ईरान का सबसे अच्छा दांव यह होगा कि वह अमेरिका को ज़मीन पर लंबे समय तक महंगे युद्ध में उलझाए रखकर थका दे और जीत हासिल करे, जैसा कि वियतनाम, अफगानिस्तान और कुछ हद तक इराक में हुआ.
बिना लागू किए बैन सिंबॉलिज़्म है. बिना सोशल चेंज के बैन ड्रामा है. और धीरे-धीरे, नागरिक हर नई रोक को कानून नहीं, बल्कि बैकग्राउंड नॉइज़ मानने लगते हैं.
एक बार ‘रेजीम चेंज’ को सही मान लिया जाए, तो यह सोच फैलने लगती है. प्रभाव और ताकत को लेकर ईर्ष्या रखने वाली और पश्चिम पर शक करने वाली प्रतिद्वंद्वी शक्तियां भी इसी तर्क का इस्तेमाल दूसरी जगहों पर करेंगी.
नेपाल में Gen-Z मूवमेंट के बाद से चीन थोड़ा शांत रहा है क्योंकि बीजिंग की अपनी रेड लाइन्स हैं, खासकर 1989 के तियानआनमेन स्क्वायर प्रोटेस्ट्स के बाद, जो लोकतंत्र के समर्थन में एक बड़ा आंदोलन था.
उनकी ऑटोबायोग्राफी बॉर्डर पार करके अलग-अलग भाषाओं में छपी. वह समझती थीं कि उन्हें कैसे फंसाया जा रहा है और उन्होंने उन जगहों का इस्तेमाल खुद के लिए बोलने के लिए किया.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.