यकीनन यह मोदी का करिश्मा ही है कि जो विश्लेषक उनका मजाक उड़ाते हुए इस चुनाव में उनकी सरकार के पक्ष में अंडरकरेंट अथवा प्रो-इन्कम्बैंसी है, अब उनके निष्कर्षों का मजाक उड़ रहा है.
इन चुनावी सर्वेक्षणों की वजह से मतदाताओं की चुनने की स्वतंत्रता प्रभावित होती है. ये साफ-सुथरे चुनाव में बाधक हैं. इन पर पाबंदी लगाने के लिए चुनाव आयोग की गाइडलाइन में संशोधन किया जाना चाहिए.
कुछ दलों को मिल रहे अनुचित फायदे को रोकने के लिए चुनाव आयोग को एक दिन में या यथासंभव न्यूनतम अवधि में चुनाव संपन्न कराने का लक्ष्य निर्धारित करना होगा.
अशोक लवासा ने चुनाव आयोग की बैठकों से तब तक के लिए खुद को अलग कर लिया है, जब तक कि आयोग उनकी विसम्मति वाली राय को सार्वजनिक करने की मांग को मान नही लेता हो.
नाहिद इस्लाम—युवा नेता और 2024 के प्रतिरोध आंदोलन का चेहरा, ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में सात महीने के छोटे कार्यकाल के बाद एनसीपी की स्थापना की.