यह महत्वपूर्ण है कि लालू यादव पर चार्जशीट उस सरकार के कार्यकाल में हुई, जिसमें वे खुद हिस्सेदार थे. संघ की मंशा को अंजाम तक लालू के अपने लोगों ने पहुंचाया.
हम हर उसकी सलाह मानेंगे और सुनेंगे भी जो हमारे मरने के ख्वाब न बुनता हो. जिसे देश की फ़िक्र हो. आपने बहुतों की तरह राहुल गांधी हों या कांग्रेस दोनों की पीठ में खंजर भोंका है.
पिछले 20 वर्षों में देश को तीन अलग-अलग प्रधानमंत्री मिले और इन तीनों के राज में रक्षा बजट (पेंशन को छोड़कर) जीडीपी के 1.5 प्रतिशत की सीमा को तोड़ नहीं पाया. तो क्या यह बजट महज जुगाड़ के सिवाय वास्तविक सुरक्षा नहीं दे पाएगा?
धारा-370 की बदौलत जम्मू कश्मीर के पास अपना एक बेहद ख़ास और सख़्त दल-बदल विरोधी कानून है जो गोवा और कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक घठनाक्रम में एक रोशनी की किरण सा दिखता है.
मंडल कमीशन, कश्मीरी पंडितों का पलायन, शाहबानो मामले में कांग्रेस का रुख, आक्रामक दलित-पिछड़ा राजनीति का भय, बढ़ती धार्मिकता जैसे कारणों से सवर्णों ने कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी को चुन लिया.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.