स्ट्रीट-फाइटर मोदी-शाह की जोड़ी हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के जिस जहर को अपने ब्रह्मास्त्र के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं उस जहर को पश्चिम बंगाल में काटने में जुटी हैं ममता बनर्जी.
एससी-एसटी एक्ट को लेकर फिर से सवाल उठ रहे हैं और ये सवाल किसी संगठन ने नहीं, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने उठाए हैं. इसके लिए वे समानता के सिद्धांत का हवाला दे रहे हैं, जबकि समानता का सिद्धांत ये नहीं कहता कि नागरिकों के बीच अंतर नहीं है.
ईरान पर जो प्रतिबंध अमेरिका ने लगाए हैं उसके दायरे में भारत भी आ गया है. इससे भारतीय नागरिकों की ज़िंदगी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि पाबंदी की वजह से पेट्रोल-डीज़ल महंगा हो जाएगा.
प्रधानमंत्री को उनके ही क्षेत्र में घेरने की विपक्ष की समृद्ध परंपरा को भले ही कांग्रेस पार्टी और दूसरे दलों के नेताओं ने न अपनाया हो लेकिन तेज बहादुर ने कड़ी चुनौती दी है.
देश की 16.6 फीसदी आबादी दलितों की हैं और उनकी आबादी 20 करोड़ से ज़्यादा है. इतनी बड़ी आबादी की आवाज़ अगर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में दमदारी से नहीं उठती, तो ये एक गंभीर मसला है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.