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Wednesday, 4 March, 2026
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आपातकाल के दौरान संविधान में शामिल मौलिक कर्तव्यों पर मोदी का दिल आया

मोदी सरकार भारत की संवैधानिक परंपरा की कतिपय गौण बातों- जो उसके विचारों से मेल खाती हैं - को चुनकर उन्हें संविधान की बुनियाद साबित करने में माहिर है.

दलितों का पर्व क्यों है संविधान दिवस और कौन चाहता है इसकी समीक्षा

ये एक पहेली है कि देश की आजादी के बाद संविधान के लागू होने के बावजूद जो समुदाय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा के मामले में सबसे पीछे रह गया, वही समुदाय संविधान के प्रति सबसे ज्यादा वफादार क्यों है.

दिल्ली के निगम पार्षदों को अखबारों में अपने प्रदर्शन की रेटिंग की अधिक परवाह

अमेरिकी विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने कुछ निगम पार्षदों को सूचित किया कि चुनाव से पहले एक अखबार में उनके कामकाज पर रिपोर्ट छपेगी. पढ़िए इसका परिणाम क्या निकला.

डॉ. आंबेडकर को भारतीय संविधान का निर्माता क्यों कहा जाता है

संविधान को भारतीय समाज के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने में डॉ. आंबेडकर की सबसे प्रभावी और निर्णायक भूमिका थी.

महाराष्ट्र की सीख: लोक पर तंत्र के पहरे में हमें शांतिपूर्वक मूर्ख बनाया जा रहा!

जम्मू कश्मीर व कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र में मंचित किये जा रहे सत्ता के अपहरण या लोकतंत्र के चीरहरण के महानाटक के बाद इस तथ्य में किसी को भी संदेह नहीं रह जाना चाहिए कि हमारा ‘शांतिकामी’ निज़ाम उसे अभीष्ट शांति की स्थापना के लिए लोक लाज को भी उसकी औकात बता देने पर आमादा है.

कोलकाता में बांग्लादेश क्रिकेट टीम के खिलाफ मिली इस ऐतिहासिक जीत का रंग गुलाबी है

कोलकाता टेस्ट तय समय से करीब आधे वक्त में ही खत्म हो गया. मैच के तीसरे दिन ही भारतीय टीम ने बांग्लादेश का ‘पैकअप’ कर दिया.

अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने से पहले मोदी सरकार हमें यह सच बताए कि इसमें गड़बड़ क्या है

बजट के जरिए सामने आने वाली बुरी खबरों के बाद सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेतपत्र जारी करे और इसे किसी स्वतंत्र अर्थशास्त्री को चलाने के लिए दे.

क्या मोदी-शाह की भाजपा या भारत के लिए मुसलमान कोई मायने रखते हैं

भारत के मुसलमानों को उनके द्वारा किए जाने वाले मतदान के रुख के चलते देश की सत्ता व्यवस्था में जायज जगह से वंचित करना आत्मघाती ही साबित हो सकता है.

अमीरों के टैक्स पर मौज नहीं कर रहे हैं गरीब

मध्य वर्ग का बड़ा हिस्सा देश के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थाओं में सस्ती शिक्षा हासिल करके ही खड़ा हुआ है, लेकिन अब वह चाहता है कि शिक्षा संस्थान प्राइवेट हो जाएं और वहां पढ़ने वाले ख़ुद अपना ख़र्च उठाएं.

नवाचार युक्‍त शिक्षा न केवल सामाजिक, आर्थिक विकास में मददगार होगी, बल्कि प्रतिस्पर्धा के लिए भी है जरूरी

देश में 33 साल बाद नई शिक्षा नीति देश में आ रही है. नवाचारयुक्‍त, शोधपरक, अनुसंधान को बढ़ावा देती यह नई शिक्षा नीति देश के सामाजिक आर्थिक जीवन में नए सूत्रपात का आगाज करेगी.

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तेलंगाना: पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार के मामले में फिल्म निर्देशक मणिशंकर का बेटा गिरफ्तार

हैदराबाद, चार मार्च (भाषा) हैदराबाद में पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी में रुकावट डालने और एक होमगार्ड पर हमला करने के मामले में फिल्म निर्देशक...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.