तेजी से बढ़ रहे भारतीय बाजार पर कब्जा जमाने के लिए विमान कंपनियां आपस में गलाकाट प्रतिस्पर्धा कर रही हैं. और ये ऐसे समय में हो रहा है, जब अर्थव्यवस्था के ज्यादातर क्षेत्र मंदी का सामना कर रहे हैं.
हाल की घटनाओं से ऐसा लगता है कि राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में जहां केन्द्र ने इस दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है वहीं राज्य सरकारों का रवैया भी ढुलमुल रहा है.
बीजेपी अब तक जिन ओबीसी जातियों पर पूरा ओबीसी आरक्षण खा लेने का आरोप लगाती थी, उनमें से लगभग सभी जातियां बीजेपी को वोट देने लगी हैं. ऐसे में ओबीसी का बंटवारा करके बीजेपी इनका समर्थन क्यों खोना चाहेगी?
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा- अपनी राजनीतिक परिस्थितयों के बावजूद राज्यों के वित्तमंत्रियों ने उच्च स्तर की राजनीतिक जिम्मेदारी और परिपक्वता के साथ काम किया.
आर्टिकल-15 की सबसे बड़ी समस्या ये है कि यह फिल्म जाति समस्या का समाधान संविधान में देखती है. लेकिन क्या संविधान या कोई भी कानून दो लोगों या समूहों के बीच भाईचारा स्थापित कर सकता है?
जब आप फिल्म देखेंगे तो पता चलेगा कि दलित नेताओं संग ऐसा क्या-क्या होता है कि उनकी कहानियां मुख्यधारा का हिस्सा नहीं बन पातीं या शुरू होते ख़त्म हो जाती हैं.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.