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Friday, 6 February, 2026
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क्यों मीडिया की ग्राउंड रिपोर्ट, ओपिनियन और एग्ज़िट पोल चुनाव को लेकर एक मत नहीं हैं

समाचार रिपोर्ट राजनीतिक रणनीति और स्थानीय मुद्दों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ये सीटों की टैली को बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं करते हैं.

यूपी में ‘आएगा तो मोदी ही’ की गूंज के बीच अब…’आएगा तो गठबंधन ही’!

लोकसभा चुनाव अभी समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन उनके बाद की राजनीतिक संभावनाओं की तलाश शुरू हो गई है. इस क्रम में देश के...

एक खामोश क्रांति: लाखों युवक अब नौकरी नहीं, कारोबार करने की जुगत में हैं

यह लगातार तीसरा वर्ष है जब सरकार ने मुद्रा योजना के तहत अपना कोई काम-धंधा शुरू करने वालों को जितना लोन देने का मन बनाया था, उसमें वह सफल रही है.

पूना पैक्ट की कमजोर और गूंगी संतानें हैं लोकसभा के दलित सांसद

अगली लोकसभा में, देश की 16.6 फीसदी यानी 20 करोड़ दलित आबादी की कोई मुखर व जानी-पहचानी आवाज नहीं होगी. डॉ. आंबेडकर को पता था कि ऐसा होने वाला है.

सवर्णों ने जातियां बनाई और अब वे जाति-विरोधी आंदोलनों के नेता भी बनना चाहते हैं!

कन्हैया कुमार पर प्रोफेसर अपूर्वानंद की टिप्पणी और सामाजिक न्याय के विभ्रम और सच को उधेड़ता ये लेख उन सवालों से टकरा रहा है, जो भारतीय समाज में सुधार आंदोलनों की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हैं.

उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़, हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा

शायर अमीर कजलबाश को ये लिखते समय अंदाजा नहीं रहा होगा की ये शेर आगे जाकर भारतीय न्यायपालिका की दास्तां बयां करेगा. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पर लगे विवादों को सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह हल किया, उसने एक बड़े विवाद को जन्म दिया है.

उमर खालिद का सवाल, आतिशी क्या आप भी मुसलमानों को मात्र एक डरा हुआ वोटबैंक मानती हैं

पिछले छह वर्षों के दौरान आम आदमी पार्टी के उभार ने दिल्ली के लोगों के दिलों में काफी उम्मीदें और आकांक्षाएं जगाई थी.

कुंडा के भाषण में अखिलेश यादव ने दिखाया खांटी समाजवादी तेवर

उत्तर प्रदेश में सामंतवाद के गढ़ प्रतापगढ़ में अखिलेश यादव ने ‘राजशाही’ को चुनौती दी और तमाम जातियों को अधिकार देने की बात कही. लेकिन क्या उनके बदले तेवर का लाभ समाजवादी पार्टी को होगा?

नवोदय स्कूल के एक पूर्व विद्यार्थी का प्रधानमंत्री के नाम पत्र

नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भ्रष्टाचार के प्रतीक के तौर पर पेश किया. लेकिन किसी के भी जीवन को समग्रता में देखा जाना चाहिए और इस क्रम में राजीव गांधी की स्कूल शिक्षा नीति को भी याद किया जाना चाहिए.

पसमांदा आंदोलन के नारे ‘हिंदू हो या मुसलमान पिछड़ा-पिछड़ा एक समान’ से बदलेगी देश की राजनीति

भारतीय लोकतंत्र और पसमांदा मुसलमानों की नुमाइंदगी का प्रश्न अब सतह पर है. अगर लोकतंत्र को पूरी आबादी तक ले जाना है, तो ऐसे सवालों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए.

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आतिशी वीडियो विवाद: दिल्ली विधानसभा ने पंजाब के डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी के कथित रूप से ‘छेड़छाड़’ करके...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.