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Friday, 6 February, 2026
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मोदी के नकारात्मक चुनाव प्रचार के बावजूद पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत का इच्छुक क्यों है

पाकिस्तान में सेना के मौजूदा प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने भी भारत के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की इच्छा जताई है.

नई केंद्र सरकार में दक्षिण भारत से कोई बड़ा चेहरा नहीं

उत्तर और दक्षिण की बिलकुल ही अलग-अलग प्रकार की सामाजिक-राजनैतिक परिस्थितियां, अलग प्रकार की समस्याएं एवं चिंताएं हैं – इन सब मसलों को संतोषजनक रूप से हल करने की कोशिश होनी चाहिए.

दलित महिलाओं के उत्पीड़न में सवर्ण महिलाएं क्यों शामिल होती हैं?

ऐसा शायद कभी नहीं हुआ कि सवर्ण महिलाओं ने अपने परिवार के उन पुरुषों का बहिष्कार कर दिया हो, जिन्होंने दलित महिलाओं का यौन शोषण या बलात्कार किया हो बल्कि वो उनको बचाने की तमाम कोशिशें करती हैं.

‘बूज़ ब्रिगेडियर’ से लेकर अंडा और तंबू घोटाले तक: सेना को नैतिक मानदंडों में गिरावट रोकना होगा

वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल, जवानों से घरेलू नौकरों का काम लेने और बिजली बिलों में हेरफेर जैसे विशेषाधिकारों के दुरुपयोग के मामले बेकाबू हो चुके हैं.

झारखंड में इतने बड़े समीकरण के बावजूद महागठबंधन क्यों हारा

झारखंड में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. लोकसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करके बीजेपी ने बढ़त ले ली है. वह अपनी सरकार बचाने के लिए लड़ेगी, लेकिन क्या विपक्षी दल इस लड़ाई के लिए तैयार हैं?

डॉ. पायल की आत्महत्या: सवर्णों के बीच समाज सुधार आंदोलन की सख्त ज़रूरत

भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और उसमें दर्ज एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट दलित-आदिवासियों को ब्राह्मणवाद के सामंती मानस से संरक्षण प्रदान करता है.

वे चार वजहें, जिसके कारण हार गई कांग्रेस

कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र के माध्यम से सही चाल चली थी, लेकिन वह मसले चुनावी प्रचार में पीछे छूट गए. रोजगार की योजना, किसानों को राहत, ओबीसी के लिए कार्यक्रम आदि के बारे में कांग्रेस मतदाताओं को बता ही नहीं पाई.

क्या मोदी अपने मंत्रिमंडल को आपराधिक छवि के सांसदों से मुक्त रख पाएंगे

देश की राजनीति को अपराधीकरण से मुक्त कराने और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के चुनाव आयोग और न्यायपालिका के प्रयास राजनीतिक दलों...

प्रतिरोध की परंपरा में अविस्मरणीय है गणेशशंकर विद्यार्थी के ‘प्रताप’ का योगदान

हिन्दी पत्रकारिता की जो परम्परा शुरू की गई, सच्चे मायनों में वह अन्यायी सत्ताओं के प्रतिरोध की ही रही है.

मोदी और अमित शाह को चिंता करनी चाहिए: कोई भी पार्टी इतने बड़े जनादेश को संभाल नहीं पाई है

भाजपा को याद रखना चाहिए कि 1971 और 1984 की भारी जीतों के बाद इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के साथ क्या हुआ था.

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नये सरसों की आवक के बीच सरसों तेल-तिलहन में गिरावट जारी

नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित देश की कुछ मंडियों में सरसों की नयी फसल की छिटपुट आवक होने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.