मोदी के पहले कार्यकाल में, जीडीपी में मैनुफैक्चरिंग का योगदान स्थिर रहा है. इसलिए अगले चंद वर्षों में इस योगदान में 50 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
सच पूछिये तो यह सारा मामला उन श्रेष्ठता ग्रंथियों का है, जिनकी बाबत कभी उम्मीद की जाती थी कि लोकतांत्रिक चेतनाओं के क्रमशः विस्तार के साथ खत्म हो जायेंगी.
यह भी इत्तफाक है कि केआर रमेश कुमार पहली बार स्पीकर तब बने थे. जब एचडी देवेगौड़ा मुख्यमंत्री थे और दूसरी बार जब वे स्पीकर बने तो देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री थे.
एनजीटी अक्सर पर्यावरण प्रदूषित करने वाली सरकारी- गैर सरकारी एजेंसियों पर जुर्माना लगाकर सुर्खियां बटोरता रहा है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि एक-दो मौकों को छोड़कर जुर्माने की रकम शायद ही कभी वसूल की जा सकी है.
संघ हिंदुत्व की एक खास विचारधारा है, जो मदनमोहन मालवीय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के हिन्दू-चिंतन से पृथक एक ऐसा चिंतन है, जिसकी वैचारिक जड़ें एक साथ मनुस्मृति और यूरोपीय फासीवादी विचारधारा में है.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि मेटरनिटी बेनेफिट की लागत उठाने का जिम्मा सिर्फ इंप्लॉयर का नहीं होना चाहिए. बल्कि इसे सोशल इंश्योरेंस या पब्लिक फंड से चुकाया जाना चाहिए. इसलिए इसमें सरकार की भूमिका की बात हो रही है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.