कम ही लोग जानते हैं कि महाकवि नागार्जुन ने अपनी संवेदना के धरातल पर विद्रोही नायिका फूलन देवी पर दो कविताएं लिखी हैं. पहली कविता ‘फूलन देवी’ और दूसरी कविता ‘फूलन-कथा’ है.
जिन दलों पर मुसलमानों को अभी तक विश्वास था, उनकी विश्वसनीयता अब संदिग्ध है. बीजेपी से लड़ पाने की इनकी क्षमता की परीक्षा हो चुकी है और ये फेल हो चुके हैं.
राज्य सरकार इन दलित-पिछड़े शरणार्थियों को अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ी जाति का जाति प्रमाण पत्र भी जारी नहीं करती. जिसके चलते इस तबके के विद्यार्थी केंद्रीय छात्रवृत्तियों का भी फायदा नहीं उठा पाते हैं.
लालू यादव परिवार में कलह मची है, जिसकी वजह से तेजस्वी यादव को काम करने का मौका नहीं मिल रहा है. ऐसी स्थिति में अगर नीतीश कुमार बीजेपी से अलग होते हैं, तो मुसलमानों के लिए जेडीयू विकल्प के तौर पर मौजूद होगी.
क्या गर्भ-संस्कार के जरिए 'गोरा, लंबा और अनुकूलित बच्चा' पैदा करने की सोच के पीछे जर्मनी के हिटलर दौर की आर्य श्रेष्ठता का सिद्धांत काम नहीं कर रहा है?
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.