रेडियोवाला की कहानी से साफ है कि भारतीय अधिकारी ऐसे आतंकियों को विदेश से हासिल करने में विफल क्यों होते रहे हैं. उनके खिलाफ सबूत और मुकदमा अक्सर कमज़ोर साबित होता रहा है.
आतंकवादी हमला करने के लिए जिस जगह को चुना गया वह जून के पहले हफ्ते से शुरू होने वाली अमरनाथ गुफा यात्रा के मार्ग पर स्थित है, जो भी हो यह यात्रा तो शुरू होगी ही, हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को इन हिंसक कार्रवाइयों का बंधक नहीं बनने दिया जा सकता.
दुलत जब आईबी में थे, तब उन्होंने कश्मीर में काम किया था और फारूक अब्दुल्ला के साथ उनके करीबी संबंध थे. तब से दिल्ली ने गुप्त वार्ता के लिए उनका इस्तेमाल किया है.
क्या मुफ्त रेवड़ियां विपक्ष को आगे बढ़ने में मदद कर सकती हैं? वे ऐसा जो भी वादा करेंगे, मोदी उससे बेहतर पेशकश कर देंगे. मोदी चूंकि सत्ता में हैं, उनके वादी को ज्यादा विश्वसनीय माना जाएगा.
कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने संसद में खुद को आंबेडकर के करीब बताया, लेकिन किसी ने यह कहने की हिम्मत नहीं की कि अगर आंबेडकर पीएम होते तो देश के हालात कुछ और होते.
कोटा, एक फरवरी (भाषा) चंबल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का नौंवां संस्करण रविवार को यहां संपन्न हुआ, जिसमें राजस्थान में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने...