र में घेरने की विपक्ष की समृद्ध परंपरा को भले ही कांग्रेस पार्टी और दूसरे दलों के नेताओं ने न अपनाया हो लेकिन तेज बहादुर ने कड़ी चुनौती दी है.

लोकसभा में दलितों की दमदार आवाज क्यों सुनाई नहीं देती?

देश की 16.6 फीसदी आबादी दलितों की हैं और उनकी आबादी 20 करोड़ से ज़्यादा है. इतनी बड़ी आबादी की आवाज़ अगर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में दमदारी से नहीं उठती, तो ये एक गंभीर मसला है.

मत-विमत

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

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न्यायालय ने पुलिस के ऑनलाइन वीडियो अपलोड करने पर चिंता जताई, कहा-निष्पक्ष मुकदमे के लिए खतरा

नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मोबाइल फोन पर बनाए गए वीडियो को तुरंत सोशल मीडिया पर अपलोड करने के चलन पर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.