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Wednesday, 4 February, 2026
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विकास कोई मोदी का ‘अच्छे दिन’ वाला जुमला नहीं बल्कि इसका अर्थ लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है

मोदी सरकार खुश हो सकती है कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' की रैंकिंग में में भारत की रैंकिंग ऊपर हुई है मगर वह इन तथ्यों की अनदेखी नहीं कर सकती कि खुशहाली सूचकांक के लिहाज से भारत 140वें नंबर पर है और दक्षिण-पूर्व एशिया में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं यहीं होती हैं.

दिल्ली अपना ज्यादातर धुआं खुद बनाती है और किसानों का रोना रोती है

दिल्ली के लोग साफ हवा में सांस ले सकें, इसके लिए किसानों को मजबूर किया जा रहा है कि पराली जलाना बंद करें. इस बीच दिल्ली वाले अपनी गाड़ियों से डीजल का धुआं निकालते रहेंगे, जेनरेटर सेट चलाते रहेंगे और पटाखे तो वे फोड़ेंगे ही.

मोदी सरकार कश्मीर में आग से खेल रही है, यह कुलगाम जैसी हिंसा को बढ़ावा देगा

राजनीति और मीडिया में ‘हमारे बनाम उनके’ के कथानक पर विराम लगना चाहिए और आम नागरिकों एवं आतंकवादियों के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए.

भाजपा जानती है कि अयोध्या मुद्दा एक ऐसा ‘चेक’ है, जिसको दोबारा भजाया नहीं जा सकता

हिंदू बहुसंख्यक अब आश्वस्त हैं कि कोई भी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण को नहीं रोक सकता है.

इमरान खान के नया पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ को क्या मरकर ही साबित करना होगा कि वे सच में बीमार हैं?

इमरान खान की पार्टी ‘पीटीआई’ के नेता शरीफ पर नाहरी खाने से लेकर बिलकुल अच्छी सेहत में होने के आरोप लगाकर उनकी बीमारी का तरह-तरह से मखौल उड़ा रहे हैं.

भाजपा-जेजेपी गठबंधन के सामने मंत्रिमंडल बनाने में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण बड़ी चुनौती

खट्टर सरकार के 10 में से आठ मंत्रियों के हारने के बाद इस बार नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह के लिए खींचतान शुरू हो चुकी है. दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक लॉबिंग भी शुरू हो गई है.

सरदार पटेल के व्यंग और मजाक के कायल थे महात्मा गांधी

बौद्धिक बातचीत पर पटेल नाक-भौं सिकोंड़ लेते थे. हालांकि वो लंदन से पढ़कर आए हुए बैरिस्टर थे. लेकिन वो अपने भाषणों में खुद को चौथी पास अशिक्षित की तरह पेश करते थे.

मोदी मनरेगा को तो खत्म ही कर देना चाहते थे मगर अब यही उनके लिए आर्थिक मंदी से लड़ने का हथियार है

हाल में मनरेगा को लेकर एक के बाद एक जितनी घोषणाएं की गई हैं उन्हें देखकर तो यही लगता है कि इस योजना पर मोदी सरकार की निर्भरता तेजी से बढ़ रही है और वह इसे व्यापक ग्रामीण संकट और बेरोजगारी के एक अन्तरिम समाधान के रूप में देखती है.

जयंती : भुला दिये गये भारतीय समाजवाद के पितामह आचार्य नरेन्द्र देव

नरेन्द्र देव जिन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष के दिनों में कांग्रेस में रहकर समाजवाद की अलमबरदारी की और स्वतंत्रता के बाद का जीवन कांग्रेस का समाजवादी विकल्प खड़ा करने में होम कर दिया.

कैसे कन्हैया, उमर, हार्दिक, जिग्नेश, शेहला और चंद्रशेखर आज़ाद अब भी अपना रास्ता खोज सकते हैं

2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद स्व-निर्मित युवा नेताओं को अगले स्तर की योजना की जरूरत है.

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वाराणसी/लखनऊ, 3 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के साथ मुठभेड़ में मंगलवार रात एक लाख रुपये का इनामी एक...

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दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.