प्रधानमंत्री मोदी मध्यवर्ग से पैसा लेकर गरीबों को दे रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि यह वर्ग राष्ट्रवाद और मुसलमानों के प्रति अपनी नापसंदगी के कारण वैसे भी उन्हें वोट देगा ही.
अखिलेश यादव में क्या वह जज्बा है कि वे बीजेपी के हमलों से समाजवादी पार्टी को बचा ले जाएंगे? क्या उनमें अपने पिता की तरह जमीनी राजनीति करने का माद्दा है? वे मुलायम सिंह क्यों नहीं बन पा रहे हैं?
वामपंथ हमारे सार्वजनिक जीवन से गायब हो जाये तो यह बड़ा त्रासद कहलायेगा. वामपंथ की नाकामियां अपनी जगह लेकिन वामपंथ ने भारतीय लोकतंत्र के जनतांत्रिक चरित्र को बनाये ऱखने में अहम भूमिका निभायी है.
कांग्रेस की वापसी संभव है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वह आत्म मंथन करें, हार के कारणों में जाये, ईमानदारी से उनका निवारण करे तथा पूरे आत्म विश्वास के साथ जनता के बीच जाये.
पिछली सरकार के दौरान यूजीसी ने हड़बड़ी दिखाते हुए आरक्षण विरोधी 13 प्वाइंट रोस्टर को लागू कर दिया था. जनांदोलनों के बाद मौजूद सरकार ने उसे खारिज करने का कानून पास कर दिया है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.
लखनऊ, आठ मार्च (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल संबंधी राजनीतिक विवाद को ‘‘अति दुर्भाग्यपूर्ण’’...