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Sunday, 8 March, 2026
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बिहार में मासूम बच्चों के काम क्यों न आई आयुष्मान भारत योजना

बिहार जैसे गरीब राज्यों और इंश्योरेंस आधारित आयुष्मान भारत योजना के बीच कोई तालमेल ही नहीं है. ये योजना देश के विकसित इलाकों के लिए बनी है. बिहार के लिए सरकार को कुछ और सोचना होगा.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति मसौदा पुरातनपंथी नहीं पर शक है कि इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा

इस दस्तावेज के सुझावों को देखें तो पिछले पांच वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार इसके विपरीत दिशा में चली है.

राम रहीम की पैरोल अर्ज़ी पर इतना हंगामा क्यों, यह तो न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है

पैरोल किसी भी अपराध के लिये सज़ा पाने वाले अपराधी का अधिकार है और अपराधी को पैरोल पर रिहा करने का निर्णय प्रशासन के विवेक पर निर्भर करता है.

मुसलमानों को नरेंद्र मोदी के वादों को किस तरह देखना चाहिए?

अगर अल्पसंख्यक खुले मन से सरकार के साथ बातचीत और संवाद में जाते हैं तो इसके बाद का दारोमदार बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी पर होगा कि संसद के सेंट्रल ह़ॉल में कही गई अपनी बातों और वादों पर खरे उतरें.

लोहिया और आंबेडकर के सपनों को क्या पूरा कर पाएंगे अखिलेश?

लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में दलितों ने 25 साल बाद साइकिल चुनाव चिह्न पर वोट डाला है. सपा और दलितों के बीच की कड़वाहट घटी है. क्या अखिलेश इस समय दलितों की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे?

कबीर सिंह: प्रेम नहीं, सामंती ‘मर्दाना कुंठा’ का बेशर्म मुज़ाहिरा है

दरअसल, 'कबीर सिंह' कोई प्रेम कहानी नहीं है, यह समाज में चारों तरफ पसरी सामंती मर्द यौन कुंठाओं का शोषण और उसकी बिक्री है!

मोदी अकेले नहीं, दुनिया भर में दक्षिणपंथी लोकप्रिय अधिनायकों का दौर

दक्षिणपंथी अधिनायकवाद की एक प्रवृत्ति ये भी है कि वो समर्थन तो वंचितों से लेता है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं करता. धार्मिक उन्माद दक्षिणपंथी अधिनायकवाद का हथियार है.

आरक्षण के खिलाफ क्यों बोलने लगे हैं दलित नेता

अगर आरक्षण को खत्म करने की बात अगर कोई सवर्ण करेगा तो जनाक्रोश फैल सकता है. जबकि अगर कोई दलित-वंचित पहचान वाला नेता आरक्षण को खत्म कर देने की बात करे तो आरक्षित वर्गों के भीतर कई तरह की प्रतिक्रयाएं होने लगती हैं.

भारत में चुनाव सुधार के लिए जर्मनी से कुछ सबक

भारत में भी समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के जरिए प्रतिनिधियों का चुनाव होना चाहिए, या फिर जर्मनी की तरह मिली-जुली प्रणाली अपनाई जानी चाहिए.

परिजन हिताय, परिजन सुखाय की नीति पर चली बसपा

भाई और भतीजे को पार्टी नेतृत्व में लाते समय मायावती शायद भूल गयीं कि पिछली बार अपने भाई को पद से हटाते समय उन्होंने घोषणा की थी उनके परिवार का कोई भी सदस्य बसपा में कोई भी पद नहीं संभालेगा.

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ईरान का संघर्ष भारत तक पहुंचा, मुसलमानों से फिर देशभक्ति साबित करने की मांग

जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.

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राजनीति

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महिलाएं सशक्त होती हैं, दूसरों से कमतर नहीं हैं: राष्ट्रपति मुर्मू

(फोटो के साथ) नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं की ताकत और उपलब्धियों की रविवार को सराहना करते हुए उन्हें...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.