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Wednesday, 4 March, 2026
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ज्वाला गुट्टा : तेलंगाना में बलात्कार और हत्या के लिए समाज को दोष दें, सिर्फ पुलिस या सरकार को नहीं

मैंने हैदराबाद में कभी असुरक्षित महसूस नहीं किया. यकीन करना मुश्किल है कि शहर में ऐसा भयानक अपराध हुआ है.

बीजेपी भले ही राज्यों में सिकुड़ रही हो लेकिन विचारधारा फल-फूल रही है

भाजपा की सत्ता अब भले ही केवल कुछ बड़े और महत्वपूर्ण राज्यों तक सीमित हो गई है लेकिन उसकी हिंदुत्ववादी विचारधारा ने अपना वर्चस्व कायम कर लिया है और देशभर में इसका कोई बड़ा विरोध नहीं हो रहा है.

लुटियंस दिल्ली की चहेती सुप्रिया सुले क्या अब महाराष्ट्र की ताई बन गई हैं

महाराष्ट्र में एनसीपी पर अजित पवार की पकड़ जिस तरह टूटी है उससे वहां की ताज़ा सियासी नौटंकी में सुप्रिया सुले ही खामोश विजेता के रूप में उभरी हैं.

जेएनयू मॉडल जैसी सब्सिडाइज्ड शिक्षा से भारतीय नफरत क्यों करते हैं

भारत में शैक्षणिक संस्थानों के कैंपस को लगातार अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है. इसके लिए रोहित वेमुला, पायल तड़वी, फातिमा लतीफ की आत्महत्या और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हुए विरोध-प्रदर्शन को देखा जा सकता है.

ट्विटर को ब्लू टिक लौटाने का मेरा फैसला और लोकतंत्र के लिए इस बहस के मायने

खास लोगों को मिलने वाला ब्लू टिक मेरे विचार में संवाद के मामले में एक किस्म का नस्लभेद है या इसे आप डिजिटल वर्ण व्यवस्था भी कह सकते हैं. ये लोकतंत्र के लिए हानिकारक है.

अयोध्या में गरीब औरतें और आदमी रश्क कर रहे- हाय, हम छुट्टा गाय या बैल क्यों न हुए

अयोध्या के कई भाजपाई संत गाय को पशु कहने पर चिढ़ जाते हैं और उपदेश देने लगते हैं कि ‘वह पशु नहीं माता है’. यह बात और है कि ये उपदेश-कुशल संत इस माता के लिए खुद कुछ नहीं करते और करदाताओं के पैसे से ही उसको पालना चाहते हैं.

शरद पवार के पावर के सामने पस्त हो गई भाजपा

पवार के राजनीतिक दांव-पेंचों की सूची बड़ी लंबी है. एक समय उनके संबंध शिवसेना से ठीक-ठाक थे, लेकिन बाद में उसी शिवसेना को किनारे करने की जिम्मेदारी भी उन्होंने निभाई. इस बार उन्होंने एक और बड़ा खेल कर दिया.

अयोध्या विवाद के समाधान के बाद अब धरतीपुत्रों को राम से सीखना चाहिए कि मैकालेपुत्रों से कैसे निपटा जाए

शायद प्रत्येक युग का अपना रामराज्य होता हो. लेकिन मौजूदा दौर में रामराज्य पर चर्चा तभी संभव है जब पहले हमें ये स्पष्ट हो कि हम कौन हैं.

वो कौन सी दो बड़ी भूलें थीं जो इन पाकिस्तानी जासूसों पर पड़ीं भारी, पहुंचाया फांसी के तख्ते तक

वसीम अकरम और ब्रिगेडियर राजा रिज़वान, जिन्हें पाकिस्तान की सेना ने पिछले हफ्ते जासूसी के आरोप में फांसी दी थी, जिनको पकड़े नहीं गए होंगे लेकिन दो चीजें गलत हो गईं.

अगर आपको जेएनयू फीस बढ़ोतरी पर छात्रों का विरोध समझ नहीं आ रहा, तो सुनीता की ये कहानी पढ़िए

यदि आप सुनीता के माता-पिता हैं, तो आप कामना करेंगे और प्रार्थना करेंगे कि विरोध केवल जेएनयू के लिए फीस वृद्धि के रोलबैक के साथ समाप्त न हो.

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केरल के राज्यपाल ने राज्य में मलयाली को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाने संबंधी विधेयक पर हस्ताक्षर किए

तिरुवनंतपुरम, चार मार्च (भाषा) केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने बुधवार को मलयाली भाषा विधेयक 2025 पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसके तहत...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.