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Monday, 2 February, 2026
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पहलगाम हमला: पाकिस्तान अगर युद्ध चाहता है, तो चलिए उसे दिखा देते हैं कि असली जंग क्या होती है

भारत को पाकिस्तान को यह दिखाने की ज़रूरत है कि आतंकवाद की कीमत चुकानी पड़ती है. वह भारतीय नागरिकों की हत्या करके बच निकलने की उम्मीद नहीं कर सकता.

भारत संदिग्ध आतंकियों को विदेश से हासिल तो कर रहा है, लेकिन क्या उनके मामले में न्याय हो पाएगा?

रेडियोवाला की कहानी से साफ है कि भारतीय अधिकारी ऐसे आतंकियों को विदेश से हासिल करने में विफल क्यों होते रहे हैं. उनके खिलाफ सबूत और मुकदमा अक्सर कमज़ोर साबित होता रहा है.

पहलगाम हमले का जवाब ज़रूरी है, भारत इसके लिए अमेरिका और इज़रायल से सबक ले सकता है

आतंकवादी हमला करने के लिए जिस जगह को चुना गया वह जून के पहले हफ्ते से शुरू होने वाली अमरनाथ गुफा यात्रा के मार्ग पर स्थित है, जो भी हो यह यात्रा तो शुरू होगी ही, हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को इन हिंसक कार्रवाइयों का बंधक नहीं बनने दिया जा सकता.

भारत में बलात्कार की समस्या कानूनी विफलता की देन नहीं, हम पुरुषों को महिला सम्मान का पाठ नहीं पढ़ाते

हंपी से लेकर आरजी कर तक तमाम वारदात यही साबित करती हैं कि भारत में औरत सुरक्षित नहीं है और इस समस्या का समाधान उन पर शासन करने से नहीं निकलने वाला.

भगवद् गीता विकासशील भारत की जीवनरेखा है, यूनेस्को से मान्यता मिलना गौरव का क्षण है

इस साल, पहली हिंदू अमेरिकी कांग्रेस सदस्य तुलसी गबार्ड और सुहास सुब्रमण्यम और इसके बाद काश पटेल ने एफबीआई निदेशक के पद पर गीता पर हाथ रखकर शपथ ली.

मुझे एएस दुलत के लिए बुरा लग रहा है—उन्होंने फारूक अब्दुल्ला से दोस्ती पर किताब लिखी, मिली बेरुखी

दुलत जब आईबी में थे, तब उन्होंने कश्मीर में काम किया था और फारूक अब्दुल्ला के साथ उनके करीबी संबंध थे. तब से दिल्ली ने गुप्त वार्ता के लिए उनका इस्तेमाल किया है.

अबकी बार 75 पार—मोदी कहीं नहीं जा रहे, विपक्ष पुरानी सोच में उलझा है

क्या मुफ्त रेवड़ियां विपक्ष को आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं? वे ऐसा जो भी वादा करेंगे, मोदी उससे बेहतर पेशकश कर देंगे. मोदी चूंकि सत्ता में हैं, उनके वादी को ज्यादा विश्वसनीय माना जाएगा.

‘पंचरवाला’ शब्द मुसलमानों को अकुशल दिखाता है, लेकिन कोई भी सही सवाल नहीं पूछ रहा

अब बहस इस बात पर है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में मुसलमानों का अपमान किया या फिर उनकी टिप्पणियों को संदर्भ से बाहर ले जाया गया.

आंबेडकर की छवि पार्टियों ने संविधान निर्माता तक सीमित रखी, अगर वे PM होते तो कुछ ऐसा होता देश

कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने संसद में खुद को आंबेडकर के करीब बताया, लेकिन किसी ने यह कहने की हिम्मत नहीं की कि अगर आंबेडकर पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते.

पश्चिम बंगाल में वक्फ पर जंग कोई नहीं जीत सकेगा, ऐसी आग न लगाएं जिसमें आप खुद जल जाएं

इस्लामी मौलवियों के साथ अपने रिश्ते को मजबूत बनाने के टीएमसी सरकार के प्रयासों ने धर्म को अंततः राजनीति की भाषा में दाखिल करा दिया.

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चंबल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का समापन

कोटा, एक फरवरी (भाषा) चंबल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का नौंवां संस्करण रविवार को यहां संपन्न हुआ, जिसमें राजस्थान में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.