काहिल विपक्ष बिना कुछ किए सब कुछ पा लेना चाहता है. वह अपने आरामदेह घरों और दफ्तरों में बैठे-बैठे, यूरोप की सैर का मज़ा लेते हुए चाहता है कि मीडिया उसके पास आए और विपक्ष की भूमिका निभाए.
दुनिया में इस समय ऐसे नेताओं की एक पूरी कतार है जो जन भावनाओं को उभार कर तो कभी उनकी सवारी करके प्रभावी बने हैं. नरेंद्र मोदी की पहचान भी इसी क्रम में होती है.
आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के कैंडिडेट के अलग-अलग इंटरव्यू करने को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिया है. कोर्ट के इस फैसले से कटेगरी देखकर नंबर देने का चलन खत्म हो सकता है.
दिल्ली विश्वविद्यालय में सावरकर को भगत सिंह और सुभाषचन्द्र बोस के बराबर खड़ा करने की कोशिश की गई थी लेकिन उद्धव उनके समानांतर जवाहरलाल नेहरू का जिक्र कर रहे थे.
मांग बढ़ाने का उपाय यही हो सकता है कि सरकारी क्षेत्र में नई नौकरियां देकर, निजी कर्मचारियों को टैक्स में राहत देकर और किसानों को पीएम-किसान जैसी योजनाओं से धन देकर उनकी खरीदने की क्षमता बढ़ाई जाए.
महामना ज्योतिबा फुले ने भारतीय समाज को आधुनिक बनाने के अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने हेतु 24 सितंबर, 1873 को ‘सत्य शोधक समाज’ की नींव रखी. सामाजिक न्याय की दिशा में ये एक बड़ा कदम था.
जेडी (यू) के पास अभी भी लोकसभा में 12 और राज्य विधानसभा में 85 सदस्य हो सकते हैं, लेकिन नीतीश कुमार के बिना पार्टी के सामने नेतृत्व की बड़ी कमी खड़ी हो गई है.