बेहतर तो यही है कि महेंद्र सिंह धोनी अपने रेजीमेंट को क्रिकेट के मैदान में न उतारें, क्योंकि खिलाड़ी की शान इसी में है कि वह अपनी फौज का दूत बनकर मैदान में न उतरे बल्कि अपने देश का गौरव बढ़ाने के लिए खेले और जीते.
कई राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं. अगर कांग्रेस अपने घोषणापत्र में किए गए वादों के प्रति गंभीर होती तो उनमें से कुछेक वादों को वो राज्य सरकारों से पूरा करवा देती.
अखिलेश यादव ने जिस तरह से सार्वजनिक बयानबाजी से खुद को बचाया है, यह न केवल उनकी राजनीतिक सूझबूझ को दर्शाता है, बल्कि ये गठबंधन के बने रहने की संभावनाओं का संकेत भी है.
मायावती को उम्मीद थी कि 2019 में अगर जाटव, यादव और कैंडिडेट की अपनी जाति इकट्ठा हो जाए और उसमें मुस्लिम वोटर जुट जाए, तो उनके उम्मीदवार जीत जाएंगे. ऐसा न होना था, न हुआ