जम्मू कश्मीर व कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र में मंचित किये जा रहे सत्ता के अपहरण या लोकतंत्र के चीरहरण के महानाटक के बाद इस तथ्य में किसी को भी संदेह नहीं रह जाना चाहिए कि हमारा ‘शांतिकामी’ निज़ाम उसे अभीष्ट शांति की स्थापना के लिए लोक लाज को भी उसकी औकात बता देने पर आमादा है.
मध्य वर्ग का बड़ा हिस्सा देश के सरकारी उच्च शिक्षण संस्थाओं में सस्ती शिक्षा हासिल करके ही खड़ा हुआ है, लेकिन अब वह चाहता है कि शिक्षा संस्थान प्राइवेट हो जाएं और वहां पढ़ने वाले ख़ुद अपना ख़र्च उठाएं.
देश में 33 साल बाद नई शिक्षा नीति देश में आ रही है. नवाचारयुक्त, शोधपरक, अनुसंधान को बढ़ावा देती यह नई शिक्षा नीति देश के सामाजिक आर्थिक जीवन में नए सूत्रपात का आगाज करेगी.
सामना में लिखा है, 'जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के मोर्चे पर दिल्ली में अमानवीय लाठीचार्ज हुआ. सैकड़ों विद्यार्थियों के सिर फूट गए, हड्डियां टूट गईं और खून बहा. हजारों गिरफ्तारियां हुईं.'
आखिर ऐसी क्या वजह थी कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी 2014 में केन्द्र में राजग के सत्तासीन होने के बाद से विदेश यात्राओं में अपने साथ एसपीजी कमांडो ले जाने से गुरेज़ करने लगे?